सूरत पुलिस ने चीनी साइबर गिरोह के मनी म्यूल को दबोचा, 34 खातों से ₹33.14 करोड़ की ठगी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की सूरत साइबर क्राइम सेल ने 24 अगस्त 2026 को एक चीनी साइबर ठगी नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 34 बैंक खातों के माध्यम से ₹33.14 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की रकम को नेटवर्क तक पहुँचाने में सहयोग करने का आरोप है। यह गिरफ्तारी एक निवेश धोखाधड़ी मामले की तकनीकी जाँच के दौरान हुई।
कौन है गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा (39) के रूप में हुई है। पेशे से मैनपावर सप्लायर बताए जाने वाले यह आरोपी चेन्नई के निवासी हैं और पहले गुरुग्राम में भी रह चुके हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुके लोगों से बैंक खाते हासिल करता था और प्रत्येक लेनदेन पर 3 प्रतिशत कमीशन देता था।
इसके बाद वह इन्हीं खातों को 3.5 प्रतिशत कमीशन पर दुबई स्थित एक फरार आरोपी को उपलब्ध कराता था। जाँच एजेंसियों के अनुसार, दुबई में मौजूद वह फरार आरोपी एक चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहा था और साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी (USDT) के ज़रिये स्थानांतरित करता था।
मुख्य मामला: निवेश धोखाधड़ी का जाल
मुख्य मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता को शेयर बाज़ार में डॉलर निवेश पर भारी मुनाफे का झाँसा देकर एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया था।
आरोप है कि शिकायतकर्ता ने वेबसाइट और कस्टमर सर्विस चैनलों के ज़रिये उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में ₹1.52 करोड़ से अधिक की राशि जमा कर दी। बाद में उसे अपनी रकम निकालने की अनुमति नहीं दी गई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
14 राज्यों से 113 शिकायतें
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाँच के दौरान आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों की पड़ताल में 14 राज्यों से कुल 113 शिकायतें सामने आईं। सबसे अधिक 34 शिकायतें कर्नाटक से दर्ज हुईं। महाराष्ट्र से 11, गुजरात और तमिलनाडु से 10-10, तथा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, बिहार, असम और दिल्ली से 6-6 मामले दर्ज पाए गए।
डेटा एंट्री जॉब घोटाला भी उजागर
जाँच में एक अलग डेटा एंट्री जॉब घोटाले का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में कॉल सेंटर संचालित किए थे। प्रति रिकॉर्ड ₹2 से ₹8 खर्च कर 33 लाख से अधिक लोगों का डेटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदा गया था।
कथित तौर पर टेली-कॉलर्स लोगों को वर्क-फ्रॉम-होम डेटा एंट्री जॉब का लालच देते थे और शुरुआत में ₹5,000 जमा कराते थे। बाद में काम में कथित त्रुटियाँ बताकर पैसे वापस नहीं किए जाते थे। पुलिस का दावा है कि इस तरीके से 750 से अधिक लोगों से ₹35 लाख से ज़्यादा की ठगी की गई।
बरामदगी और पूर्व गिरफ्तारियाँ
पुलिस ने आरोपी के पास से 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर बरामद किए हैं। एक लैपटॉप में 33,88,646 ग्राहकों का डेटा और डेटा एंट्री जॉब से जुड़े 266 एग्रीमेंट मिले हैं। जाँच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर 'केयर कंपास' नाम का एक फर्जी सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन भी तैयार किया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी लगभग 12 बार दुबई की यात्रा कर चुका है और पहले उसके पास दुबई की नागरिकता भी थी। इस मामले में पहले ही मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब नामक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।