एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 जेपीसी को भेजा गया, रिजिजू बोले— 'अल्पसंख्यकों पर एक भी प्रावधान नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा ने 12 अगस्त 2026 को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को सौंपने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी अल्पसंख्यक वर्ग को लक्षित करता हो।
जेपीसी का गठन और समयसीमा
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से यह प्रस्ताव सदन में रखा। प्रस्तावित संयुक्त समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति को शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह प्रक्रिया विधेयक की व्यापक संसदीय समीक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनाई गई है।
सरकार का पक्ष
रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'इस विधेयक में एक भी प्रावधान ऐसा नहीं है, जो अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस और अन्य दलों ने कई दिनों तक स्वयं मांग की थी कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी में भेजा जाए। रिजिजू ने कहा, 'आप चाहते हैं कि विदेश का धन बिना कानून के ऐसे ही देश में लाकर खर्चा किया जाए — इसका कोई मतलब नहीं।'
विपक्ष की आपत्तियाँ
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के ज़रिये अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है और विधेयक वापस लेने की माँग की। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी विरोध जताते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ है और सरकार से पूछा कि आज तक वह कौन-सा विधेयक लाई है जो अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नहीं रहा।
आम जनता और एनजीओ पर असर
एफसीआरए विनियमन सीधे उन संगठनों को प्रभावित करता है जो विदेशी अनुदान प्राप्त करते हैं — इनमें धार्मिक संस्थाएँ, सामाजिक संगठन और विकास कार्यों में लगे एनजीओ शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि पिछले एफसीआरए संशोधनों के बाद हज़ारों संगठनों के लाइसेंस रद्द हुए थे, जिससे ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं पर असर पड़ा था। सरकार का तर्क है कि ये बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए ज़रूरी हैं।
आगे क्या होगा
जेपीसी अब विधेयक के एक-एक प्रावधान की जाँच करेगी और शीतकालीन सत्र 2026 से पहले अपनी सिफारिशें सौंपेगी। रिजिजू ने विपक्षी सदस्यों को आमंत्रित किया कि वे अपनी आपत्तियाँ समिति के समक्ष रखें, जहाँ उन्हें पर्याप्त समय और मंच मिलेगा। यह प्रक्रिया तय करेगी कि अंतिम विधेयक का स्वरूप क्या होगा।