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मुरली श्रीशंकर: चोटों की चुनौतियों के बावजूद देश को दिलाए कई मेडल

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मुरली श्रीशंकर: चोटों की चुनौतियों के बावजूद देश को दिलाए कई मेडल

सारांश

भारत के लॉन्ग जंप स्टार मुरली श्रीशंकर ने अपने अदम्य साहस और मेहनत से कई मेडल जीते हैं। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी और भविष्य की संभावनाएं।

मुख्य बातें

मुरली श्रीशंकर का अदम्य साहस और संघर्ष प्रेरणादायक है।
उन्होंने चोटों का सामना करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में सफलता पाई।
उनकी कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए एक उदाहरण है।
मुरली को 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।
आगामी प्रतियोगिताओं में भारत को और मेडल की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। "सपने वही सच्चे होते हैं, जिनमें संघर्ष की प्रेरणा होती है।" भारत के प्रमुख लॉन्ग जंप एथलीट मुरली श्रीशंकर पर यह कथन पूरी तरह से लागू होता है। मुरली का अदम्य साहस ही था, जिसने उन्हें कभी भी हारने नहीं दिया। चोटों ने मुरली को कई बार तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

मुरली श्रीशंकर का जन्म 27 मार्च 1999 को केरल के पलक्कड़ में हुआ। वे एक एथलेटिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहाँ उनके पिता एस. मुरली एशियाई खेलों के पदक विजेता रहे हैं, और मां के.एस. बिजिमोल भी पूर्व एथलीट थीं।

उन्होंने केवल 4 वर्ष की आयु में दौड़ना शुरू किया और 13 वर्ष की उम्र में ट्रिपल जंप के साथ लॉन्ग जंप में करियर बनाने का निर्णय लिया। मुरली ने इस खेल में अपनी मेहनत से कई बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कीं। लेकिन, 2018 में अपेंडिसाइटिस की बीमारी के कारण वे कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग नहीं ले सके।

फिर भी, उन्होंने बीमारी से लड़कर जोरदार वापसी की। 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मुरली ने 8.08 मीटर की लंबी कूद लगाकर रजत पदक जीता। इसके बाद, एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहाँ उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

पुर्तगाल में आयोजित विश्व एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर में मुरली ने स्वर्ण पदक जीता। वहीं, डायमंड लीग में उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया। हालांकि, घुटने की चोट के कारण वे 2024 के पेरिस ओलंपिक में भाग नहीं ले सके।

मुरली के दृढ़ इरादे ने उन्हें फिर से वापसी करने में मदद की। कजाकिस्तान में कोसानोव मेमोरियल 2025 टूर्नामेंट में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। साल 2024 में उन्हें 'अर्जुन अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया। मुरली से आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में देश को और मेडल की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक सीख है कि हौसला और समर्पण से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुरली श्रीशंकर ने कौन-कौन से मेडल जीते हैं?
मुरली ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत और एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीते हैं।
मुरली की चोट ने उनके करियर पर क्या प्रभाव डाला?
चोटों के कारण मुरली को कई प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पाना पड़ा, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
मुरली का जन्म कब और कहाँ हुआ?
मुरली का जन्म 27 मार्च 1999 को केरल के पलक्कड़ में हुआ।
मुरली को कब 'अर्जुन अवॉर्ड' मिला?
मुरली को साल 2024 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।
मुरली का अगला लक्ष्य क्या है?
मुरली का अगला लक्ष्य आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में देश के लिए और मेडल जीतना है।
राष्ट्र प्रेस
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