छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को किया गिरफ्तार, ₹31 करोड़ की अवैध कमाई उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, छाबड़ा को कथित तौर पर लगभग ₹31 करोड़ का अवैध कमीशन प्राप्त हुआ, जो अपराध से अर्जित आय मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार को गिरफ्तारी के बाद ईडी ने छाबड़ा को रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया, जहाँ अदालत ने 5 दिन की ईडी कस्टडी रिमांड मंजूर की। ईडी ने बुधवार, 2 सितंबर को इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी साझा की।
इससे पहले, ईडी ने 3 सितंबर 2025 से 4 सितंबर 2025 के बीच पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई आपराधिक दस्तावेज जब्त किए गए थे।
डीएमएफ घोटाले की पृष्ठभूमि
यह जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की गई थी। डीएमएफ ट्रस्ट की स्थापना प्रत्येक राजस्व जिले में खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के कल्याण के लिए की गई थी।
जांच से पता चला कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान डीएमएफटी के तहत विभिन्न जिलों को आवंटित लगभग ₹9,188.20 करोड़ में से एक बड़े हिस्से को उसके मूल उद्देश्य से भटकाया गया। इन फंड को सप्लाई-आधारित कार्यों में लगाया गया, जहाँ अधिक कीमत दर्शाने और कमीशन बनाने की गुंजाइश अधिक थी।
सिंडिकेट का संगठित तंत्र
ईडी के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और वेंडरों के एक संगठित सिंडिकेट ने इन फंड का दुरुपयोग किया। फंड का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से भेजा गया।
एजेंटों और बिचौलियों ने 'रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर' कंपनियों को जारी किए गए परचेज ऑर्डर की आधार कीमत का 25% से 50% तक कमीशन लिया। इस कमीशन का एक बड़ा हिस्सा कार्य आदेश जारी कराने और भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों को दिया गया।
छाबड़ा की कथित भूमिका
ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा इस सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक थे। उन्होंने कथित तौर पर उन डीएमएफटी कार्यों की पहचान की जिनमें अधिकतम कमीशन की संभावना थी और उन्हें चुनिंदा वेंडरों के बीच प्रतिशत के आधार पर वितरित किया।
बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से ईडी को पता चला कि अवैध कमीशन की यह राशि छाबड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, एचयूएफ और उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के बैंक खातों में जमा हुई।
आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार, इस मामले में जांच और प्रवर्तन कार्रवाई अभी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की नज़र बनी हुई है। गौरतलब है कि डीएमएफ घोटाले में यह अब तक की एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी मानी जा रही है और आगे और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।