FCRA विधेयक पर विपक्ष का हमला: डिंपल यादव बोलीं — NGO और संगठनों को बनाया जा रहा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र में 10 अगस्त को एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन) विधेयक पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के ज़रिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों में भय का माहौल बन सकता है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने और कानून को सभी संगठनों पर समान रूप से लागू करने की माँग की।
डिंपल यादव का RSS पर सवाल
सपा सांसद डिंपल यादव ने सदन में सीधा सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं। उनका तर्क था कि यदि कानून और नियम सभी के लिए समान हैं, तो उन्हें बिना भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए। यादव ने यह भी कहा कि एफसीआरए संशोधन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य है, अन्यथा यह चुनिंदा कार्रवाई का औज़ार बन सकता है।
अयोध्या भूमि सौदों पर गंभीर आरोप
यादव ने अयोध्या से जुड़े ज़मीन और ट्रस्ट के मामलों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एसआईटी कमेटी गठित है, लेकिन भूमि लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर ₹2 करोड़ की ज़मीन को ₹16 करोड़ में और ₹5 करोड़ की ज़मीन को ₹25 करोड़ से ₹40 करोड़ के बीच खरीदे जाने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चाँदी की वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने माँग की कि इन सभी मामलों का उचित हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस का सदन में सहयोग से इनकार
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की माँगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग थी, जिसके बाद अब गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटनाओं पर सदन में स्पष्टीकरण देने की माँग की जा रही है।
रेड्डी ने स्पष्ट कहा कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब नहीं देते, विपक्ष न तो सदन चलाने में सहयोग करेगा और न ही सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों में भागीदारी करेगा।
झारखंड छात्र आंदोलन पर जेएमएम का पक्ष
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद छात्रों की करीब 98 प्रतिशत माँगें स्वीकार किए जाने की घोषणा हुई थी और उस समय छात्रों ने भी इसे माना था। हालाँकि, बाद में छात्रों ने फिर विरोध मार्च निकालने का फैसला किया।
माजी ने यह भी कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय अदालत के निर्देश के बिना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने बताया कि जेपीएससी (JPSC) की पिछली परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धाँधली के मद्देनज़र मौजूदा मामले में सीआईडी जाँच कर रही है और सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ज़रिए 90 दिनों के भीतर मामला निपटाने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके, छात्रों को जाँच के बाद न्याय मिलने की गारंटी को लेकर सवाल बने हुए हैं।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक पर बहस और विपक्ष के सदन बहिष्कार के बीच संसदीय कार्यवाही का सुचारु संचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अयोध्या भूमि सौदों और झारखंड छात्र आंदोलन पर सरकार की अगली प्रतिक्रिया इस सत्र की दिशा तय करेगी।