मानसी जोशी: सड़क हादसे में पैर गंवाया, पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप 2019 में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियाँ किसी के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। 22 वर्ष की आयु में एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपना बायाँ पैर गंवाने के बावजूद, मानसी ने न केवल बैडमिंटन कोर्ट पर वापसी की, बल्कि 2019 पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में सिंगल्स स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है।
प्रारंभिक जीवन और बैडमिंटन से लगाव
मानसी जोशी का जन्म 11 जून 1989 को गुजरात के राजकोट में हुआ। बचपन से ही उनके पिता ने उन्हें बैडमिंटन से परिचित कराया और खाली समय में बेटी के साथ खेलते थे, जिससे मानसी का इस खेल के प्रति गहरा लगाव विकसित हुआ। पढ़ाई में भी वह अव्वल रहीं और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हो गईं। नौकरी के साथ-साथ बैडमिंटन के प्रति उनका जुनून बरकरार रहा।
जीवन बदल देने वाला हादसा
22 वर्ष की उम्र में मानसी दोपहिया वाहन से दफ्तर जा रही थीं, तभी एक बेकाबू ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। ट्रक उनके बाएँ पैर को रौंदता हुआ निकल गया। लंबे अस्पताल उपचार के बाद डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा। इस दर्दनाक अनुभव ने मानसी को गहरे अवसाद में धकेल दिया। यह वह दौर था जब जिंदगी ने उनके सामने सबसे कठिन परीक्षा रखी।
वापसी और गोपीचंद अकादमी का सफर
एक करीबी दोस्त की प्रेरणा से मानसी ने फिर से रैकेट थामा और धीरे-धीरे खेल में लौटने लगीं। बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में उन्होंने हैदराबाद का रुख किया और प्रख्यात कोच पुलेला गोपीचंद की अकादमी में दाखिला लिया। घरेलू स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने के बाद मानसी ने कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर खुद को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया। गौरतलब है कि शारीरिक अक्षमता को उन्होंने कभी अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया।
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ
2015 में इंग्लैंड में आयोजित पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में मानसी ने मिक्स्ड डबल्स में सिल्वर मेडल जीता। 2017 की पैरा विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा — 2016 और 2018 दोनों संस्करणों में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।
करियर की सर्वोच्च उपलब्धि 2019 में आई, जब मानसी ने पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के सिंगल्स वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारतीय पैरा बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।
सम्मान और आगे की राह
मानसी की असाधारण उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। उनकी कहानी न केवल खेल जगत में, बल्कि समाज के हर तबके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। मानसी का संघर्ष और सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है।