नागालैंड विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर सुरक्षा उपायों की माँग, CM रियो ने अमित शाह को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
नागालैंड विधानसभा ने 2 सितंबर 2026 को प्रस्तावित 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA Amendment Bill 2026) पर गहन जाँच-पड़ताल और व्यापक बहुपक्षीय बातचीत की माँग की। विधायकों ने चेतावनी दी कि यदि कड़े नियम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किए गए, तो नागालैंड में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय राहत कार्यों में संलग्न चर्च, चैरिटेबल संस्थाओं और सिविल सोसाइटी संगठनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
यह मुद्दा विधानसभा में नियम 50 के तहत तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामले के रूप में उठाया गया। सलाहकार अचंबेमो किकोन ने इस विषय पर नोटिस दिया, जबकि सलाहकार टेमजेनमेनबा और विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने इसका समर्थन किया।
किकोन ने सदन को बताया कि प्रस्तावित संशोधनों ने नागालैंड के ईसाई संगठनों में व्यापक चिंता उत्पन्न कर दी है। उनकी मुख्य आपत्तियाँ FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण (रिन्यूअल) और पंजीकरण रद्द होने, सरेंडर करने या समाप्त होने की स्थिति में संपत्ति की अभिरक्षा, प्रबंधन और निपटान से जुड़े प्रावधानों को लेकर हैं।
कोहिमा डायोसिस, नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) और अन्य ईसाई संगठनों का हवाला देते हुए किकोन ने कहा कि कई संस्थाओं को पहले ही FCRA पंजीकरण नवीनीकरण में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
संवैधानिक संदर्भ और अनुच्छेद 371(A)
किकोन ने सरकार से अपील की कि प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा अनुच्छेद 371(A) के तहत नागालैंड की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखकर की जाए। उन्होंने राज्य सरकारों, चर्चों, धार्मिक संगठनों, सिविल सोसाइटी समूहों और विकास एजेंसियों के साथ व्यापक परामर्श की माँग भी रखी।
यह ऐसे समय में आया है जब नागालैंड में दशकों से चर्च-आधारित संस्थाएँ विदेशी और स्थानीय अनुदान के सहयोग से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित करती रही हैं — विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, जहाँ सरकारी बुनियादी ढाँचा सीमित है।
विधायकों की प्रमुख माँगें
सलाहकार टेमजेनमेनबा ने पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी अनुदान के नियमन की आवश्यकता को स्वीकार किया, लेकिन ऐसे उपायों के प्रति आगाह किया जो वैध सेवा-प्रदाता संस्थाओं के कामकाज में अनजाने में बाधा डाल सकते हैं। उन्होंने प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों की माँग की — जिसमें पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर, लिखित कारण, अनुपालन के लिए उचित समय और प्रभावी अपील तंत्र शामिल हों।
विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने कहा कि मौजूदा FCRA ढाँचे में पहले से ही कठोर अनुपालन शर्तें हैं — जैसे विशेष बैंक खाते, वित्तीय रिपोर्टिंग और प्रशासनिक व्यय पर सीमाएँ। उन्होंने केंद्र से माँग की कि नई व्यवस्था FCRA पंजीकरण नवीनीकरण को सरल, किफायती और पारदर्शी बनाए।
सलाहकार कुदेचो खामो ने चेतावनी दी कि छोटे चर्च और जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठनों पर प्रशासनिक क्षमता की कमी के कारण अनुपालन का बोझ असमान रूप से पड़ेगा। विधायक पी. लोंगोन ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित न रखते हुए इसे संपूर्ण नागालैंड से जुड़ा मामला बताया और FCRA पंजीकरण रद्द होने के मामलों पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की।
सरकार की प्रतिक्रिया
बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही NBCC, कोहिमा बिशप डायोसिस और नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधियों से बातचीत कर चुकी है।
रियो ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नागालैंड के ईसाई समुदाय की चिंताओं से अवगत कराया और राज्य की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकासात्मक परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेशी अनुदान में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है, किंतु शिक्षा, स्वास्थ्य, दान और मानवीय कार्यों में लगी वैध संस्थाओं पर व्यापक या सामान्यीकृत नियमों का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार संबंधित पक्षों और केंद्र के साथ संवाद जारी रखेगी।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति अब FCRA संशोधन विधेयक, 2026 की विस्तृत समीक्षा करेगी, जिसमें नागालैंड सहित अन्य राज्यों की आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। नागालैंड विधानसभा की माँग है कि समिति तक राज्य की चिंताएँ औपचारिक रूप से पहुँचाई जाएँ। यह विधेयक उत्तर-पूर्व भारत के उन राज्यों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है जहाँ विदेशी अनुदान-पोषित संस्थाएँ सरकारी सेवाओं की पूरक भूमिका निभाती हैं।