एफसीआरए संशोधन पर केसी वेणुगोपाल का PM को पत्र, चर्च संगठन ACTS ने अदालत जाने का फैसला किया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव एवं सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के हालिया नियम-संशोधन को तत्काल वापस लेने की माँग की है। वेणुगोपाल का आरोप है कि ये संशोधित नियम अल्पसंख्यक समुदायों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालते हैं। इसी बीच ईसाई चर्चों के सामूहिक मंच एसीटीएस (ACTS) ने 25 जून 2025 को संशोधन को न्यायपालिका में चुनौती देने का संकल्प लिया है।
विरोध का केंद्र: एफसीआरए संशोधन क्या है
केंद्र सरकार ने हाल ही में एफसीआरए के नियमों में बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी सूत्रों के अनुसार विदेशी निधियों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही को मज़बूत करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये संशोधन किसी विशेष समुदाय को लक्षित नहीं करते। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि नए प्रावधान विदेशी अंशदान पर निर्भर स्वयंसेवी संगठनों, सामुदायिक निकायों और सामाजिक आंदोलनों के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे।
कांग्रेस की राजनीतिक चुनौती
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि संशोधित नियम उन संगठनों के लिए नई बाधाएँ खड़ी करते हैं जो विदेशी अंशदान के ज़रिए शैक्षणिक, धर्मार्थ और सामाजिक सेवाएँ संचालित करते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इन प्रावधानों का असमान असर अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा चलाई जाने वाली संस्थाओं पर पड़ेगा। संसद के आगामी सत्र में इंडिया ब्लॉक के इस संशोधन के विरुद्ध समन्वित रणनीति अपनाने की संभावना जताई जा रही है।
ACTS का कानूनी मोर्चा
ईसाई चर्चों के सामूहिक मंच एसीटीएस के अध्यक्ष बिशप डॉ. ओम्मन जॉर्ज की अध्यक्षता में हुई नेतृत्व बैठक में संशोधित नियमों को अदालत में चुनौती देने का फैसला लिया गया। संगठन के महासचिव जॉर्ज सेबेस्टियन के अनुसार संबंधित अदालतों में कानूनी अपीलें दायर करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह कदम उस व्यापक चिंता को दर्शाता है जो चर्च-संचालित संस्थाओं में विदेशी फंडिंग की निरंतरता को लेकर बन रही है।
28 जून को विरोध दिवस
एसीटीएस ने 28 जून को विरोध दिवस घोषित किया है। इस दिन केरल भर के गिरजाघरों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। यह आयोजन उस समय हो रहा है जब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संशोधन वापस लेने पर विचार नहीं कर रही।
आगे क्या होगा
एफसीआरए संशोधन अब नियामक निगरानी, अल्पसंख्यक अधिकारों और नागरिक समाज संगठनों की स्वायत्तता पर एक बड़ी बहस का केंद्र बन चुका है। कानूनी अपीलों के नतीजे और संसदीय विमर्श मिलकर तय करेंगे कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। गौरतलब है कि एफसीआरए के तहत पंजीकृत हज़ारों संगठन इस फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।