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क्या मनोज सरकार ने रैकेट खरीदने के लिए कभी पैसे नहीं होने की चुनौती से लड़कर देश को पैरालंपिक में मेडल दिलाया?

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क्या मनोज सरकार ने रैकेट खरीदने के लिए कभी पैसे नहीं होने की चुनौती से लड़कर देश को पैरालंपिक में मेडल दिलाया?

सारांश

भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद देश को गौरव दिलाया। उनका संघर्ष और उपलब्धियां युवा खिलाड़ियों के लिए एक उदाहरण हैं। आइए जानें उनके सफर के बारे में!

मुख्य बातें

मनोज सरकार का संघर्ष और समर्पण प्रेरणादायक है।
पैरा बैडमिंटन में उनकी उपलब्धियां देश के लिए गर्व का विषय हैं।
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया।
युवाओं के लिए मनोज का सफर प्रेरणा का स्रोत है।
उनकी मां का समर्थन उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार ने चुनौतियों का सामना करते हुए देश का मान बढ़ाया है। 2020 के टोक्यो पैरालंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मनोज युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा और आदर्श बन चुके हैं।

12 जनवरी 1990 को उत्तराखंड के रुद्रपुर में जन्मे मनोज को जब महज डेढ़ साल की उम्र में तेज बुखार हुआ, तो परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में उन्होंने एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराया, जिसके कारण उनके पैर में कमजोरी आ गई।

मनोज ने बचपन से ही अपने परिवार की कठिनाइयों को समझा। इसी कारण, जब स्कूल बंद होते थे, तो वह अपने पिता के साथ लोगों के घरों में पुताई का काम करते थे, ताकि घर में कुछ पैसे आ सकें।

मनोज को बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद था। जब उन्होंने अन्य बच्चों को खेलते देखा, तो उन्होंने रैकेट खरीदने की इच्छा जताई, लेकिन परिवार के पास पैसे नहीं थे। उनकी मां ने इस दर्द को समझा और खेतों में काम करके कुछ पैसे इकट्ठा किए, जिससे वो सेकेंड हैंड रैकेट खरीद सकें।

मनोज एक प्रतिभाशाली शटलर साबित हुए। उन्होंने सामान्य खिलाड़ी के तौर पर तीन राज्य प्रतियोगिताओं में भाग लिया। बैडमिंटन प्लेयर डीके सेन ने उन्हें पैरा-बैडमिंटन टीम में खेलने की सलाह दी, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। बाद में, मनोज ने इंटरनेशनल पैरा-बैडमिंटन टीम में जगह बनाई।

हालांकि, 2017 में उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन मनोज के हौसले में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने एसएल3 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते हुए बीडब्ल्यूएफ पैरा-बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप 2013 में पुरुष युगल में गोल्ड और मिश्रित युगल में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद, एशियन पैरा गेम्स 2014 में सिल्वर मेडल जीता।

साल 2015 में उन्होंने पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में एकल में ब्रॉन्ज और युगल में गोल्ड जीता। 2016 में एशियन पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप में एक गोल्ड समेत कुल दो पदक जीते। इसके बाद, 2017 में पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक और ब्रॉन्ज पर कब्जा किया।

2019 में एक बार फिर पैरा-बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीते। 2020 टोक्यो ओलंपिक मनोज सरकार के लिए खास था, जिसमें उन्होंने देश को एकल वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। बैडमिंटन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2018 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सफलता अवश्य मिलती है। यह कहानी न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणा है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज सरकार ने कितने मेडल जीते हैं?
मनोज सरकार ने विश्व चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और पैरालंपिक में कई मेडल जीते हैं, जिनमें गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज शामिल हैं।
मनोज सरकार का जन्म कब हुआ?
मनोज सरकार का जन्म 12 जनवरी 1990 को उत्तराखंड के रुद्रपुर में हुआ था।
मनोज सरकार को कौन सा पुरस्कार मिला है?
उन्हें 2018 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
मनोज का संघर्ष क्या था?
मनोज ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया और अपने पैरों में कमजोरी के बावजूद बैडमिंटन में उत्कृष्टता हासिल की।
मनोज के परिवार का क्या योगदान था?
उनकी मां ने रैकेट खरीदने के लिए खेतों में काम करके पैसे जुटाए।
राष्ट्र प्रेस
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