साक्षी मलिक: 12 साल की उम्र में अखाड़े में कदम, रियो ओलंपिक 2016 में ब्रॉन्ज जीत बनीं पहली भारतीय महिला रेसलर
सारांश
मुख्य बातें
साक्षी मलिक भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने रियो ओलंपिक 2016 में 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया और ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। हरियाणा के एक छोटे से गाँव से निकलकर विश्व मंच तक का यह सफर न केवल संघर्ष से भरा था, बल्कि परिवार के विरोध को पार करते हुए अर्जित की गई उपलब्धियों की एक प्रेरणादायक गाथा भी है।
बचपन और कुश्ती से लगाव की शुरुआत
साक्षी मलिक का जन्म 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गाँव में हुआ। उनके दादा सुबीर मलिक स्वयं पहलवान थे और उन्हीं को देखकर साक्षी के मन में कुश्ती के प्रति रुचि जागी। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उनका भविष्य इसी खेल में है।
हालाँकि, यह राह आसान नहीं थी। उनके माता-पिता और यहाँ तक कि उनके दादा भी नहीं चाहते थे कि वह रेसलिंग को करियर बनाएँ। लेकिन साक्षी की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे परिवार को अंततः झुकना पड़ा। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार अखाड़े में कदम रखा और विधिवत प्रशिक्षण आरंभ किया।
जूनियर स्तर पर चमक और अंतरराष्ट्रीय पहचान
17 साल की आयु में साक्षी ने जूनियर एशियाई विश्व चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अगले ही वर्ष 2010 में उन्होंने विश्व जूनियर चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय महिला कुश्ती अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही थी।
2013 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में साक्षी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वैश्विक मंच पर उनकी असली पहचान 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में बनी, जहाँ उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उसी वर्ष एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
रियो ओलंपिक 2016: ऐतिहासिक उपलब्धि
रियो ओलंपिक 2016 में साक्षी मलिक ने 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर वह कारनामा कर दिखाया जो उस समय किसी ने अपेक्षित नहीं किया था। इस पदक के साथ वह ओलंपिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। गौरतलब है कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं थी — इसने भारत में महिला कुश्ती को एक नई दिशा और सम्मान दिलाया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारत सरकार ने साक्षी को 2016 में प्रतिष्ठित 'राजीव गांधी खेल रत्न' पुरस्कार से नवाज़ा। 2017 में उन्हें 'पद्म श्री' से भी सम्मानित किया गया।
कमबैक और करियर का अंत
रियो के बाद के कुछ वर्ष साक्षी के लिए चुनौतीपूर्ण रहे। लेकिन 2017 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी वापसी का संकेत दिया। फिर कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में साक्षी ने शानदार कमबैक करते हुए गोल्ड मेडल जीता।
हालाँकि, साक्षी के करियर का समापन उतना सुखद नहीं रहा। 2023 में उन्होंने पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया के साथ मिलकर तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए और जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर धरना प्रदर्शन किया। जब बृजभूषण के करीबी माने जाने वाले संजय सिंह को WFI का अध्यक्ष बनाया गया, तो साक्षी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक संन्यास की घोषणा कर दी।
विरासत और आगे की राह
साक्षी मलिक का सफर भारतीय खेल इतिहास में एक प्रेरणापुंज के रूप में दर्ज है। एक ऐसे समाज में जहाँ लड़कियों के कुश्ती करने पर सवाल उठते थे, वहाँ से ओलंपिक पोडियम तक की उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती रहेगी। उनकी विरासत केवल पदकों में नहीं, बल्कि उस बदलाव में है जो उन्होंने भारतीय महिला कुश्ती की धारणा में लाया।