10 अगस्त 2026
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FCRA विधेयक पर विपक्ष का हमला: डिंपल यादव बोलीं — NGO और संगठनों को बनाया जा रहा निशाना

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FCRA विधेयक पर विपक्ष का हमला: डिंपल यादव बोलीं — NGO और संगठनों को बनाया जा रहा निशाना

सारांश

मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक, अयोध्या भूमि सौदे और झारखंड छात्र आंदोलन — तीन मोर्चों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सपा की डिंपल यादव ने RSS पर सीधा सवाल दागा, कांग्रेस ने सदन सहयोग से इनकार किया, और JMM ने 90 दिन में न्याय का भरोसा दिलाया।

मुख्य बातें

सपा सांसद डिंपल यादव ने 10 अगस्त को संसद में आरोप लगाया कि FCRA विधेयक के ज़रिए NGO और संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है।
यादव ने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि RSS पंजीकृत संगठन है या नहीं, और कानून सभी पर समान रूप से लागू हो।
अयोध्या में कथित तौर पर ₹2 करोड़ की ज़मीन ₹16 करोड़ और ₹5 करोड़ की ज़मीन ₹25–40 करोड़ में खरीदे जाने के आरोप; एसआईटी दो वर्षों से जाँच में।
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा — गृह मंत्री अमित शाह 20 जुलाई की घटनाओं पर सदन में जवाब दें, तभी विपक्ष सहयोग करेगा।
JMM सांसद महुआ माजी ने बताया कि झारखंड छात्रों की 98% माँगें स्वीकार हुईं; JPSC मामले में CID जाँच और 90 दिनों में फास्ट-ट्रैक निपटारे का निर्देश।

संसद के मानसून सत्र में 10 अगस्त को एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन) विधेयक पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के ज़रिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों में भय का माहौल बन सकता है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने और कानून को सभी संगठनों पर समान रूप से लागू करने की माँग की।

डिंपल यादव का RSS पर सवाल

सपा सांसद डिंपल यादव ने सदन में सीधा सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं। उनका तर्क था कि यदि कानून और नियम सभी के लिए समान हैं, तो उन्हें बिना भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए। यादव ने यह भी कहा कि एफसीआरए संशोधन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य है, अन्यथा यह चुनिंदा कार्रवाई का औज़ार बन सकता है।

अयोध्या भूमि सौदों पर गंभीर आरोप

यादव ने अयोध्या से जुड़े ज़मीन और ट्रस्ट के मामलों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एसआईटी कमेटी गठित है, लेकिन भूमि लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर ₹2 करोड़ की ज़मीन को ₹16 करोड़ में और ₹5 करोड़ की ज़मीन को ₹25 करोड़ से ₹40 करोड़ के बीच खरीदे जाने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चाँदी की वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने माँग की कि इन सभी मामलों का उचित हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए।

कांग्रेस का सदन में सहयोग से इनकार

कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की माँगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग थी, जिसके बाद अब गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटनाओं पर सदन में स्पष्टीकरण देने की माँग की जा रही है।

रेड्डी ने स्पष्ट कहा कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब नहीं देते, विपक्ष न तो सदन चलाने में सहयोग करेगा और न ही सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों में भागीदारी करेगा।

झारखंड छात्र आंदोलन पर जेएमएम का पक्ष

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद छात्रों की करीब 98 प्रतिशत माँगें स्वीकार किए जाने की घोषणा हुई थी और उस समय छात्रों ने भी इसे माना था। हालाँकि, बाद में छात्रों ने फिर विरोध मार्च निकालने का फैसला किया।

माजी ने यह भी कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय अदालत के निर्देश के बिना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने बताया कि जेपीएससी (JPSC) की पिछली परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धाँधली के मद्देनज़र मौजूदा मामले में सीआईडी जाँच कर रही है और सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ज़रिए 90 दिनों के भीतर मामला निपटाने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके, छात्रों को जाँच के बाद न्याय मिलने की गारंटी को लेकर सवाल बने हुए हैं।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक पर बहस और विपक्ष के सदन बहिष्कार के बीच संसदीय कार्यवाही का सुचारु संचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अयोध्या भूमि सौदों और झारखंड छात्र आंदोलन पर सरकार की अगली प्रतिक्रिया इस सत्र की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा यह है कि क्या संशोधन में 'समान अनुप्रयोग' की कोई स्पष्ट परिभाषा है। अयोध्या भूमि सौदों पर दो साल बाद भी एसआईटी की चुप्पी और झारखंड में '90 दिन' की गारंटी — दोनों ही जवाबदेही की उस खाई को दर्शाते हैं जिसे सत्तापक्ष भरने में अनिच्छुक दिखता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FCRA विधेयक क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को नियंत्रित करता है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन के ज़रिए सरकार चुनिंदा NGO और संगठनों को निशाना बना रही है, जबकि कानून सभी पर समान रूप से लागू नहीं हो रहा।
डिंपल यादव ने RSS को लेकर क्या सवाल उठाया?
सपा सांसद डिंपल यादव ने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं। उनका तर्क था कि यदि FCRA के नियम सभी के लिए समान हैं, तो RSS पर भी वही नियम लागू होने चाहिए।
अयोध्या भूमि सौदों में क्या आरोप हैं?
यादव के अनुसार, कथित तौर पर ₹2 करोड़ की ज़मीन ₹16 करोड़ में और ₹5 करोड़ की ज़मीन ₹25 से ₹40 करोड़ के बीच खरीदे जाने के आरोप हैं। इसके अलावा दान राशि में अनियमितता और सोने-चाँदी की वस्तुओं के गायब होने के भी आरोप हैं; एसआईटी दो वर्षों से जाँच कर रही है।
विपक्ष ने सदन में सहयोग से क्यों इनकार किया?
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह 20 जुलाई की घटनाओं पर सदन में स्पष्टीकरण नहीं देते, विपक्ष न तो सदन चलाने में सहयोग करेगा और न ही सरकारी विधेयकों में भागीदारी करेगा।
झारखंड छात्र आंदोलन का मामला क्या है और सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। JMM सांसद महुआ माजी के अनुसार, सरकार ने छात्रों की 98% माँगें मानी हैं, CID जाँच जारी है और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ज़रिए 90 दिनों में मामला निपटाने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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