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मानसी जोशी: सड़क हादसे में पैर गंवाया, पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप 2019 में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

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मानसी जोशी: सड़क हादसे में पैर गंवाया, पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप 2019 में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

सारांश

22 साल की उम्र में ट्रक हादसे में बायाँ पैर गंवाने के बाद मानसी जोशी ने हार नहीं मानी — गोपीचंद अकादमी में पसीना बहाया और 2019 में पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप सिंगल्स में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। 2022 में अर्जुन पुरस्कार उनके अदम्य साहस की सरकारी मुहर बनी।

मुख्य बातें

मानसी जोशी का जन्म 11 जून 1989 को राजकोट, गुजरात में हुआ; इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं।
22 वर्ष की आयु में ट्रक दुर्घटना में बायाँ पैर गंवाया; अवसाद से उबरकर बैडमिंटन में वापसी की।
पुलेला गोपीचंद की हैदराबाद अकादमी में प्रशिक्षण लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरीं।
2015 विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर , 2017 में ब्रॉन्ज ; 2016 और 2018 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल ।
2019 पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में सिंगल्स गोल्ड मेडल — करियर की सर्वोच्च उपलब्धि।
2022 में भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।

पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियाँ किसी के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। 22 वर्ष की आयु में एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपना बायाँ पैर गंवाने के बावजूद, मानसी ने न केवल बैडमिंटन कोर्ट पर वापसी की, बल्कि 2019 पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में सिंगल्स स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।

प्रारंभिक जीवन और बैडमिंटन से लगाव

मानसी जोशी का जन्म 11 जून 1989 को गुजरात के राजकोट में हुआ। बचपन से ही उनके पिता ने उन्हें बैडमिंटन से परिचित कराया और खाली समय में बेटी के साथ खेलते थे, जिससे मानसी का इस खेल के प्रति गहरा लगाव विकसित हुआ। पढ़ाई में भी वह अव्वल रहीं और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हो गईं। नौकरी के साथ-साथ बैडमिंटन के प्रति उनका जुनून बरकरार रहा।

जीवन बदल देने वाला हादसा

22 वर्ष की उम्र में मानसी दोपहिया वाहन से दफ्तर जा रही थीं, तभी एक बेकाबू ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। ट्रक उनके बाएँ पैर को रौंदता हुआ निकल गया। लंबे अस्पताल उपचार के बाद डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा। इस दर्दनाक अनुभव ने मानसी को गहरे अवसाद में धकेल दिया। यह वह दौर था जब जिंदगी ने उनके सामने सबसे कठिन परीक्षा रखी।

वापसी और गोपीचंद अकादमी का सफर

एक करीबी दोस्त की प्रेरणा से मानसी ने फिर से रैकेट थामा और धीरे-धीरे खेल में लौटने लगीं। बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में उन्होंने हैदराबाद का रुख किया और प्रख्यात कोच पुलेला गोपीचंद की अकादमी में दाखिला लिया। घरेलू स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने के बाद मानसी ने कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर खुद को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया। गौरतलब है कि शारीरिक अक्षमता को उन्होंने कभी अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया।

अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ

2015 में इंग्लैंड में आयोजित पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में मानसी ने मिक्स्ड डबल्स में सिल्वर मेडल जीता। 2017 की पैरा विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा — 2016 और 2018 दोनों संस्करणों में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।

करियर की सर्वोच्च उपलब्धि 2019 में आई, जब मानसी ने पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के सिंगल्स वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारतीय पैरा बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।

सम्मान और आगे की राह

मानसी की असाधारण उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। उनकी कहानी न केवल खेल जगत में, बल्कि समाज के हर तबके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। मानसी का संघर्ष और सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की पैरा-स्पोर्ट्स नीति की एक अनकही परीक्षा भी है — जहाँ सरकारी ढाँचे से पहले एक दोस्त की प्रेरणा और एक निजी अकादमी ने उन्हें विश्व मंच तक पहुँचाया। यह सवाल उठता है कि यदि संस्थागत समर्थन समय पर मिलता, तो क्या यह सफर और भी पहले संभव होता? अर्जुन पुरस्कार देने में 2022 तक की प्रतीक्षा — जबकि गोल्ड 2019 में आया — यह दर्शाती है कि पैरा एथलीटों की पहचान अभी भी उतनी तत्परता से नहीं होती जितनी होनी चाहिए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसी जोशी कौन हैं और वे क्यों चर्चित हैं?
मानसी जोशी भारत की पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2019 पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में सिंगल्स गोल्ड मेडल जीता। एक सड़क दुर्घटना में बायाँ पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुईं।
मानसी जोशी का हादसा कब और कैसे हुआ?
22 वर्ष की आयु में मानसी दोपहिया वाहन से दफ्तर जा रही थीं, तभी एक बेकाबू ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी और उनका बायाँ पैर रौंद दिया। अस्पताल में लंबे इलाज के बाद डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा।
मानसी जोशी ने 2019 विश्व चैंपियनशिप में कौन-सा मेडल जीता?
मानसी जोशी ने 2019 पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के सिंगल्स वर्ग में गोल्ड मेडल जीता, जो उनके करियर की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है।
मानसी जोशी ने किस कोच के अधीन प्रशिक्षण लिया?
मानसी जोशी ने हैदराबाद में प्रख्यात बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद की अकादमी में दाखिला लिया और वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खुद को तैयार किया।
मानसी जोशी को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने मानसी जोशी को 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया, जो खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।
राष्ट्र प्रेस
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