2 सितंबर 2026
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नागालैंड विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर सुरक्षा उपायों की मांग, चर्च और सिविल सोसाइटी की चिंताएँ उठीं

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नागालैंड विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर सुरक्षा उपायों की मांग, चर्च और सिविल सोसाइटी की चिंताएँ उठीं

सारांश

नागालैंड विधानसभा में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर तीखी बहस हुई — चर्च, NBCC और सिविल सोसाइटी की चिंताओं के बीच CM रियो ने बताया कि केंद्र ने विधेयक को 31 सदस्यीय JPC के पास भेज दिया है। अनुच्छेद 371(A) की आड़ में राज्य अपनी विशिष्ट पहचान और सामाजिक ढाँचे की रक्षा की माँग कर रहा है।

मुख्य बातें

नागालैंड विधानसभा ने 2 सितंबर 2026 को FCRA संशोधन विधेयक, 2026 पर व्यापक परामर्श और गहन जाँच की माँग की।
सलाहकार अचंबेमो किकोन ने FCRA पंजीकरण नवीनीकरण और संपत्ति प्रावधानों को लेकर कोहिमा डायोसिस व NBCC की चिंताएँ सदन में उठाईं।
विधायकों ने पर्याप्त नोटिस, अपील तंत्र और सरल नवीनीकरण प्रक्रिया सहित प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों की माँग की।
मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा और केंद्र ने 12 अगस्त को विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा।
लोंगोन ने FCRA रद्दीकरण मामलों पर 'श्वेत पत्र' जारी करने और 'नामित प्राधिकरण' प्रावधान पर पुनर्विचार की माँग की।
राज्य की अनुच्छेद 371(A) के तहत विशिष्ट संवैधानिक स्थिति को प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा में ध्यान में रखने का आग्रह किया गया।

नागालैंड विधानसभा ने 2 सितंबर 2026 को कोहिमा में प्रस्तावित 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA Amendment Bill 2026) पर गहन जाँच और व्यापक परामर्श की माँग की। विधायकों ने आगाह किया कि प्रस्तावित कड़े प्रावधान नागालैंड के चर्चों, चैरिटेबल संस्थाओं और सिविल सोसाइटी संगठनों के उन कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय राहत के क्षेत्र में दशकों से योगदान दे रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला नियम 50 के तहत तत्काल सार्वजनिक महत्व के विषय के रूप में सदन में उठाया गया। सलाहकार अचंबेमो किकोन ने नोटिस दिया, जिसे सलाहकार टेमजेनमेनबा और विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने समर्थन दिया।

किकोन ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों ने नागालैंड के ईसाई संगठनों में गहरी चिंता पैदा की है। उनकी आपत्ति विशेष रूप से FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण और पंजीकरण रद्द होने, समर्पण या समाप्ति की स्थिति में संपत्ति की अभिरक्षा, प्रबंधन और निपटान से संबंधित प्रावधानों को लेकर है। उन्होंने कोहिमा डायोसिस, नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) और अन्य ईसाई संगठनों की जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि कई संस्थाओं को पहले ही FCRA नवीनीकरण में कठिनाइयाँ आ चुकी हैं।

किकोन ने सरकार से अनुरोध किया कि प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा संवैधानिक सुरक्षा उपायों और अनुच्छेद 371(A) के तहत नागालैंड की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखकर की जाए। उन्होंने राज्य सरकारों, चर्चों, धार्मिक संगठनों, सिविल सोसाइटी समूहों और विकास एजेंसियों के साथ व्यापक परामर्श की भी माँग की।

विधायकों की प्रमुख चिंताएँ

सलाहकार टेमजेनमेनबा ने पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी चंदे को विनियमित करने की आवश्यकता को स्वीकार किया, लेकिन ऐसे उपायों के प्रति सावधान किया जो अनजाने में लोगों की सेवा करने वाली वैध संस्थाओं के कार्य में बाधा बन सकते हैं। उन्होंने प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों की माँग की — जिसमें पर्याप्त नोटिस, संगठनों को अपना पक्ष रखने का अवसर, ठोस कारणों के साथ आदेश, अनुपालन के लिए उचित समयसीमा और प्रभावी अपील तंत्र शामिल हों।

विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने बताया कि मौजूदा FCRA प्रणाली में पहले से ही अनेक अनुपालन शर्तें हैं — जैसे विशेष बैंक खाते, वित्तीय रिपोर्टिंग और प्रशासनिक व्यय पर सीमाएँ। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि नई प्रणाली FCRA नवीनीकरण को सरल, किफायती और पारदर्शी बनाए।

सलाहकार कुदेचो खामो ने चेतावनी दी कि छोटे चर्चों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों पर प्रशासनिक क्षमता कम होने के कारण असंगत बोझ पड़ सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैध विदेशी सहायता से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और राहत कार्यों में — विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में — महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

