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अमित शाह संसद में दें जवाब — नीट से FCRA तक: कांग्रेस की 18 दिन पुरानी माँग फिर गूँजी

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अमित शाह संसद में दें जवाब — नीट से FCRA तक: कांग्रेस की 18 दिन पुरानी माँग फिर गूँजी

सारांश

18 दिनों की माँग, एक ही सवाल — गृह मंत्री अमित शाह सदन में क्यों नहीं आए? नीट, FCRA, चुनावी फंडिंग और छात्रों पर बल-प्रयोग — कांग्रेस ने मानसून सत्र के अंतिम दिन से पहले एक साथ कई मोर्चे खोले।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 12 अगस्त को दोहराया कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर नीट, FCRA, चुनावी फंडिंग और छात्रों पर लाठीचार्ज पर बयान देना चाहिए।
विपक्ष के अनुसार यह माँग पिछले 18-19 दिनों से उठाई जा रही है, लेकिन गृह मंत्री न लोकसभा में दिखे, न राज्यसभा में।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने FCRA विधेयक को JPC में भेजने का विरोध किया और इसे वापस लेने की माँग की।
हिबी ईडन ने FCRA विधेयक को अल्पसंख्यक-विरोधी बताया, आदिवासी व नक्सल क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ पर असर की चेतावनी दी।
सत्र का अंतिम दिन गुरुवार, 13 अगस्त को है; विपक्ष ने संकेत दिया कि चर्चा केवल नीट तक सीमित नहीं रहेगी।

मानसून सत्र के दौरान बुधवार, 12 अगस्त को संसद परिसर में कांग्रेस और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जब विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माँग की कि वे सदन में उपस्थित होकर नीट परीक्षा विवाद, छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल, चुनावी फंडिंग में कथित अनियमितताओं और एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सीधे जवाब दें। कांग्रेस के अनुसार, यह माँग पिछले 18-19 दिनों से लगातार उठाई जा रही है, लेकिन गृह मंत्री न लोकसभा में दिखे, न राज्यसभा में।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री सदन में आए तो, लेकिन सदस्यों से सीधी बात नहीं की। उन्होंने एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजे जाने का भी विरोध किया और स्पष्ट कहा कि विपक्ष का रुख है — यह बिल वापस लिया जाए।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि जंतर-मंतर और विभिन्न विरोध-प्रदर्शनों में सभी पक्षों ने अपनी बात रखी, लेकिन गृह मंत्री अभी भी सदन में बयान देने से बचते आ रहे हैं। उनका सवाल था कि पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल के निर्देश किसने दिए — यह जवाब केवल गृह मंत्री ही दे सकते हैं।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने याद दिलाया कि संबंधित मसले पर पहले ही दो दिन की चर्चा हो चुकी थी और उस दौरान गृह मंत्री अनुपस्थित थे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यसभा के नियम 267 के तहत दान और चढ़ावे की चोरी के संबंध में उनका नोटिस आज भी लंबित है।

विभिन्न सांसदों की माँगें

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि चर्चा केवल नीट तक सीमित नहीं रहेगी — चुनावी फंडिंग में कथित गड़बड़ी, छात्रों के खिलाफ हिंसा और अन्य मुद्दों पर भी सदन में बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर चोरी के आरोपों का भी जवाब देना चाहिए।

पंजाब से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने नई दिल्ली में संसद के पास छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उनके शब्दों में, 'हम अपने भविष्य के खिलाफ बल का इस्तेमाल कर रहे हैं।' कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने भी यही माँग दोहराई कि पैलेट गन, आंसू गैस और लाठियों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया, इसका जवाब मिलना चाहिए।

एफसीआरए विधेयक पर विवाद

केरल से कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को अल्पसंख्यक-विरोधी करार दिया। उनका कहना था कि आदिवासी और नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ देने वाले अल्पसंख्यक एनजीओ को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी सहायता से चलने वाले ऐसे संगठन सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गौरतलब है कि सरकार ने इस विधेयक को JPC को भेज दिया है, जिसे विपक्ष पर्याप्त नहीं मानता।

सरकार की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष विपक्ष की माँगों पर ध्यान देने के बजाय जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि देश समझ चुका है कि सरकार विपक्ष के सवालों का सामना करने की स्थिति में नहीं है। उनके अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पहली चिट्ठी का जवाब गृह मंत्री को देना चाहिए था, लेकिन सत्र के अंतिम दिन की पूर्व संध्या पर आई चिट्ठी 'कमजोर नैरेटिव के डैमेज कंट्रोल की नाकाम कोशिश' है।

क्या होगा आगे

सत्र का अंतिम दिन गुरुवार, 13 अगस्त को है। केरल से कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने चेतावनी दी कि यदि गृह मंत्री अंत तक सदन में बयान नहीं देते, तो यह संसदीय लोकतंत्र की गंभीर अनदेखी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष एकजुट होकर कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है और मानसून सत्र पहले ही व्यापक व्यवधान का शिकार रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

FCRA, चुनावी फंडिंग और छात्रों पर बल-प्रयोग को एक ही फ्रेम में रखकर सरकार पर 'जवाब से बचने' का आरोप लगाया है, जो चुनावी दृष्टि से प्रभावशाली रणनीति है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्र के अंतिम दिन तक इंतजार करने से विपक्ष की तात्कालिकता पर भी सवाल उठता है — यदि माँग वाकई 18 दिन पुरानी थी, तो कार्यवाही बाधित करने के बजाय नियम 267 और अन्य संसदीय साधनों का उपयोग पहले क्यों नहीं हुआ? FCRA पर अल्पसंख्यक-विरोधी तर्क राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, लेकिन इसकी वैधानिक परीक्षा JPC में ही होगी — जिसे विपक्ष ने अस्वीकार कर दिया है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह से किन मुद्दों पर जवाब माँग रही है?
कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में नीट परीक्षा विवाद, छात्रों पर पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल, चुनावी फंडिंग में कथित अनियमितताओं और FCRA संशोधन विधेयक पर बयान दें। यह माँग मानसून सत्र के पहले दिन से यानी करीब 18-19 दिनों से उठाई जा रही है।
FCRA संशोधन विधेयक पर विपक्ष की आपत्ति क्या है?
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, का कहना है कि FCRA विधेयक को JPC में भेजना पर्याप्त नहीं है और इसे पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए। केरल के सांसद हिबी ईडन ने इसे अल्पसंख्यक-विरोधी बताते हुए कहा कि यह आदिवासी व नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ को नुकसान पहुँचाएगा।
मानसून सत्र में छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है?
नई दिल्ली में संसद के पास छात्रों पर पैलेट गन, आंसू गैस और लाठियों के इस्तेमाल की घटना को लेकर विपक्ष जानना चाहता है कि यह आदेश किसने दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और प्रणीति शिंदे सहित कई सांसदों ने कहा कि इसका जवाब केवल गृह मंत्री ही दे सकते हैं।
मानसून सत्र का अंतिम दिन कब है और क्या गृह मंत्री बयान देंगे?
मानसून सत्र का अंतिम दिन गुरुवार, 13 अगस्त को है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि गृह मंत्री अंत तक सदन में बयान नहीं देते, तो इसे संसदीय जवाबदेही की अनदेखी माना जाएगा। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राहुल गांधी की चिट्ठी और गृह मंत्री के बयान का क्या संबंध है?
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले गृह मंत्री को चिट्ठी लिखी थी, जिसका जवाब नहीं दिया गया। सत्र के अंतिम दिन से पहले आई चिट्ठी को उन्होंने 'कमजोर नैरेटिव के डैमेज कंट्रोल की नाकाम कोशिश' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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