27 जुलाई 2026
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ईडी ने CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया, 30 जुलाई तक कस्टडी

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ईडी ने CGPSC पेपर लीक मामले में पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया, 30 जुलाई तक कस्टडी

सारांश

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का पेपर लीक घोटाला अब मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच तक पहुँच गया है। ईडी के अनुसार, पूर्व चेयरमैन सोनवानी ने डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर अपने रिश्तेदारों को बैठाने के लिए परीक्षा प्रणाली को ही हथियार बना लिया — और भर्ती नियम तक बदलवा दिए।

मुख्य बातें

ईडी ने CGPSC के पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी को 25 जुलाई 2026 को PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट ने सोनवानी को 30 जुलाई 2026 तक ईडी हिरासत में भेजा।
2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप।
सोनवानी पर रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर और DSP पदों पर धोखाधड़ी से चयनित कराने का आरोप।
2021 में CGPSC भर्ती नियमों में बदलाव कर 'भतीजे' शब्द परिवार की परिभाषा से हटाया गया।
अपराध की कमाई नकद और बहु-स्तरीय बैंकिंग लेनदेन के जरिए घुमाई गई; जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी को 25 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 2020 और 2021 में हुई CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, प्रश्न-पत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों से जुड़े मामले में की गई है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) ने सोनवानी को 30 जुलाई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने अपनी जाँच रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offence Wing) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) तथा उसके बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की जाँच के आधार पर शुरू की। इस मामले में 2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं के आयोजन में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।

मुख्य आरोप: रिश्तेदारों को फायदा पहुँचाने की साजिश

ईडी के अनुसार, CGPSC के चेयरमैन के पद पर रहते हुए सोनवानी ने अन्य सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। इस षड्यंत्र का उद्देश्य अवैध लाभ के बदले प्रश्न-पत्र लीक करना और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करना था, जिससे उनके अपने रिश्तेदारों और पसंदीदा उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयनित करवाया जा सके।

जाँच में यह भी सामने आया कि 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में जानबूझकर बदलाव किया गया था — परिवार की परिभाषा से 'भतीजे' शब्द को हटा दिया गया। ईडी के अनुसार, इस बदलाव से सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन का रास्ता साफ हुआ।

मनी ट्रेल और हिरासत की वजह

जाँच एजेंसी के अनुसार, अपराध से अर्जित धनराशि का एक हिस्सा नकद रूप में एकत्र किया गया, जबकि शेष को कई स्तरों वाले बैंकिंग लेनदेन के माध्यम से घुमाया गया। ईडी का कहना है कि पूछताछ के दौरान सोनवानी ने टालमटोल भरे और असहयोगात्मक जवाब दिए तथा महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। इसी आधार पर एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार किया ताकि अपराध से हुई कमाई का पता लगाया जा सके, मनी ट्रेल की पहचान की जा सके और इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों को उजागर किया जा सके।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जाँच जारी है। रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट ने सोनवानी को 30 जुलाई 2026 तक ईडी की हिरासत में रखने का आदेश दिया है। माना जा रहा है कि जाँच के दायरे में अन्य अभियुक्त भी आ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमन सिंह सोनवानी को ईडी ने क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने सोनवानी को PMLA, 2002 के तहत इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि उन पर 2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और अपराध से अर्जित धन की लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। पूछताछ में असहयोग और तथ्य छिपाने के कारण गिरफ्तारी को जरूरी बताया गया।
CGPSC पेपर लीक मामले में सोनवानी कितने दिन ईडी कस्टडी में रहेंगे?
रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट ने सोनवानी को 30 जुलाई 2026 तक, यानी सात दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा है। इस दौरान ईडी मनी ट्रेल और अन्य अभियुक्तों की पहचान के लिए पूछताछ करेगी।
CGPSC घोटाले में भर्ती नियम कैसे बदले गए थे?
ईडी की जाँच के अनुसार, 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में बदलाव कर परिवार की परिभाषा से 'भतीजे' शब्द हटा दिया गया। इस बदलाव से सोनवानी के रिश्तेदारों के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता साफ हुआ।
इस मामले में CBI और ईडी की जाँच कैसे शुरू हुई?
जाँच की शुरुआत रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज FIR से हुई, जिसके बाद CBI ने जाँच अपने हाथ में ली। CBI की जाँच के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का अलग मामला दर्ज कर अपनी जाँच शुरू की।
CGPSC पेपर लीक से कौन से सरकारी पद प्रभावित हुए?
ईडी के अनुसार, इस घोटाले में डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन कराने का आरोप है। ये पद छत्तीसगढ़ की राज्य सेवा में प्रशासन और पुलिस की रीढ़ माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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