14 अगस्त 2026
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PSIEC मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना में छापेमारी, ₹4.01 करोड़ फ्रीज

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PSIEC मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ईडी की चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना में छापेमारी, ₹4.01 करोड़ फ्रीज

सारांश

ईडी ने PSIEC के अधिकारियों पर शिकंजा कसा — फर्जी फर्मों, शेल कंपनियों और 'जीरो पीरियड' की आड़ में औद्योगिक प्लॉट बेचने का यह घोटाला पंजाब में सरकारी भूमि आवंटन के भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। ₹4.01 करोड़ फ्रीज और नकदी बरामदगी के साथ जांच आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

ईडी ने 13 अगस्त 2026 को चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में PSIEC अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
तलाशी में ₹12,15,000 नकद बरामद और जब्त; PSIEC चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह व पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के खातों में ₹4.01 करोड़ फ्रीज।
जांच में सामने आया कि नकली फर्मों और फर्जी पतों के ज़रिए औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए गए।
आवंटित प्लॉट शेल कंपनियों के माध्यम से बाजार दरों पर बेचे गए; कुछ को आवासीय व व्यावसायिक उपयोग के लिए विभाजित किया गया।
मामले की जड़ में विजिलेंस ब्यूरो की एफआईआर है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC की धाराओं के तहत दर्ज है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने 13 अगस्त 2026 को पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (PSIEC) के अधिकारियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान ₹12,15,000 की नकदी बरामद की गई और दो वरिष्ठ अधिकारियों के बैंक खातों में जमा ₹4.01 करोड़ फ्रीज कर दिए गए।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत PSIEC के कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि औद्योगिक प्लॉट ऐसे लोगों को आवंटित किए गए जिनका तकनीकी उद्योगों से कोई वास्ता नहीं था।

घोटाले का तरीका

जांचकर्ताओं के अनुसार, आवेदकों ने नकली फर्मों और फर्जी पतों का इस्तेमाल करते हुए औद्योगिक प्लॉट के लिए आवेदन किए। PSIEC अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों के चलते इन्हें प्लॉट आवंटित किए गए। इसके बाद प्लॉट का कब्जा जानबूझकर कई वर्षों तक नहीं दिया गया — इस अवधि को 'जीरो पीरियड' घोषित किया गया, जिसमें ब्याज दर शून्य रखी गई और भुगतान योजनाओं की आवंटन तिथियाँ वर्षों आगे खिसका दी गईं।

जांच में यह भी पता चला कि औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित प्लॉटों को शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के ज़रिए बाजार दरों पर बाहरी लोगों को बेचा गया। इससे भारी मुनाफा कमाया गया। इतना ही नहीं, कुछ औद्योगिक प्लॉटों को विभाजित कर आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया, जो आवंटन की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

रिश्वत और वित्तीय लेनदेन

ईडी के अनुसार, ये अवैध आवंटन भारी रिश्वत के बदले किए गए। रिश्वत की राशि अधिकारियों को नकद लेनदेन और जटिल वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से — प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में — पहुँचाई गई। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए।

कार्रवाई में कौन फंसे

PSIEC के चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक खातों में जमा ₹4.01 करोड़ फ्रीज किए गए हैं। इसके अलावा PSIEC के कार्यालय में भी सर्वे किया गया। यह कार्रवाई रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर प्लॉट आवंटन की व्यापक जांच का हिस्सा है।

आगे क्या होगा

ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी आगे की कार्रवाई के संकेत दे रही है। मामले में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि यह मामला पंजाब में सरकारी भूमि आवंटन में भ्रष्टाचार की बड़ी प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिस पर विजिलेंस ब्यूरो पहले से नज़र रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो नुकसान सिर्फ राजकोष को नहीं होता — असली उद्यमियों को भी वैध ज़मीन नहीं मिलती। सवाल यह है कि विजिलेंस ब्यूरो की एफआईआर दर्ज होने के बाद भी इन अधिकारियों के खाते इतने लंबे समय तक सक्रिय कैसे रहे। ईडी की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक आवंटन प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता और तीसरे पक्ष का ऑडिट नहीं होगा, ऐसे घोटाले दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PSIEC मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (PSIEC) के अधिकारियों पर रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर नकली फर्मों व फर्जी पतों के ज़रिए औद्योगिक प्लॉट आवंटित करने और भारी रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़ा है। इन प्लॉटों को बाद में शेल कंपनियों के माध्यम से बाजार दरों पर बेचा गया।
ईडी ने किन अधिकारियों पर कार्रवाई की?
ईडी ने PSIEC के चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक खातों में ₹4.01 करोड़ फ्रीज किए हैं। इसके अलावा अन्य अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई।
'जीरो पीरियड' क्या है और इसका घोटाले से क्या संबंध है?
'जीरो पीरियड' वह अवधि है जिसमें प्लॉट का कब्जा जानबूझकर वर्षों तक नहीं दिया गया और उस दौरान ब्याज दर शून्य रखी गई। जांच के अनुसार, इस व्यवस्था का उपयोग आवंटन की शर्तें बदलने और आवंटियों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए किया गया।
इस मामले में कितनी नकदी और संपत्ति जब्त हुई?
तलाशी के दौरान ₹12,15,000 नकद बरामद और जब्त की गई। इसके अलावा दो वरिष्ठ PSIEC अधिकारियों के बैंक खातों में जमा ₹4.01 करोड़ फ्रीज कर दिए गए। बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए।
आगे इस मामले में क्या हो सकता है?
ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी ने आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मामले में और संपत्ति कुर्की या गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। मामला मूल रूप से विजिलेंस ब्यूरो की एफआईआर पर आधारित है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC के तहत दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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