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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया, ₹3,000 करोड़ का आरोप

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया, ₹3,000 करोड़ का आरोप

सारांश

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की कार्रवाई का दायरा अब राजनीतिक गलियारों तक पहुँच गया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी इस संकेत की ओर इशारा करती है कि जांचकर्ता कथित ₹3,000 करोड़ की अवैध कमाई के राजनीतिक पड़ाव तक पहुँच रहे हैं।

मुख्य बातें

रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त 2026 को ईडी ने PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया।
रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 18 अगस्त तक ईडी हिरासत में भेजा।
आरोप है कि सिंडिकेट ने 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में लगभग ₹3,000 करोड़ की अवैध कमाई की।
सिंडिकेट में कथित तौर पर सेवानिवृत्त आईएएस अनिल टुटेजा , अनवर ढेबर और आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी शामिल बताए गए हैं।
बयानों के अनुसार, नकद राशि रायपुर के राजीव भवन (तत्कालीन CPCC कार्यालय) तक पहुँचाई गई।
अग्रवाल PMLA की धारा 50 के तहत जारी चार समन पर पेश नहीं हुए थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने 11 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। अग्रवाल पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (CPCC) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 18 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच रायपुर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर तथा स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की। आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।

सिंडिकेट और अवैध कमाई का तरीका

ईडी के अनुसार, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी के एक सिंडिकेट ने राज्य के शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। एजेंसी का कहना है कि इस सिंडिकेट ने चार प्रमुख माध्यमों से अवैध कमाई की — हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब-किताब वाली देसी शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से वसूले गए वार्षिक कमीशन और FL-10A लाइसेंस देने के बदले विदेशी शराब कंपनियों से वसूली। इस तरह कथित तौर पर लगभग ₹3,000 करोड़ की अवैध कमाई की गई।

अग्रवाल की कथित भूमिका

जांच में सामने आया है कि नकद में अर्जित इस अवैध राशि का एक बड़ा हिस्सा अग्रवाल को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष की हैसियत से सौंपा गया था। PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में नकद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि यह राशि अग्रवाल के निर्देश पर सिंडिकेट के सदस्यों के ज़रिए रायपुर के राजीव भवन — जो उस समय CPCC का मुख्यालय था — तक पहुँचाई गई।

समन की अनदेखी और टालमटोल

ईडी ने बताया कि अग्रवाल PMLA की धारा 50 के तहत जारी चार समन के बावजूद जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए। बाद में जब उन्होंने बयान दिया, तब भी उनके जवाब टालमटोल भरे पाए गए, जिसे एजेंसी ने जांच में असहयोग माना।

आगे की जांच जारी

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। यह गिरफ्तारी उन राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों की लंबी सूची में एक और नाम जोड़ती है जो इस घोटाले के सिलसिले में कानूनी शिकंजे में आ चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर अदालत में साबित होते हैं, तो यह छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कार्यकाल की सबसे बड़ी राजनीतिक-वित्तीय जवाबदेही बन सकती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि चार समन की अनदेखी के बाद ही यह गिरफ्तारी हुई — जो बताता है कि एजेंसी के पास पर्याप्त आधार था। हालांकि, आरोप अभी कथित हैं और अदालत में सिद्ध होना बाकी है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामगोपाल अग्रवाल को ईडी ने क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने उन्हें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि सिंडिकेट से प्राप्त नकद राशि उन्हें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष के रूप में सौंपी गई थी।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में कितने रुपये की अवैध कमाई का आरोप है?
ईडी के अनुसार, इस घोटाले में कथित तौर पर लगभग ₹3,000 करोड़ की अवैध कमाई की गई। यह राशि हिसाब-किताब वाली व विना हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से वसूले कमीशन और FL-10A लाइसेंस के बदले विदेशी शराब कंपनियों से वसूली के ज़रिए जुटाई गई बताई जाती है।
इस घोटाले में किन प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं?
ईडी ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी को एक सिंडिकेट का हिस्सा बताया है। अब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल भी इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं।
रामगोपाल अग्रवाल को कितने दिन की ईडी हिरासत मिली है?
रायपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 11 अगस्त से 18 अगस्त 2026 तक, यानी सात दिन की ईडी हिरासत में भेजा है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कब से चल रही है और क्या यह अभी जारी है?
यह मामला 2019 से 2023 के बीच कथित अपराधों से जुड़ा है और ईडी ने रायपुर के EOW/ACB की एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी ने पुष्टि की है कि आगे की जांच अभी भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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