4 सितंबर 2026
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विवाह सहायता योजना में ₹30.18 करोड़ का घोटाला, सिरोंज जनपद के पूर्व सीईओ शोभित त्रिपाठी गिरफ्तार

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विवाह सहायता योजना में ₹30.18 करोड़ का घोटाला, सिरोंज जनपद के पूर्व सीईओ शोभित त्रिपाठी गिरफ्तार

सारांश

मध्य प्रदेश में विवाह सहायता योजना महज एक कल्याण कार्यक्रम नहीं रही — यह कथित तौर पर ₹30.18 करोड़ की लूट का माध्यम बन गई। फर्जी आवेदन, नकली दस्तावेज और कोविड लॉकडाउन के बीच भी जारी हेराफेरी — यह घोटाला सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

ईडी ने सिरोंज जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ शोभित त्रिपाठी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया।
घोटाले में ₹30.18 करोड़ के सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप है।
फर्जीवाड़ा 2019 से नवंबर 2021 के बीच हुआ, जिसमें कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि भी शामिल है।
जाली आवेदन पत्र, नकली दस्तावेज और अपात्र लाभार्थियों को भुगतान किए गए।
त्रिपाठी को 9 सितंबर तक ईडी हिरासत में भेजा गया; 3 अक्टूबर 2025 को हुई छापेमारी में अहम साक्ष्य जब्त।

मध्य प्रदेश में विवाह सहायता योजना के नाम पर ₹30.18 करोड़ के सरकारी फंड की हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल कार्यालय ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। 3 सितंबर 2026 को उन्हें भोपाल की विशेष अदालत (पीएमएलए) में पेश किया गया, जहाँ से न्यायालय ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश सरकार ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह पर ₹51,000 की आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से विवाह सहायता योजना शुरू की थी। ईडी की जाँच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर प्रारंभ हुई, जिसमें शोभित त्रिपाठी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था।

घोटाले का तरीका

जाँच में सामने आया कि शोभित त्रिपाठी ने 2019 से नवंबर 2021 तक सिरोंज जनपद पंचायत के सीईओ पद पर रहते हुए अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इस योजना में व्यापक अनियमितताएँ कीं। ईडी के अनुसार, संदिग्ध विवाह सहायता प्रकरणों में ₹30.18 करोड़ के सरकारी धन को मंजूरी दी गई और वितरित कर दिया गया।

इस हेतु जाली एवं फर्जी आवेदन पत्र तथा लाभार्थियों के नकली दस्तावेज तैयार किए गए। सरकारी राशि गलत सूचनाओं के आधार पर खोले गए बैंक खातों में स्थानांतरित की गई और खाते में राशि आते ही उसे तत्काल कई किस्तों में नकद निकाल लिया जाता था। ऐसे अनेक लोगों को भी योजना का लाभ दिया गया जो इसके पात्र ही नहीं थे।

कोविड लॉकडाउन में भी जारी रहा फर्जीवाड़ा

जाँच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह घोटाला कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी निर्बाध रूप से चलता रहा, जब सार्वजनिक विवाह समारोहों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा हुआ था। उस अवधि में भी विवाह के नाम पर सरकारी कोष से धनराशि निकाली जाती रही — जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाती है।

ईडी की छापेमारी और साक्ष्य

इससे पूर्व 3 अक्टूबर 2025 को ईडी ने इस प्रकरण में तलाशी अभियान चलाया था। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं डिजिटल उपकरण बरामद और जब्त किए गए, जिनसे इस पूरे घोटाले की परतें खुलती चली गईं। यह प्रकरण मध्य प्रदेश में सरकारी कल्याण योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करता है।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल शोभित त्रिपाठी 9 सितंबर तक ईडी की हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है। जाँच एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवाह सहायता योजना घोटाला क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार की विवाह सहायता योजना पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह पर ₹51,000 की सहायता देती थी। आरोप है कि सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ शोभित त्रिपाठी ने 2019 से नवंबर 2021 के बीच जाली दस्तावेजों के जरिए ₹30.18 करोड़ के सरकारी फंड का दुरुपयोग किया।
शोभित त्रिपाठी को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
ईडी ने शोभित त्रिपाठी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। भोपाल की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी हिरासत में भेजा है।
घोटाले में पैसे कैसे निकाले गए?
ईडी के अनुसार, गलत सूचनाओं के आधार पर खोले गए बैंक खातों में सरकारी राशि स्थानांतरित की जाती थी और तत्काल कई किस्तों में नकद निकाल ली जाती थी। इसके लिए फर्जी आवेदन पत्र और नकली दस्तावेज तैयार किए गए थे।
ईडी ने इस मामले में पहले क्या कार्रवाई की थी?
3 अक्टूबर 2025 को ईडी ने इस प्रकरण में तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच आगे बढ़ी और गिरफ्तारी हुई।
क्या कोविड लॉकडाउन के दौरान भी यह घोटाला जारी रहा?
हाँ, जाँच में सामने आया है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी — जब सार्वजनिक विवाह समारोहों पर पूर्ण प्रतिबंध था — विवाह के नाम पर सरकारी कोष से धनराशि निकाली जाती रही। यह इस घोटाले का सबसे गंभीर पहलू माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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