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सीजीपीएससी पेपर लीक: ईडी ने छत्तीसगढ़ के 5 ठिकानों पर छापे मारे, उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार

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सीजीपीएससी पेपर लीक: ईडी ने छत्तीसगढ़ के 5 ठिकानों पर छापे मारे, उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार

सारांश

सीजीपीएससी पेपर लीक घोटाले में ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई — छत्तीसगढ़ के चार जिलों में एक साथ पाँच छापे और उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी। ₹3 करोड़ से अधिक की अपराध-अर्जित संपत्ति और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय से कथित संबंध इस मामले को राज्य की सबसे संवेदनशील भर्ती जाँचों में से एक बनाते हैं।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में 5 स्थानों पर पीएमएलए, 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया।
मामला सीजीपीएससी की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
आरोपियों ने कथित तौर पर उम्मीदवारों से ₹3 करोड़ से अधिक वसूले; इसमें से ₹2.80 करोड़ अनिल चंद्राकर को सौंपे गए।
उत्कर्ष चंद्राकर को पीएमएलए धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया; तलाशी में दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय अभिलेख जब्त।
जाँच में तत्कालीन मुख्यमंत्री के पर्सनल असिस्टेंट केके चंद्रवंशी और ओएसडी के पद के कथित दुरुपयोग का उल्लेख।
ईडी इससे पहले 3 जून को भी तलाशी ले चुकी थी; आगे की जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने मंगलवार, 2 सितंबर को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पाँच स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जाँच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू), एसीबी, रायपुर और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ये एफआईआर सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धाँधली के आरोपों पर आधारित थीं।

जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि परीक्षाओं के प्रश्नपत्र निजी दलालों के माध्यम से आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा उम्मीदवारों को रिश्वत के बदले उपलब्ध कराए गए। इससे डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन सुनिश्चित किया गया।

मुख्य आरोपी और अपराध से कमाई

जाँच के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के लीक पेपर उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से नकद राशि वसूली और ₹3 करोड़ से अधिक की 'अपराध से अर्जित संपत्ति' बनाई। इसमें से कथित तौर पर लगभग ₹2.80 करोड़ अनिल चंद्राकर को सौंपे गए।

ईडी के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे धन उगाहने के लिए केके चंद्रवंशी — जो छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के पर्सनल असिस्टेंट और उनके मामा बताए जाते हैं — तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) के नाम, पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया।

पहले की कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्य

गौरतलब है कि इस मामले में ईडी पहले 3 जून को भी तलाशी ले चुकी थी। एकत्रित साक्ष्यों, पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों और बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से अर्जित धन की लेयरिंग, हस्तांतरण, छिपाने और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की प्रक्रियाओं में शामिल थे।

इन साक्ष्यों के आधार पर उत्कर्ष चंद्राकर को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी में बरामदगी

ताज़ा तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों ने अपराध से संबंधित दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय अभिलेख और संपत्ति से जुड़े कागज़ात सहित अन्य महत्त्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए। ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जाँच और कार्रवाई जारी है, जिससे और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संस्थागत विफलता का मामला बनता है, न कि कुछ व्यक्तियों की करतूत। ₹3 करोड़ की वसूली की संख्या छोटी लग सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि कितने पदों पर धोखाधड़ी से चयन हुआ और वे अधिकारी आज किन जिम्मेदारियों पर हैं। बिना व्यापक जवाबदेही के यह जाँच केवल कुछ बिचौलियों तक सिमट जाने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजीपीएससी पेपर लीक मामला क्या है?
यह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) द्वारा 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धाँधली और भ्रष्टाचार का मामला है। आरोप है कि प्रश्नपत्र निजी दलालों के ज़रिए रिश्वत के बदले चुनिंदा उम्मीदवारों को उपलब्ध कराए गए, जिससे डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों पर धोखाधड़ी से चयन हुआ।
ईडी ने छत्तीसगढ़ में किन जिलों पर छापे मारे?
ईडी ने 2 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में कुल पाँच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई और इसमें दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस तथा वित्तीय अभिलेख जब्त किए गए।
उत्कर्ष चंद्राकर को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
उत्कर्ष चंद्राकर को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ईडी के अनुसार, उन्होंने सीजीपीएससी-2021 परीक्षा के लीक पेपर दिलाने का भरोसा देकर उम्मीदवारों से ₹3 करोड़ से अधिक वसूले और अपराध से अर्जित धन को छिपाने व लेयरिंग करने में शामिल रहे।
इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका बताई गई है?
ईडी की जाँच के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने उम्मीदवारों को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के पर्सनल असिस्टेंट केके चंद्रवंशी और तत्कालीन ओएसडी के नाम व पद का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। यह आरोप जाँच एजेंसी के बयान पर आधारित है और अदालत में अभी साबित होना शेष है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जाँच और कार्रवाई जारी है। उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद उन्हें पीएमएलए की प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा। जब्त डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय अभिलेखों के विश्लेषण से नए खुलासे होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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