जुबीन गर्ग मौत केस: यॉट पर मौजूद गवाह परीक्षित शर्मा ने गुवाहाटी फास्ट-ट्रैक कोर्ट में दर्ज कराया बयान
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी की स्पेशल फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट में 2 सितंबर 2026 को जुबीन गर्ग मौत मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण गवाह पेश हुआ। सिंगापुर स्थित असम एसोसिएशन के सदस्य परीक्षित शर्मा ने कोर्ट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया — वह उस यॉट पर मौजूद थे जहाँ सितंबर 2025 में प्रख्यात असमिया गायक और संगीतकार जुबीन गर्ग की मौत हुई थी। उनकी प्रत्यक्षदर्शी गवाही को मामले की सुनवाई में निर्णायक मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, परीक्षित शर्मा असम एसोसिएशन के पहले ऐसे सदस्य हैं जो 19 सितंबर 2025 की उस रात यॉट पर उपस्थित थे। 52 वर्षीय जुबीन गर्ग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे संस्करण में भाग लेने सिंगापुर गए थे। इसी दौरान वह लाजरस आइलैंड के निकट एक यॉट पर सवार हुए और समुद्र में तैरने उतरे, जिसके बाद उनकी डूबने से मौत हो गई।
गौरतलब है कि गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 8 जून 2026 से शुरू हुई थी। 14 अगस्त 2026 तक अभियोजन पक्ष कुल 394 सूचीबद्ध गवाहों में से 94 के बयान दर्ज कर चुका था। परीक्षित शर्मा की गवाही उन सिंगापुर-आधारित गवाहों की श्रृंखला का हिस्सा है जिनकी उपस्थिति मामले के लिए अहम मानी जा रही है।
जाँच और चार्जशीट
जुबीन गर्ग की मौत की खबर सामने आने के बाद असम में व्यापक प्रदर्शन हुए और पुलिस में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मामले की विस्तृत जाँच की। राज्य में दर्ज 60 से अधिक एफआईआर को एकीकृत कर सीआईडी को सौंपा गया।
जाँच के बाद दिसंबर 2025 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड के साथी शेखर ज्योति गोस्वामी और गायिका अमृतप्रभा महंत पर हत्या के आरोप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त जुबीन के कजिन संदीपन गर्ग और उनके निजी सुरक्षाकर्मी नंदेश्वर बोरा तथा प्रबीन बैश्य को भी आरोपी बनाया गया है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और इन पर अंतिम निर्णय आना शेष है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया
मामले की सुनवाई में तेज़ी लाने के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मार्च 2026 में एक अलग फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट का गठन किया। इस कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई की जा रही है। मई 2026 में सातों आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए गए, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय भी असम सरकार को मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी करने का निर्देश दे चुका है।
सिंगापुर की जाँच और भारतीय मुकदमे का दायरा
उल्लेखनीय है कि सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट ने मार्च 2026 में जुबीन गर्ग की मौत को डूबने से हुई मौत घोषित किया था। सिंगापुर की जाँच में किसी साजिश या बाहरी कारण के साक्ष्य नहीं मिले और 'फाउल प्ले' की संभावना को खारिज कर दिया गया। हालाँकि भारत में चल रही सुनवाई का दायरा उन परिस्थितियों और आरोपों से जुड़ा है जो जुबीन की मौत के संपूर्ण प्रकरण को लेकर सामने आए हैं।
आगे क्या होगा
परीक्षित शर्मा की गवाही के बाद सिंगापुर से जुड़े अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई जारी है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनज़र मामले को शीघ्र निष्कर्ष पर पहुँचाने का दबाव बना हुआ है। अभियोजन पक्ष के शेष 300 से अधिक गवाहों की गवाही की प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में जारी रहेगी।