विधायक पी. लोंगोन ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित न मानते हुए इसे समूचे नागालैंड से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने विधानसभा से आग्रह किया कि वह अपनी चिंताएँ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) तक पहुँचाए और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श की माँग की। लोंगोन ने FCRA पंजीकरण रद्द होने के मामलों पर एक 'श्वेत पत्र' जारी करने तथा प्रस्तावित 'नामित प्राधिकरण' और संपत्ति से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार की भी माँग की।

सरकार की प्रतिक्रिया

बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने सदन को बताया कि राज्य सरकार पहले ही NBCC, कोहिमा बिशप डायोसिस और नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर चुकी है। रियो ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नागालैंड के ईसाई समुदाय की चिंताओं से अवगत कराया और राज्य की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकासात्मक परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया, ताकि प्रस्तावित कानून से जुड़ी चिंताओं की विधिवत जाँच हो सके। रियो ने स्पष्ट किया कि विदेशी योगदान के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, दान और मानवीय कार्यों में लगे वैध संस्थानों पर व्यापक या सामान्य नियमों का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

नागालैंड की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अनुच्छेद 371(A) के तहत नागालैंड को प्राप्त विशेष संवैधानिक दर्जे की प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय बहस तेज है। गौरतलब है कि नागालैंड में ईसाई मिशनरी और चर्च-संचालित संस्थाएँ दशकों से स्थानीय और विदेशी अनुदान के सहयोग से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रही हैं — ऐसे क्षेत्रों में जहाँ सरकारी बुनियादी ढाँचा अभी भी सीमित है।

आलोचकों का कहना है कि FCRA के कड़े प्रावधान इन सेवाओं को अप्रत्यक्ष रूप से बाधित कर सकते हैं, जो राज्य की सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा हैं। यह नागालैंड की पहली ऐसी विधायी बहस नहीं है जिसमें केंद्रीय कानून और राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों के बीच टकराव सामने आया हो।

आगे की राह

मुख्यमंत्री रियो ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार संबंधित पक्षों और केंद्र के साथ संवाद जारी रखेगी, ताकि नागालैंड की चिंताओं का उचित समाधान सुनिश्चित हो सके। 31 सदस्यीय JPC की सिफारिशें इस विधेयक की अंतिम रूपरेखा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

केंद्रीय कानून बार-बार उन संस्थाओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं जो सरकारी सेवाओं की अनुपस्थिति में राज्य की भूमिका निभाती हैं। JPC को विधेयक भेजना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि समिति नागालैंड जैसे राज्यों की विशिष्ट परिस्थितियों को मानक अनुपालन ढाँचे से ऊपर रखती है या नहीं — क्योंकि यहाँ 'विदेशी चंदा' अक्सर विकास का पर्याय है, खतरे का नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FCRA संशोधन विधेयक 2026 क्या है और नागालैंड इससे क्यों चिंतित है?
विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार का प्रस्तावित कानून है जो विदेशी चंदे के नियमन को और कड़ा करता है। नागालैंड में चर्च, NBCC और सिविल सोसाइटी संगठन इसलिए चिंतित हैं क्योंकि प्रस्तावित प्रावधान FCRA पंजीकरण नवीनीकरण को कठिन बना सकते हैं और पंजीकरण रद्द होने पर संपत्ति के प्रबंधन को लेकर अस्पष्टता पैदा करते हैं।
नागालैंड विधानसभा ने इस मुद्दे पर क्या माँगें रखी हैं?
विधानसभा ने व्यापक परामर्श, प्रक्रियागत सुरक्षा उपाय — जैसे पर्याप्त नोटिस, अपील तंत्र और सरल नवीनीकरण प्रक्रिया — तथा अनुच्छेद 371(A) के तहत नागालैंड की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रावधानों की समीक्षा की माँग की है। विधायक पी. लोंगोन ने FCRA रद्दीकरण मामलों पर 'श्वेत पत्र' जारी करने की भी माँग की।
केंद्र सरकार ने FCRA संशोधन विधेयक पर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री नेफियू रियो के गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखने के बाद, केंद्र सरकार ने 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया। इससे प्रस्तावित कानून से जुड़ी चिंताओं की विधिवत जाँच का अवसर मिलेगा।
नागालैंड में FCRA प्रावधान किन संगठनों को प्रभावित कर सकते हैं?
कथित तौर पर इससे नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल, कोहिमा डायोसिस, नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम और जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे चर्च व सिविल सोसाइटी संगठन प्रभावित हो सकते हैं। ये संस्थाएँ दशकों से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में — विशेषकर दूरदराज के इलाकों में — सेवाएँ दे रही हैं।
अनुच्छेद 371(A) का FCRA संशोधन विधेयक से क्या संबंध है?
अनुच्छेद 371(A) नागालैंड को विशेष संवैधानिक दर्जा देता है, जो नागा प्रथाओं और परंपराओं की रक्षा करता है। विधायकों का तर्क है कि FCRA संशोधन के प्रावधानों की समीक्षा इस विशिष्ट संवैधानिक स्थिति और राज्य की सामाजिक-ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए, ताकि केंद्रीय नियमन राज्य की विशेष पहचान के साथ टकराव न पैदा करे।
राष्ट्र प्रेस
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