मुरली विजय: पिता की डांट ने बदल दी ज़िंदगी, 17 वर्ष की आयु में घर छोड़ा और क्रिकेट में चमके
सारांश
Key Takeaways
- संघर्ष और मेहनत: मुरली विजय ने अपने कठिन समय में भी मेहनत नहीं छोड़ी।
- पिता की डांट का प्रभाव: डांट ने उन्हें घर छोड़ने का निर्णय लेने पर मजबूर किया।
- क्रिकेट में डेब्यू: उन्होंने 2008 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा।
- अवसरों का लाभ उठाना: मुरली ने लगातार अवसरों का लाभ उठाया और नाम कमाया।
- रिटायरमेंट: उन्होंने 2023 में क्रिकेट से रिटायरमेंट लिया।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 12वीं कक्षा में कम अंक आने के बाद मुरली विजय को अपने पिता की डांट इतनी चुभ गई कि उन्होंने केवल 17 साल की उम्र में घर छोड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद, उन्होंने होटल में नौकरी की और साथ ही क्रिकेट में अपने भविष्य को संवारने का ठान लिया। नौकरी के साथ-साथ मुरली ने क्रिकेट के मैदान पर भी कठिन मेहनत जारी रखी। अपने संघर्षों के बल पर मुरली ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया और वर्ष 2008 में उन्हें पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहनने का सौभाग्य मिला।
मुरली विजय का जन्म 1 अप्रैल 1984 को तमिलनाडु में हुआ। उन्हें शुरू से ही क्रिकेट का खास शौक था। वह अक्सर स्कूल छोड़कर क्रिकेट के मैदान पर पहुंच जाते थे। क्रिकेट की बढ़ती दीवानगी ने उनकी पढ़ाई पर असर डालना शुरू कर दिया। नियमित स्कूल ना जाने के कारण मुरली ने 12वीं कक्षा में केवल 40 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनके अंक देखकर पिता ने गुस्से में कह दिया कि वह एक चपरासी बनने के लायक भी नहीं हैं। यही बात मुरली को चुभ गई और उन्होंने 17 साल की उम्र में घर छोड़ने का निर्णय लिया।
अपना गुजारा चलाने के लिए मुरली ने शुरुआत में होटल में नौकरी की और वहीं रहने की जगह भी मिल गई। इसके बाद उन्होंने पार्लर में भी काम किया। हालांकि, इन सबके बीच मुरली ने अपने क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित रखा। 22 गज की पिच पर मुरली ने दिन-रात मेहनत की और उन्हें सफलता मिलने लगी। तमिलनाडु की अंडर-22 टीम में खेलने के दौरान उन्हें क्लब टीम में भी जल्द ही जगह मिल गई।
वर्ष 2006 में मुरली ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तमिलनाडु की ओर से डेब्यू किया। वर्ष 2008 में रणजी ट्रॉफी में मुरली विजय ने अपने सलामी जोड़ीदार अभिनव मुकुंद के साथ मिलकर 462 रनों की साझेदारी निभाई। इसी दौरान मुरली को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने का निमंत्रण मिला।
वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में मुरली विजय ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा और अपना टेस्ट डेब्यू किया। इसके बाद, दाएं हाथ के बल्लेबाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार उपलब्धियां हासिल करते गए। विदेशी पिचों पर मुरली ने अपनी मजबूत तकनीक के दम पर खूब नाम कमाया और जल्द ही भारतीय टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण सदस्य बन गए।
उन्होंने भारत के लिए कुल 61 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान मुरली ने 46 की शानदार औसत से 3,982 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 12 शतक और 15 अर्धशतक लगाए। मुरली ने वर्ष 2010 में वनडे क्रिकेट में अपने करियर की शुरुआत की और कुल 17 एकदिवसीय मैचों में 339 रन बनाये।
आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम का हिस्सा रहते हुए मुरली विजय का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। हालांकि, वह भारत की ओर से क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में कोई खास सफलता नहीं हासिल कर सके। मुरली विजय ने भारत के लिए खेले 9 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 169 रन ही बना पाए। गिरती फॉर्म के कारण मुरली को टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा और वर्ष 2018 के बाद वह भारतीय टीम में दोबारा अपनी जगह नहीं बना सके। 30 जनवरी, 2023 को मुरली ने इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया।