PSIEC मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना में छापेमारी, ₹4.01 करोड़ फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने 13 अगस्त 2026 को पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (PSIEC) के अधिकारियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान ₹12,15,000 की नकदी बरामद की गई और दो वरिष्ठ अधिकारियों के बैंक खातों में जमा ₹4.01 करोड़ फ्रीज कर दिए गए।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत PSIEC के कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि औद्योगिक प्लॉट ऐसे लोगों को आवंटित किए गए जिनका तकनीकी उद्योगों से कोई वास्ता नहीं था।
घोटाले का तरीका
जांचकर्ताओं के अनुसार, आवेदकों ने नकली फर्मों और फर्जी पतों का इस्तेमाल करते हुए औद्योगिक प्लॉट के लिए आवेदन किए। PSIEC अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों के चलते इन्हें प्लॉट आवंटित किए गए। इसके बाद प्लॉट का कब्जा जानबूझकर कई वर्षों तक नहीं दिया गया — इस अवधि को 'जीरो पीरियड' घोषित किया गया, जिसमें ब्याज दर शून्य रखी गई और भुगतान योजनाओं की आवंटन तिथियाँ वर्षों आगे खिसका दी गईं।
जांच में यह भी पता चला कि औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित प्लॉटों को शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के ज़रिए बाजार दरों पर बाहरी लोगों को बेचा गया। इससे भारी मुनाफा कमाया गया। इतना ही नहीं, कुछ औद्योगिक प्लॉटों को विभाजित कर आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया, जो आवंटन की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
रिश्वत और वित्तीय लेनदेन
ईडी के अनुसार, ये अवैध आवंटन भारी रिश्वत के बदले किए गए। रिश्वत की राशि अधिकारियों को नकद लेनदेन और जटिल वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से — प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में — पहुँचाई गई। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए।
कार्रवाई में कौन फंसे
PSIEC के चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक खातों में जमा ₹4.01 करोड़ फ्रीज किए गए हैं। इसके अलावा PSIEC के कार्यालय में भी सर्वे किया गया। यह कार्रवाई रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर प्लॉट आवंटन की व्यापक जांच का हिस्सा है।
आगे क्या होगा
ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी आगे की कार्रवाई के संकेत दे रही है। मामले में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि यह मामला पंजाब में सरकारी भूमि आवंटन में भ्रष्टाचार की बड़ी प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिस पर विजिलेंस ब्यूरो पहले से नज़र रखे हुए है।