सरिता मोर: एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता का ओलंपिक का सपना
सारांश
Key Takeaways
- सरिता मोर भारतीय कुश्ती की एक प्रमुख पहलवान हैं।
- उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते हैं।
- उनका ओलंपिक में खेलने का सपना अभी अधूरा है।
- वे भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं।
- सरिता का संघर्ष प्रेरणादायक है।
नई दिल्ली, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय महिला कुश्ती में सरिता मोर का नाम अत्यंत प्रसिद्ध है। सरिता एक फ्रीस्टाइल पहलवान हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
सरिता मोर का जन्म १६ अप्रैल १९९५ को हरियाणा के सोनीपत जिले में हुआ। इस क्षेत्र से कई महान पहलवानों ने जन्म लिया है जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इसका असर सरिता मोर पर भी पड़ा और उन्होंने कुश्ती में करियर बनाने का निश्चय किया। अपने बचपन में वह कबड्डी की एक अच्छी खिलाड़ी थीं, लेकिन कुश्ती के प्रति उनके प्रेम और मेहनत ने उन्हें इस खेल में अद्वितीय सफलता दिलाई।
सरिता ने २०१४ में सीनियर स्तर पर अपने करियर की शुरुआत की और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। प्रसिद्ध फोगाट बहनों और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की मौजूदगी में, सरिता मोर को भारतीय महिला कुश्ती में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
सरिता ने ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक उनका यह सपना पूरा नहीं हुआ है। उनका पसंदीदा वजन वर्ग ५९ किग्रा है, जो ओलंपिक में मान्य नहीं है। इसलिए, उन्होंने ५७ किग्रा में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन टोक्यो और पेरिस ओलंपिक के लिए भारतीय टीम में स्थान नहीं बना पाईं।
सरिता मोर की उपलब्धियों पर गौर करें तो, २०१७ में एशियाई चैंपियनशिप में २२ साल की उम्र में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके बाद, २०२० और २०२१ में एशियाई चैंपियनशिप में लगातार स्वर्ण पदक जीते और २०२१ में ओस्लो में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। २०२२ में, उन्होंने ५९ किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में विश्व नंबर १ रैंकिंग प्राप्त की। इसी वर्ष उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
यह कुश्ती की दिग्गज पहलवान वर्तमान में इस खेल में सक्रिय हैं और साथ ही भारतीय रेलवे में भी कार्यरत हैं।