12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

त्रिशा जॉली: गोपीचंद एकेडमी से कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 कांस्य तक, पिता की पहचान ने बदली किस्मत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
त्रिशा जॉली: गोपीचंद एकेडमी से कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 कांस्य तक, पिता की पहचान ने बदली किस्मत

सारांश

केरल में जन्मी त्रिशा जॉली ने बेहतर सुविधाओं की तलाश में हैदराबाद का रुख किया, गोपीचंद एकेडमी में तराशी अपनी प्रतिभा, और 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। आज वे महिला युगल विश्व रैंकिंग में शीर्ष-10 में हैं।

मुख्य बातें

त्रिशा जॉली का जन्म 27 मई 2003 को केरल में हुआ; पिता स्कूल में शारीरिक शिक्षक थे।
बेहतर प्रशिक्षण के लिए त्रिशा ने केरल छोड़कर हैदराबाद की गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी में दाखिला लिया।
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गायत्री गोपीचंद के साथ महिला युगल में कांस्य पदक जीता।
ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला युगल जोड़ी बनीं।
सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट जीतकर पहला BWF सुपर 300 खिताब हासिल किया; महिला युगल विश्व रैंकिंग शीर्ष-10 में शामिल।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी त्रिशा जॉली का सफर यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और अटूट लगन मिल जाए तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। 27 मई 2003 को केरल में जन्मी त्रिशा ने बचपन से बैडमिंटन के प्रति असाधारण रुझान दिखाया, जिसे उनके पिता — एक स्कूल के शारीरिक शिक्षक — ने समय रहते पहचाना। आज त्रिशा महिला युगल विश्व रैंकिंग के शीर्ष-10 में अपनी जगह बना चुकी हैं और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में देश के लिए कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

पिता की नज़र ने पहचानी प्रतिभा

त्रिशा के पिता स्कूल में शारीरिक शिक्षक थे और खेल की बारीकियों से भलीभाँति परिचित थे। बेटी के खेल में जो नैसर्गिक प्रतिभा थी, उसे उन्होंने शुरुआत में ही भाँप लिया। पिता की देखरेख में त्रिशा ने बैडमिंटन की तकनीकी बारीकियाँ सीखना शुरू कीं और धीरे-धीरे इस खेल में रमती चली गईं।

हैदराबाद की राह और गोपीचंद एकेडमी

केरल में उस समय बैडमिंटन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। इस चुनौती से पार पाने के लिए त्रिशा ने अपना घर-शहर छोड़कर हैदराबाद का रुख किया और विख्यात गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी में दाखिला लिया। यह निर्णय उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। जूनियर स्तर पर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय बैडमिंटन जगत में चर्चा का विषय बना दिया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक सफलता

त्रिशा की सबसे बड़ी उपलब्धि 2022 में आई, जब उन्होंने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गायत्री गोपीचंद के साथ महिला युगल में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई। उसी वर्ष ऑल इंग्लैंड ओपन में भी इस जोड़ी ने इतिहास रचा — त्रिशा-गायत्री इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनीं।

एशिया चैंपियनशिप और सुपर 300 खिताब

2024 में एशिया टीम चैंपियनशिप में त्रिशा कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। इसी दौरान उन्होंने सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में महिला युगल खिताब अपने नाम किया, जो उनका पहला BWF सुपर 300 स्तर का खिताब था। यह जीत उनके करियर की परिपक्वता की ओर इशारा करती है।

आगे की राह

लगातार शानदार प्रदर्शन की बदौलत त्रिशा महिला युगल विश्व रैंकिंग में शीर्ष-10 में जगह बना चुकी हैं। आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में एक बार फिर उनसे पदक की उम्मीद है। त्रिशा जॉली का सफर भारत के उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर सुविधाओं का असंतुलन खिलाड़ियों को जड़ें छोड़ने पर मजबूर करता है। केरल जैसे राज्य में बैडमिंटन के लिए बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण त्रिशा को हैदराबाद जाना पड़ा — यह व्यक्तिगत जीत है, लेकिन खेल नीति की सामूहिक विफलता भी। गोपीचंद एकेडमी से निकले खिलाड़ियों की सफलता दर यह सवाल उठाती है कि क्या भारत को एक केंद्रीकृत मॉडल पर निर्भर रहना चाहिए या राज्यस्तरीय ढाँचे को मजबूत करना चाहिए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिशा जॉली कौन हैं और वे किस खेल से जुड़ी हैं?
त्रिशा जॉली भारत की प्रमुख बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जो महिला युगल में विश्व रैंकिंग के शीर्ष-10 में शामिल हैं। उनका जन्म 27 मई 2003 को केरल में हुआ और वे हैदराबाद की गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी में प्रशिक्षित हैं।
त्रिशा जॉली ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कौन-सा पदक जीता?
त्रिशा जॉली ने 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गायत्री गोपीचंद के साथ महिला युगल में कांस्य पदक जीता। यह उनकी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि थी जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।
त्रिशा जॉली ने हैदराबाद जाने का फैसला क्यों किया?
केरल में बैडमिंटन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, इसलिए त्रिशा ने हैदराबाद जाकर गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी में दाखिला लिया। यह कदम उनके करियर का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ।
त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी का ऑल इंग्लैंड ओपन में क्या रिकॉर्ड है?
त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला युगल जोड़ी बनीं। यह उपलब्धि 2022 में हासिल हुई।
त्रिशा जॉली का पहला BWF सुपर 300 खिताब कौन-सा था?
त्रिशा जॉली ने सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में महिला युगल खिताब जीता, जो उनका पहला BWF सुपर 300 स्तर का खिताब था। इसके साथ ही वे महिला युगल विश्व रैंकिंग के शीर्ष-10 में पहुँचीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले