12 अगस्त 2026
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एफसीआरए संशोधन बिल: विपक्ष ने 'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' पोस्टर से घेरी सरकार, खड़गे ने JPC जाँच की माँग का किया समर्थन

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एफसीआरए संशोधन बिल: विपक्ष ने 'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' पोस्टर से घेरी सरकार, खड़गे ने JPC जाँच की माँग का किया समर्थन

सारांश

एफसीआरए संशोधन बिल मानसून सत्र के आखिरी दिनों में विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बन गया। 'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' के पोस्टर, JPC माँग, छात्र आंदोलन में कथित बल प्रयोग और गृह मंत्री के अनुपस्थित बयान — इन चार मोर्चों पर विपक्ष ने सरकार को एक साथ घेरा।

मुख्य बातें

12 अगस्त को मानसून सत्र में विपक्षी सांसदों ने एफसीआरए संशोधन बिल के विरोध में 'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' पोस्टर थामकर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजने की माँग का समर्थन किया।
सपा सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बिल का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को दबाना है; बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद और TMC सांसद कीर्ति आजाद ने छात्र प्रदर्शन में कथित लाठीचार्ज, गोलीबारी पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब माँगा।
RJD सांसद संजय यादव ने गृह मंत्री के बयान में देरी को 'मौत के बाद इलाज' की संज्ञा दी।
मानसून सत्र का अंतिम दिन 13 अगस्त निर्धारित है; सरकार का जवाब अब तक नहीं आया।

संसद के मानसून सत्र में बुधवार, 12 अगस्त को एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) संशोधन बिल विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव की नई वजह बन गया। नई दिल्ली में संसद परिसर के भीतर विपक्षी सांसदों ने 'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' लिखे पोस्टर थामकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की माँग का खुलकर समर्थन किया।

अखिलेश यादव ने उठाए बुनियादी सवाल

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अखिलेश यादव ने एफसीआरए संशोधन बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह यह बिल क्यों लाना चाहती है। उनका आरोप था कि इसका असली उद्देश्य अल्पसंख्यकों को दबाना और व्यवस्था का दुरुपयोग करना है। यादव ने कहा कि देश में लोकतंत्र को मज़बूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की ज़रूरत है।

अखिलेश यादव ने बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार हवाई अड्डे बना रही है जिनमें बारिश में पानी भर जाता है और एक्सप्रेसवे पर गड्ढे हो रहे हैं। उन्होंने हवाई जहाज उड़ाने वालों और राज्य चलाने वालों के बीच समानता का व्यंग्यात्मक उल्लेख किया।

खड़गे का JPC माँग को समर्थन

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जब पत्रकारों ने एफसीआरए बिल को JPC में भेजे जाने पर उनका मत पूछा, तो उन्होंने इस माँग का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष अपनी रणनीति के तहत आगे भी अपने मुद्दे उठाता रहेगा।

अवधेश प्रसाद ने छात्र आंदोलन और तिरंगे का उठाया मुद्दा

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने एफसीआरए बिल के साथ-साथ छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज, आँसू गैस और गोलीबारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से माँग की कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बताएँ कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश किसने दिए। विपक्ष की दूसरी प्रमुख माँग अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जाँच से जुड़ी रही।

अवधेश प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की गरिमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा कोई बाज़ार से खरीदा झंडा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन और असंख्य शहीदों के बलिदान से मिला प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोग भी अपने कार्यक्रमों में तिरंगा फहराएँगे।

टीएमसी और आरजेडी ने भी साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान गोलियाँ और पैलेट गन चलाई गईं, आँसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज हुआ। उन्होंने सरकार से पूछा कि छात्रों से किए गए वादों में से कितने पूरे किए गए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मानसून सत्र 20 जुलाई से चल रहा है और 13 अगस्त को इसका अंतिम दिन है, फिर भी सरकार ने गृह मंत्री का बयान अब तक नहीं दिलाया।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद संजय यादव ने गृह मंत्री के बयान में देरी की तुलना उस इलाज से की जो किसी की मौत के बाद उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सत्र समाप्त होने के आखिरी मौके पर बयान दिलाने की पेशकश अब पर्याप्त नहीं रह गई है।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र का अंतिम दिन 13 अगस्त को निर्धारित है। एफसीआरए संशोधन बिल पर JPC जाँच की माँग, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और छात्र आंदोलन में कथित बल प्रयोग — ये तीनों मुद्दे सत्र के आखिरी दिन भी गूँजने की संभावना है। विपक्ष के सामूहिक दबाव के बाद सरकार का रुख क्या होगा, यह देखना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

छात्र आंदोलन में कथित बल प्रयोग और गृह मंत्री की अनुपस्थिति जैसे असंबद्ध मुद्दों को एक साझा मंच पर लाने का राजनीतिक औज़ार है। यह रणनीति बताती है कि विपक्ष के पास अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग लड़ाई लड़ने की बजाय उन्हें एकजुट कर सत्ता पक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाने की कोशिश है। हालाँकि, JPC माँग की व्यावहारिकता संदिग्ध है — सत्र का अंतिम दिन सामने है और सरकार ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया। मुख्यधारा की कवरेज 'हंगामे' पर केंद्रित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि एफसीआरए संशोधन के वास्तविक प्रावधान किन संगठनों को और किस आधार पर प्रभावित करेंगे — यह बहस सदन के बाहर अभी तक नहीं पहुँची।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआरए संशोधन बिल क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) संशोधन बिल विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठनों के नियमन से जुड़ा विधेयक है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों और नागरिक समाज संगठनों को दबाना है; वे इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजकर व्यापक समीक्षा की माँग कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एफसीआरए बिल पर क्या कहा?
खड़गे ने एफसीआरए संशोधन बिल को JPC में भेजे जाने की माँग का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी रणनीति के तहत आगे भी अपने मुद्दे उठाता रहेगा।
'राम मंदिर चढ़ावा किसने लूटा' पोस्टर का संसद प्रदर्शन से क्या संबंध है?
विपक्षी सांसदों ने एफसीआरए बिल के विरोध प्रदर्शन के दौरान यह पोस्टर थामा, जो अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले की जाँच की उनकी अलग माँग को उजागर करता है। यह दोनों मुद्दों को एक साथ उठाने की विपक्ष की रणनीति का हिस्सा रहा।
छात्र आंदोलन और गृह मंत्री के बयान की माँग क्यों उठाई जा रही है?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद और TMC सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर लाठीचार्ज, आँसू गैस और गोलीबारी हुई। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बताएँ कि इन कार्रवाइयों के आदेश किसने दिए।
मानसून सत्र कब तक चलेगा और क्या इन माँगों पर सरकार का जवाब आएगा?
मानसून सत्र का अंतिम दिन 13 अगस्त निर्धारित है। RJD सांसद संजय यादव के अनुसार, सत्र की समाप्ति से ऐन पहले बयान दिलाने की पेशकश अब पर्याप्त नहीं है। सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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