आरबीआई के स्थिर रेपो रेट से होम लोन ब्याज दरों में मिलेगी स्थिरता: रियल एस्टेट विशेषज्ञ

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आरबीआई के स्थिर रेपो रेट से होम लोन ब्याज दरों में मिलेगी स्थिरता: रियल एस्टेट विशेषज्ञ

सारांश

आरबीआई द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले से होम लोन की ब्याज दरों में स्थिरता आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डेवलपर्स और घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी।

Key Takeaways

  • आरबीआई ने रेपो रेट को ५.२५ प्रतिशत पर बनाए रखा।
  • होम लोन की ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद।
  • डेवलपर्स और घर खरीदने वालों के लिए राहत।
  • आर्थिक स्थिरता में वृद्धि की संभावना।
  • भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि का संकेत।

नई दिल्ली, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को ५.२५ प्रतिशत पर बनाए रखने के अपने निर्णय से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद जताई है। रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बुधवार को यह जानकारी साझा की।

वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव (एफआरआईसीएस) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह डेवलपर्स और घर खरीदने वालों के लिए सकारात्मक समाचार है, क्योंकि इससे निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी।

उन्होंने कहा कि यह कदम बढ़ती लागत के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाने का समय प्रदान करेगा। हालाँकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संभवतः आखिरी बार है जब रेपो रेट स्थिर रहेगा, इसके बाद दरें बढ़ सकती हैं।

नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि आरबीआई का 'न्यूट्रल' दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा।

उन्होंने आगे कहा, "स्थिर ब्याज दरें घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनाए रखती हैं और डेवलपर्स को बेहतर रणनीति बनाने में सहायता करती हैं। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना एक सकारात्मक संकेत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई का यह कदम निकट भविष्य में मांग को बनाए रखने और बाजार में विश्वास बढ़ाने में सहायता करेगा।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सप्लाई चेन में रुकावट और बढ़ती लागत निर्माण गतिविधियों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।

कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड विमल नादर ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का प्रभाव खपत पर पड़ेगा, विशेषकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में, खासकर सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट में।

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी बातें रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती प्रदान करेंगी।

यह ध्यान देने योग्य है कि आरबीआई ने वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट ५.२५ प्रतिशत पर बनाए रखते हुए 'वेट एंड वॉच' रणनीति अपनाई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्षों का जारी रहना संभावित है।

साथ ही, केंद्रीय बैंक ने २०२६-२७ के लिए महंगाई दर ४.६ प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ ६.९ प्रतिशत रहने का अनुमान भी व्यक्त किया है।

Point of View

आने वाले समय में संभावित दर वृद्धि की आशंका भी जताई गई है। आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

आरबीआई ने रेपो रेट को क्यों स्थिर रखा?
आरबीआई ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रेपो रेट को ५.२५ प्रतिशत पर स्थिर रखा है।
इस निर्णय का रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे होम लोन की ब्याज दरों में स्थिरता आएगी, जो डेवलपर्स और घर खरीदने वालों के लिए फायदेमंद होगा।
क्या होम लोन दरें भविष्य में बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभवतः आखिरी बार है जब रेपो रेट स्थिर रहा है और दरें भविष्य में बढ़ सकती हैं।
क्या आरबीआई के इस निर्णय से मांग पर प्रभाव पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय निकट भविष्य में मांग को बनाए रखने में मदद करेगा।
आरबीआई की मौद्रिक नीति क्या है?
आरबीआई की मौद्रिक नीति का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करना है।
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