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सूरत में साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार, जामताड़ा नेटवर्क से जुड़े तार

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सूरत में साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार, जामताड़ा नेटवर्क से जुड़े तार

सारांश

सूरत साइबर क्राइम सेल ने एपीके मैलवेयर के ज़रिए ₹6,31,414.68 की ठगी के मामले में 43 वर्षीय दीन मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया। आरोपी ने क्रेडिट कार्ड से रकम नकद में बदली और 10% कमीशन काटकर जामताड़ा नेटवर्क को भेजी। मुख्य आरोपी अभी फरार है।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 4 सितंबर 2026 को 43 वर्षीय दीन मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया।
पीड़ित को एपीके फाइल के ज़रिए मैलवेयर इंस्टॉल कराकर कथित तौर पर ₹6,31,414.68 की ठगी की गई।
आरोपी ने एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के क्रेडिट कार्ड से ₹2,28,226.68 खर्च किए और 10% कमीशन रखकर शेष रकम फरार सह-आरोपी को भेजी।
रकम कैश डिपॉजिट मशीनों के ज़रिए कथित तौर पर जामताड़ा स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज।
मुख्य आरोपी अभी जामताड़ा में फरार, जांच जारी।

सूरत सिटी साइबर क्राइम सेल ने 4 सितंबर 2026 को सूरत, गुजरात से 43 वर्षीय दीन मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया है। शेख पर आरोप है कि उसने एक कथित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के लिए ठगी की रकम को नकदी में बदलने में मदद की। जांच में जामताड़ा स्थित एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क से संबंध सामने आए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पीड़ित के मोबाइल पर एक एपीके फाइल इंस्टॉल करवाकर मैलवेयर के ज़रिए उसके बैंक खाते से लगभग आठ लेनदेन किए गए। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता को कथित तौर पर ₹6,31,414.68 की चपत लगाई गई। इसमें से ₹2,28,226.68 दो क्रेडिट कार्डों के माध्यम से खर्च किए गए।

पीड़ित ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी जांच शुरू की।

आरोपी की भूमिका और जामताड़ा कनेक्शन

आरोपी दीन मोहम्मद शेख सूरत के भेस्तान इलाके का निवासी है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की बुढाना तहसील के जोवला गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, शेख ने धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि के बिलों के भुगतान के लिए अपने एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए।

पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) बिशाखा जैन ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर बिलों के भुगतान के बाद राशि को नकद में बदला, 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखा और शेष राशि फरार सह-आरोपी को भेज दी। इसके बाद कैश डिपॉजिट मशीनों के ज़रिए यह राशि कथित तौर पर जामताड़ा स्थित नेटवर्क से जुड़े व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।

कानूनी कार्रवाई

साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस इंस्पेक्टर वी.डी. मंडोरा के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी जांच के ज़रिए आरोपी की पहचान की।

जांच की स्थिति

फिलहाल जांच जारी है और पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो कथित तौर पर जामताड़ा में है। फरार सह-आरोपी की तलाश भी जारी है।

पुलिस की सार्वजनिक चेतावनी

पुलिस उपायुक्त बिशाखा जैन ने नागरिकों को आगाह किया कि अज्ञात नंबरों से सोशल मीडिया के ज़रिए आने वाली किसी भी एपीके फाइल को इंस्टॉल या क्लिक न करें। उन्होंने कहा, 'जब भी लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी कोई एपीके फाइल मिले, तो उन्हें उसे इंस्टॉल नहीं करना चाहिए या उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए। अगर यह किसी अज्ञात नंबर से आई है, तो उन्हें तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए और उस नंबर को ब्लॉक कर देना चाहिए।' यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि जामताड़ा से संचालित साइबर गिरोह अब देश के अन्य राज्यों में स्थानीय सहयोगियों के ज़रिए अपना नेटवर्क फैला रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पीड़ितों की संख्या कम नहीं हो रही। असली सवाल यह है कि क्या केवल स्थानीय सहयोगियों को पकड़ने से मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सकेगा, या फिर यह मामला भी अधूरी जांच की लंबी सूची में शामिल हो जाएगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में साइबर धोखाधड़ी के आरोपी दीन मोहम्मद शेख को क्यों गिरफ्तार किया गया?
शेख पर आरोप है कि उसने एपीके मैलवेयर के ज़रिए एक पीड़ित से ठगी गई ₹6,31,414.68 की रकम को अपने क्रेडिट कार्डों से नकद में बदलकर जामताड़ा नेटवर्क को भेजा। उसने इस प्रक्रिया में 10% कमीशन अपने पास रखा।
एपीके फाइल से बैंक ठगी कैसे होती है?
अज्ञात नंबरों से सोशल मीडिया के ज़रिए एपीके फाइल भेजी जाती है। इसे इंस्टॉल करने पर मैलवेयर फोन में आ जाता है, जो बैंकिंग जानकारी चुराकर पीड़ित की जानकारी के बिना खाते से लेनदेन करता है। इस मामले में पीड़ित के खाते से लगभग आठ लेनदेन किए गए।
जामताड़ा कनेक्शन क्या है और यह मामले से कैसे जुड़ा है?
जामताड़ा, झारखंड, भारत में साइबर अपराध का एक कुख्यात केंद्र माना जाता है। इस मामले में ठगी की रकम कैश डिपॉजिट मशीनों के ज़रिए जामताड़ा स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। मुख्य आरोपी कथित तौर पर अभी जामताड़ा में फरार है।
साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करना चाहिए?
तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। इस मामले में पीड़ित ने यही किया, जिसके बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया।
इस मामले में कौन-सी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई है?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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