केरल कांग्रेस ने एफसीआरए विधेयक पर मोदी को लिखा पत्र, झूठ फैलाने का आरोप लगाया

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केरल कांग्रेस ने एफसीआरए विधेयक पर मोदी को लिखा पत्र, झूठ फैलाने का आरोप लगाया

सारांश

कांग्रेस के नेता के.सी. वेणुगोपाल ने मोदी को पत्र लिखकर एफसीआरए विधेयक पर तीखा हमला किया। उन्होंने इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ साजिश बताया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा।

Key Takeaways

  • कांग्रेस ने मोदी पर एफसीआरए विधेयक को लेकर तीखा हमला किया।
  • यह विधेयक ईसाई समुदाय और सेवा संगठनों के लिए चिंताजनक है।
  • वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा है।
  • कांग्रेस ने इस विधेयक को साजिश करार दिया है।
  • सरकार पर नियंत्रण बढ़ाने का आरोप लगाया गया है।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक कठोर पत्र लिखकर एफसीआरए संशोधन विधेयक के संबंध में केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इस विधेयक को ईसाई समुदाय और अन्य सेवा-उन्मुख संगठनों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश करार दिया है।

पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा केरल में दिए गए बयान में यूडीएफ पर एफसीआरए के विषय में झूठ फैलाने का आरोप लगाना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि पूरे समुदाय के लिए अपमानजनक भी है। उन्होंने इस प्रकार की टिप्पणी को विशेष रूप से एक पवित्र दिन पर दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से पांच प्रमुख प्रश्न पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या एफसीआरए विधेयक को सदन में पेश करने से पहले कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में कोई परामर्श किया गया था? क्या बीएसी ने इस विधेयक पर चर्चा की थी या समय निर्धारित किया था? यदि नहीं, तो ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी जिसके कारण सरकार ने सभी संसदीय परंपराओं का उल्लंघन करते हुए विधेयक को जल्दी में पेश किया?

उन्होंने यह भी पूछा कि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी द्वारा विधेयक पर उठाई गई आपत्तियों का सरकार ने जवाब क्यों नहीं दिया? वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण है और यह सेवा-भाव से काम करने वाली संस्थाओं पर लगातार मंडराती 'डेमोक्लीज की तलवार' की तरह है। एक अन्य सवाल में उन्होंने कहा कि क्या सरकार ने जानबूझकर विधेयक को उन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के समय पेश किया, जब प्रमुख विपक्षी सांसद चुनावी अभियान में व्यस्त थे? विधेयक को सत्रावसान से ठीक एक दिन पहले पेश किया गया।

वेणुगोपाल ने सबसे तीखा प्रश्न यह पूछा कि यदि विधेयक नेक इरादे से लाया गया था, तो सरकार ने उसे वापस क्यों लिया? क्या यह 'दोषी अंतरात्मा' का सबसे बड़ा प्रमाण नहीं है?

पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि इन संशोधनों के दूरगामी प्रतिकूल परिणाम ऐसे हैं कि इन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से स्पष्ट वादा करने की मांग की कि भविष्य में ऐसे विधेयक या सामाजिक-सामुदायिक संगठनों पर हमले की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

यह पत्र केरल कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पर एफसीआरए विधेयक को लेकर बढ़ते विरोध का हिस्सा है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ईसाई संस्थाओं और अन्य गैर-सरकारी संगठनों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में तुरंत स्पष्टीकरण दें और ईसाई समुदाय एवं अन्य सेवा संगठनों के मन में पैदा हुए भय और आशंका को दूर करें।

Point of View

जहाँ कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने ईसाई संस्थाओं और संगठनों पर नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास किया है। इस पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने अपनी चिंताओं को उठाया है, जो सामाजिक समरसता और धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

एफसीआरए विधेयक क्या है?
एफसीआरए विधेयक विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियम और विनियम निर्धारित करता है।
यह विधेयक किस समुदाय को प्रभावित करता है?
यह विधेयक मुख्य रूप से ईसाई समुदाय और अन्य सेवा-उन्मुख संगठनों को प्रभावित करता है।
कांग्रेस का आरोप क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस विधेयक के माध्यम से ईसाई संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाना चाहती है।
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से क्या सवाल पूछे?
उन्होंने विधेयक को पेश करने की प्रक्रिया और इसके प्रभावों पर सवाल उठाए।
सरकार ने विधेयक को क्यों वापस लिया?
वेणुगोपाल ने इसे 'दोषी अंतरात्मा' का प्रमाण बताया है, लेकिन सरकार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
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