2 सितंबर 2026
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सूरत साइबर फ्रॉड: ₹150 के 'रील टास्क' से शुरू हुई ठगी, ₹26.12 लाख गँवाए; सिलवासा से 20 वर्षीय छात्र गिरफ्तार

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सूरत साइबर फ्रॉड: ₹150 के 'रील टास्क' से शुरू हुई ठगी, ₹26.12 लाख गँवाए; सिलवासा से 20 वर्षीय छात्र गिरफ्तार

सारांश

₹150 की मामूली रकम से शुरू हुई 'रील लाइक' की ठगी आखिरकार ₹26.12 लाख के साइबर फ्रॉड में बदल गई। सूरत पुलिस ने सिलवासा से 20 वर्षीय छात्र आदित्य पांडे को गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता ठगों को सौंप दिया।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 2 सितंबर 2026 को सिलवासा से 20 वर्षीय आदित्य पांडे को गिरफ्तार किया।
पीड़ित को टेलीग्राम पर 'रील टास्क' के नाम पर पहले ₹150 दिए गए, फिर ₹26,12,791 की ठगी की गई।
पांडे के HDFC बैंक खाते में 4 दिसंबर 2024 से 12 मई 2026 के बीच ₹51,31,272 के लेन-देन पाए गए।
NCRP पर इस खाते से जुड़ी अलग-अलग राज्यों में 4 शिकायतें मिलीं; कुल कथित धोखाधड़ी ₹1,97,18,059 ।
पांडे पर आरोप है कि उसने 3% कमीशन के बदले अपना खाता फरार आरोपी आरिफ को दिया।
मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम धारा 66(डी) के तहत दर्ज; फरार आरोपी की तलाश जारी।

सूरत की साइबर क्राइम सेल ने 2 सितंबर 2026 को सिलवासा (दादरा और नगर हवेली) से 20 वर्षीय छात्र आदित्य पांडे को गिरफ्तार किया, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, पांडे पर आरोप है कि उसने अपना बैंक खाता एक फरार आरोपी को उपलब्ध कराया, जिसके ज़रिए सूरत के एक निवासी से ₹26,12,791 की साइबर धोखाधड़ी की गई। पीड़ित को शुरुआत में सोशल मीडिया रील्स लाइक करने के एवज में ₹150 का मामूली भुगतान देकर विश्वास में लिया गया, और बाद में बड़े 'इन्वेस्टमेंट' के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करवाए गए।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, ठगों ने सबसे पहले पीड़ित से टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क किया और 'शेयरचैट' रील्स देखने व लाइक करने जैसे सरल ऑनलाइन कार्य करने का प्रस्ताव रखा। भरोसा जीतने के लिए शुरुआती कार्य पूरा होने पर पीड़ित के बैंक खाते में ₹150 जमा कराए गए।

इसके बाद ठगों ने पीड़ित को बताया कि 'इन्वेस्टमेंट टास्क' में भागीदारी से कहीं अधिक कमाई संभव है। कथित तौर पर टेलीग्राम के ज़रिए फर्जी वेबसाइटों के लिंक भेजे गए, जहाँ पीड़ित से अकाउंट बनाने और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने को कहा गया।

पीड़ित ने कुल ₹26,12,791 ट्रांसफर कर दिए। जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो निकासी प्रोसेस नहीं हुई — तब उसे ठगी का एहसास हुआ।

आरोपी की भूमिका और बैंक खाते की जाँच

जाँचकर्ताओं के अनुसार, आदित्य पांडे ने अपना HDFC बैंक खाता टेलीग्राम के ज़रिए फरार आरोपी आरिफ को उपलब्ध कराया, ताकि साइबर धोखाधड़ी की रकम का लेन-देन किया जा सके। इसके बदले पांडे को तीन प्रतिशत कमीशन मिलना तय था।

पुलिस की जाँच में पांडे के बचत खाते में 4 दिसंबर 2024 से 12 मई 2026 के बीच कुल ₹51,31,272 के लेन-देन का पता चला। इनमें से ₹1,63,020 के लेन-देन को पुलिस ने संदिग्ध माना है। उल्लेखनीय है कि पांडे के खाते में 8 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता से ₹1.20 लाख आए थे।

नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते की जाँच करने पर अलग-अलग राज्यों में चार शिकायतें दर्ज मिलीं, जिनमें कथित धोखाधड़ी की कुल रकम ₹1,97,18,059 बताई गई है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर सेल) विशाखा जैन ने बताया, 'तकनीकी जाँच के ज़रिए HDFC बैंक अकाउंट होल्डर आदित्य पांडे की पहचान की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पांडे का अब तक कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। फरार आरोपी आरिफ की तलाश जारी है।

साइबर ठगी का तरीका और विशेषज्ञ की चेतावनी

जैन ने ठगी के व्यापक तौर-तरीकों की व्याख्या करते हुए कहा, 'अपराधी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संभावित पीड़ितों तक पहुँचने और ऐसे लोगों को खोजने के लिए करते हैं जिनके बैंक खाते या अन्य संसाधनों का उपयोग धोखाधड़ी में किया जा सके।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'टास्क-बेस्ड' साइबर फ्रॉड के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

गौरतलब है कि यह घटना उस बड़े पैटर्न का हिस्सा है जिसमें ठग पहले छोटी रकम चुकाकर पीड़ित का विश्वास जीतते हैं और फिर बड़ी राशि ठगते हैं — जिसे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ 'पिग बुचरिंग स्कैम' कहते हैं।

आम जनता के लिए सलाह

सूरत पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर ऑनलाइन शेयर-मार्केट निवेश और अन्य आकर्षक ऑफर के ज़रिए अधिक मुनाफे का वादा करने वाले विज्ञापनों से सतर्क रहें। किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले अनजान व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना अनिवार्य बताया गया है। संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी की सूचना तत्काल NCRP पोर्टल पर दर्ज करने की सलाह दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उसके खाते से कथित तौर पर करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ — यह दर्शाता है कि साइबर अपराधियों ने अपनी श्रृंखला को कितनी चालाकी से विकेंद्रित कर दिया है। असली सरगना आरिफ अब भी फरार है, जो इस पूरी जाँच की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। जब तक ऐसे फरार मास्टरमाइंड पकड़े नहीं जाते और 'मनी म्यूल' भर्ती पर डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी गिरफ्तारियाँ हिमशैल की नोक मात्र हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत 'रील टास्क' साइबर फ्रॉड क्या है?
यह एक ऑनलाइन ठगी का मामला है जिसमें सूरत के एक निवासी को टेलीग्राम पर सोशल मीडिया रील्स लाइक करने के एवज में पहले ₹150 दिए गए, फिर फर्जी 'इन्वेस्टमेंट' वेबसाइटों के ज़रिए ₹26,12,791 ठग लिए गए। सूरत पुलिस ने इस मामले में सिलवासा से 20 वर्षीय छात्र आदित्य पांडे को गिरफ्तार किया है।
आदित्य पांडे को क्यों गिरफ्तार किया गया?
पुलिस के अनुसार, आदित्य पांडे ने अपना HDFC बैंक खाता फरार आरोपी आरिफ को 3% कमीशन के बदले उपलब्ध कराया, जिसका उपयोग साइबर धोखाधड़ी की रकम के लेन-देन के लिए किया गया। तकनीकी जाँच में खाते का संबंध शिकायतकर्ता की ठगी से जुड़ा पाया गया।
इस मामले में कुल कितनी धोखाधड़ी की रकम सामने आई है?
मुख्य शिकायत में पीड़ित से ₹26,12,791 की ठगी हुई। NCRP पर खाते की जाँच में अलग-अलग राज्यों में चार और शिकायतें मिलीं, जिनमें कुल कथित धोखाधड़ी की रकम ₹1,97,18,059 बताई गई है।
'रील टास्क' या 'टास्क-बेस्ड' साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?
पुलिस ने सलाह दी है कि अनजान व्यक्तियों के ऑनलाइन 'आसान कमाई' के प्रस्तावों पर भरोसा न करें और किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले पहचान की पुष्टि करें। संदिग्ध धोखाधड़ी की सूचना तुरंत NCRP पोर्टल पर दें।
इस मामले में आगे क्या होगा?
फरार आरोपी आरिफ की तलाश जारी है और NCRP पर मिली चार अन्य शिकायतों की जानकारी संबंधित राज्यों की स्थानीय पुलिस को दी जाएगी। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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