25 अगस्त 2026
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सूरत पुलिस ने चीनी साइबर गिरोह के मनी म्यूल को दबोचा, 34 खातों से ₹33.14 करोड़ की ठगी उजागर

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सूरत पुलिस ने चीनी साइबर गिरोह के मनी म्यूल को दबोचा, 34 खातों से ₹33.14 करोड़ की ठगी उजागर

सारांश

सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसे आरोपी को दबोचा है जो चीनी साइबर गिरोह और दुबई के फरार आरोपी के बीच मनी म्यूल की भूमिका निभा रहा था। 34 बैंक खातों, 14 राज्यों की 113 शिकायतों और ₹33.14 करोड़ की ठगी — यह मामला भारत में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की गहरी पैठ को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 24 अगस्त 2026 को लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा (39) को गिरफ्तार किया, जो चीनी साइबर गिरोह से कथित तौर पर जुड़ा था।
आरोपी के 34 बैंक खातों के ज़रिये 14 राज्यों में 113 शिकायतें और ₹33.14 करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा।
मुख्य मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा; शिकायतकर्ता से ₹1.52 करोड़ ठगे गए।
आरोपी ने दुबई स्थित फरार आरोपी को 3.5% कमीशन पर खाते उपलब्ध कराए; ठगी की रकम USDT के ज़रिये स्थानांतरित होती थी।
डेटा एंट्री जॉब घोटाले में 750 से अधिक लोगों से ₹35 लाख से ज़्यादा ठगे गए; लैपटॉप से 33,88,646 ग्राहकों का डेटा बरामद।
इस मामले में पहले 4 आरोपी — मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब — गिरफ्तार हो चुके हैं।

गुजरात पुलिस की सूरत साइबर क्राइम सेल ने 24 अगस्त 2026 को एक चीनी साइबर ठगी नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 34 बैंक खातों के माध्यम से ₹33.14 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की रकम को नेटवर्क तक पहुँचाने में सहयोग करने का आरोप है। यह गिरफ्तारी एक निवेश धोखाधड़ी मामले की तकनीकी जाँच के दौरान हुई।

कौन है गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा (39) के रूप में हुई है। पेशे से मैनपावर सप्लायर बताए जाने वाले यह आरोपी चेन्नई के निवासी हैं और पहले गुरुग्राम में भी रह चुके हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुके लोगों से बैंक खाते हासिल करता था और प्रत्येक लेनदेन पर 3 प्रतिशत कमीशन देता था।

इसके बाद वह इन्हीं खातों को 3.5 प्रतिशत कमीशन पर दुबई स्थित एक फरार आरोपी को उपलब्ध कराता था। जाँच एजेंसियों के अनुसार, दुबई में मौजूद वह फरार आरोपी एक चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहा था और साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी (USDT) के ज़रिये स्थानांतरित करता था।

मुख्य मामला: निवेश धोखाधड़ी का जाल

मुख्य मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता को शेयर बाज़ार में डॉलर निवेश पर भारी मुनाफे का झाँसा देकर एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया था।

आरोप है कि शिकायतकर्ता ने वेबसाइट और कस्टमर सर्विस चैनलों के ज़रिये उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में ₹1.52 करोड़ से अधिक की राशि जमा कर दी। बाद में उसे अपनी रकम निकालने की अनुमति नहीं दी गई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

14 राज्यों से 113 शिकायतें

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाँच के दौरान आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों की पड़ताल में 14 राज्यों से कुल 113 शिकायतें सामने आईं। सबसे अधिक 34 शिकायतें कर्नाटक से दर्ज हुईं। महाराष्ट्र से 11, गुजरात और तमिलनाडु से 10-10, तथा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, बिहार, असम और दिल्ली से 6-6 मामले दर्ज पाए गए।

डेटा एंट्री जॉब घोटाला भी उजागर

जाँच में एक अलग डेटा एंट्री जॉब घोटाले का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में कॉल सेंटर संचालित किए थे। प्रति रिकॉर्ड ₹2 से ₹8 खर्च कर 33 लाख से अधिक लोगों का डेटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदा गया था।

कथित तौर पर टेली-कॉलर्स लोगों को वर्क-फ्रॉम-होम डेटा एंट्री जॉब का लालच देते थे और शुरुआत में ₹5,000 जमा कराते थे। बाद में काम में कथित त्रुटियाँ बताकर पैसे वापस नहीं किए जाते थे। पुलिस का दावा है कि इस तरीके से 750 से अधिक लोगों से ₹35 लाख से ज़्यादा की ठगी की गई।

बरामदगी और पूर्व गिरफ्तारियाँ

पुलिस ने आरोपी के पास से 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर बरामद किए हैं। एक लैपटॉप में 33,88,646 ग्राहकों का डेटा और डेटा एंट्री जॉब से जुड़े 266 एग्रीमेंट मिले हैं। जाँच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर 'केयर कंपास' नाम का एक फर्जी सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन भी तैयार किया था।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी लगभग 12 बार दुबई की यात्रा कर चुका है और पहले उसके पास दुबई की नागरिकता भी थी। इस मामले में पहले ही मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब नामक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दुबई स्थित मध्यस्थ और चीनी साइबर गिरोह मिलकर भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते हैं। USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये रकम का स्थानांतरण पारंपरिक बैंकिंग निगरानी को चुनौती देता है। चिंताजनक यह है कि 14 राज्यों में फैली 113 शिकायतें यह बताती हैं कि यह नेटवर्क किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था — और जो पकड़े गए वे शायद इस जाल की सबसे निचली कड़ी हैं। दुबई में बैठे फरार आरोपी तक पहुँचना असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में गिरफ्तार चीनी साइबर गिरोह का आरोपी कौन है?
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा (39) के रूप में हुई है, जो चेन्नई के निवासी और पेशे से मैनपावर सप्लायर बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, वह बैंक खातों की व्यवस्था कर साइबर ठगी की रकम को चीनी गिरोह तक पहुँचाने में मदद करता था।
इस साइबर ठगी मामले में कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई?
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों की जाँच में 14 राज्यों से 113 शिकायतें मिलीं, जिनमें ₹33.14 करोड़ से अधिक की ठगी का आरोप है। मुख्य मामले में शिकायतकर्ता से ₹1.52 करोड़ से अधिक की राशि ठगी गई।
यह साइबर गिरोह किस तरह काम करता था?
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले गिरफ्तार लोगों से 3% कमीशन पर बैंक खाते खरीदता था और उन्हें दुबई स्थित फरार आरोपी को 3.5% कमीशन पर बेचता था। दुबई का वह आरोपी एक चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर USDT क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये ठगी की रकम को स्थानांतरित करता था।
डेटा एंट्री जॉब घोटाले में कितने लोग प्रभावित हुए?
पुलिस के दावे के अनुसार, आरोपी ने 6 शहरों में कॉल सेंटर चलाकर 750 से अधिक लोगों से ₹35 लाख से ज़्यादा ठगे। वर्क-फ्रॉम-होम का लालच देकर ₹5,000 जमा कराए जाते थे और बाद में कथित त्रुटियाँ बताकर पैसे वापस नहीं किए जाते थे।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
इस मामले में अब तक कुल 5 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इससे पहले मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस ने बताया कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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