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जुबीन गर्ग मौत मामला: आरोपी शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत पर फैसला 28 मई तक सुरक्षित

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जुबीन गर्ग मौत मामला: आरोपी शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत पर फैसला 28 मई तक सुरक्षित

सारांश

गुवाहाटी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जुबीन गर्ग के बैंडमेट शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत याचिका पर फैसला 28 मई तक सुरक्षित रखा। सिंगापुर में हुई मौत, असम सीआईडी की एसआईटी जांच, सात आरोपी और दो देशों की अलग-अलग जांच रिपोर्ट — यह मामला अभी भी सुलझने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य बातें

गुवाहाटी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 18 मई 2026 को आरोपी शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
अगली सुनवाई और जमानत आदेश 28 मई 2026 को सुनाया जाएगा।
गोस्वामी जुबीन गर्ग के बैंड के सदस्य थे और कई महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं।
असम सीआईडी की एसआईटी ने दिसंबर में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात आरोपी हैं और चार पर हत्या का आरोप है।
सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट में साजिश के सबूत नहीं, लेकिन असम की जांच स्वतंत्र रूप से जारी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा में इसे हत्या का मामला करार दिया था।

गुवाहाटी की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 18 मई 2026 को असमिया गायक जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में आरोपी शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर आदेश 28 मई को सुनाया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

शेखरज्योति गोस्वामी जुबीन गर्ग के बैंड के सदस्य थे और लंबे समय तक उनके साथ काम कर चुके हैं। वह पिछले कई महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं। 18 मई की सुनवाई में उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया।

गोस्वामी के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल काफी लंबे समय से जेल में हैं और इस आधार पर जमानत दी जानी चाहिए। इसके विपरीत, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह हाई-प्रोफाइल मामला है और जांच अभी भी जारी है, इसलिए आरोपी को इस चरण में जमानत देना उचित नहीं होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा प्रकरण 19 सितंबर को सिंगापुर के लाजरस आइलैंड के पास हुई जुबीन गर्ग की मौत से जुड़ा है। तैराकी के दौरान उनकी मृत्यु उस समय हुई जब वे अगले दिन एनईआईएफ बैनर तले एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले थे।

घटना के बाद असम पुलिस की सीआईडी ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया। गहन जांच के बाद दिसंबर में अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें से चार आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा में इस मामले पर बयान देते हुए इसे सीधा हत्या का मामला करार दिया था। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह प्रकरण और अधिक सुर्खियों में आ गया।

गौरतलब है कि सिंगापुर पुलिस ने भी इस मामले की स्वतंत्र जांच की थी। उनकी जांच रिपोर्ट के अनुसार जुबीन गर्ग की मौत में किसी साजिश के सबूत नहीं मिले। हालांकि, असम की जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि विदेशी जांच रिपोर्ट का राज्य में चल रही न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 28 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब फास्ट ट्रैक कोर्ट शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुनाएगी। यह फैसला मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असम की एसआईटी ने सात लोगों पर चार्जशीट दाखिल की। मुख्यमंत्री का विधानसभा में सीधा बयान न्यायिक स्वतंत्रता के लिहाज से असहज करने वाला सवाल खड़ा करता है — क्या कार्यपालिका का ऐसा सार्वजनिक रुख अदालत की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है? जमानत का फैसला न केवल गोस्वामी के भविष्य, बल्कि इस बात की भी परीक्षा होगी कि फास्ट ट्रैक कोर्ट राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र रहकर निर्णय लेती है या नहीं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुबीन गर्ग की मौत कैसे हुई थी?
जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर को सिंगापुर के लाजरस आइलैंड के पास तैराकी के दौरान हुई थी। वे अगले दिन एनईआईएफ बैनर तले एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले थे।
शेखरज्योति गोस्वामी कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
शेखरज्योति गोस्वामी जुबीन गर्ग के बैंड के सदस्य थे। असम सीआईडी की एसआईटी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उन्हें उन सात आरोपियों में शामिल किया गया है जिन पर जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में आरोप हैं।
28 मई को अदालत क्या फैसला सुनाएगी?
गुवाहाटी की फास्ट ट्रैक कोर्ट 28 मई को शेखरज्योति गोस्वामी की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुनाएगी। अदालत ने 18 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
सिंगापुर पुलिस और असम पुलिस की जांच में क्या फर्क है?
सिंगापुर पुलिस की जांच रिपोर्ट में जुबीन गर्ग की मौत में किसी साजिश के सबूत नहीं पाए गए। इसके विपरीत, असम सीआईडी की एसआईटी ने सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें से चार पर हत्या का आरोप है। असम की जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि विदेशी रिपोर्ट से राज्य की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले पर क्या कहा था?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा में दिए अपने बयान में जुबीन गर्ग की मौत को सीधा हत्या का मामला बताया था। उनके इस बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में और अधिक आ गया।
राष्ट्र प्रेस
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