29 जुलाई 2026
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एफसीआरए बिल 2026 पर एनपीपी का पलटवार: 'केंद्र से बातचीत हो चुकी है, चुप्पी के आरोप निराधार'

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एफसीआरए बिल 2026 पर एनपीपी का पलटवार: 'केंद्र से बातचीत हो चुकी है, चुप्पी के आरोप निराधार'

सारांश

मेघालय की सत्तारूढ़ एनपीपी ने एफसीआरए बिल पर चुप्पी के आरोपों को निराधार बताया। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पहले ही गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से बहु-धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिल चुके हैं। धारा 16ए(5) पर पूर्वोत्तर के सेवा संस्थानों को लेकर गंभीर चिंताएं उठाई गई हैं।

मुख्य बातें

एनपीपी ने 29 जुलाई 2026 को एफसीआरए बिल पर चुप्पी के आरोपों को 'राजनीतिक मकसद से प्रेरित' बताकर खारिज किया।
मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने बहु-धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और धारा 16ए(5) पर चिंताएं उठाईं।
प्रतिनिधिमंडल में प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया , नॉर्थ ईस्ट इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल , कैथोलिक आर्कडायोसिस ऑफ शिलांग और गारो बैपटिस्ट कन्वेंशन के प्रतिनिधि शामिल थे।
अप्रैल 2026 में संगमा और उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से भी मुलाकात की थी।
अमित शाह ने कथित तौर पर आश्वासन दिया कि संशोधनों पर निर्णय से पहले व्यापक परामर्श किया जाएगा।

मेघालय की सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने 29 जुलाई 2026 को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि पार्टी प्रस्तावित 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' (एफसीआरए) पर चुप्पी साधे बैठी है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसने कई उच्च-स्तरीय बैठकों के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने मेघालय की चिंताएं पहले ही दर्ज करा दी हैं। एनपीपी ने इन रिपोर्टों को 'गुमराह करने वाला और राजनीतिक मकसद से प्रेरित' करार दिया।

मुख्यमंत्री संगमा का दिल्ली दौरा और अमित शाह से मुलाकात

एनपीपी के आधिकारिक बयान के अनुसार, मेघालय के मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉनराड के. संगमा ने इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों से बने एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों पर राज्य की आपत्तियां सीधे उनके सामने रखीं।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया, नॉर्थ ईस्ट इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल, कैथोलिक आर्कडायोसिस ऑफ शिलांग और गारो बैपटिस्ट कन्वेंशन के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे — जो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने बहु-धार्मिक संस्थाओं की चिंताओं को एकजुट होकर उठाया।

धारा 16ए(5) पर चिंता: पूर्वोत्तर के सेवा संस्थान निशाने पर

बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित कानून की धारा 16ए(5) और अन्य प्रावधानों पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रतिनिधियों ने आगाह किया कि यदि ये संशोधन यथावत पारित हुए तो पूरे पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

एनपीपी के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित संशोधनों पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा।

अप्रैल में रिजिजू से भी हुई थी बैठक

पार्टी ने अप्रैल 2026 में हुई एक अलग बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की थी।

उस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में चैरिटेबल संगठनों की अहम भूमिका रेखांकित की तथा प्रस्तावित संशोधनों से कामकाज और संपत्ति से जुड़ी संभावित कानूनी जटिलताओं के विरुद्ध सुरक्षा उपायों की माँग की।

विपक्ष पर पलटवार

एनपीपी ने अपने राजनीतिक विरोधियों के आरोपों को 'खोखली बयानबाजी' बताते हुए कहा कि पार्टी केंद्र सरकार के साथ रचनात्मक संवाद में विश्वास रखती है। पार्टी ने विपक्ष पर बिना पुष्टि की जानकारी फैलाकर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।

यह ऐसे समय में आया है जब एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर के कई राज्यों में चर्च और अल्पसंख्यक संस्थाओं में व्यापक बेचैनी है। गौरतलब है कि मेघालय में ईसाई समुदाय बहुसंख्यक है और विदेशी अनुदान पर निर्भर सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं की संख्या यहाँ काफी अधिक है।

आगे की राह

एनपीपी ने स्पष्ट किया कि वह नागरिकों और सामाजिक संस्थानों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र के समक्ष अपनी आवाज़ उठाती रहेगी। विधेयक पर संसद में अंतिम निर्णय से पहले परामर्श प्रक्रिया के पूरा होने की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बैठकों के बाद ठोस परिणाम क्या निकला। 'व्यापक परामर्श' का आश्वासन और अंतिम विधेयक के बीच की दूरी अक्सर बड़ी होती है — पूर्वोत्तर के संस्थानों ने यह पहले भी देखा है। मेघालय जैसे राज्य में जहाँ विदेशी अनुदान पर निर्भर चर्च-संचालित स्कूल और अस्पताल सामाजिक ढाँचे की रीढ़ हैं, धारा 16ए(5) का अस्पष्ट क्रियान्वयन वास्तविक क्षति पहुँचा सकता है। विपक्ष की आलोचना भले ही राजनीति से प्रेरित हो, परंतु जवाबदेही की माँग उचित है — और वह तब पूरी होगी जब संसद में विधेयक के अंतिम मसौदे में इन चिंताओं की झलक दिखे।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीआरए अमेंडमेंट बिल 2026 क्या है और मेघालय को इससे क्या आपत्ति है?
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 विदेशी अनुदान के नियमन से जुड़ा प्रस्तावित कानून है। मेघालय को विशेष रूप से धारा 16ए(5) से आपत्ति है, क्योंकि इससे राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण में कार्यरत धार्मिक व चैरिटेबल संस्थानों के संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
एनपीपी ने केंद्र सरकार के सामने यह मुद्दा कैसे उठाया?
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से बहु-धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। इसके अलावा अप्रैल 2026 में उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग के साथ संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से भी बैठक हुई थी।
क्या केंद्र सरकार ने एफसीआरए पर मेघालय की चिंताओं पर कोई आश्वासन दिया है?
एनपीपी के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित संशोधनों पर कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा। हालाँकि इस आश्वासन की आधिकारिक पुष्टि केंद्र सरकार की ओर से नहीं हुई है।
एफसीआरए बिल से पूर्वोत्तर के कौन-से संस्थान प्रभावित हो सकते हैं?
प्रस्तावित संशोधनों से पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत चर्च और अन्य धार्मिक संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो विदेशी अनुदान पर निर्भर हैं। मेघालय में ऐसी संस्थाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक है।
एनपीपी पर विपक्ष के क्या आरोप हैं?
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि एनपीपी एफसीआरए बिल के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ बोलने से बच रही है। एनपीपी ने इन आरोपों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
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