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छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को किया गिरफ्तार, ₹31 करोड़ की अवैध कमाई उजागर

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छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को किया गिरफ्तार, ₹31 करोड़ की अवैध कमाई उजागर

सारांश

छत्तीसगढ़ के DMF घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य बिचौलिए सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। ₹9,188 करोड़ के फंड में से एक हिस्से के दुरुपयोग के आरोप हैं और छाबड़ा पर ₹31 करोड़ की अवैध कमाई का मामला है। रायपुर कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड मंजूर की है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के डीएमएफ घोटाले में सतपाल सिंह छाबड़ा को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया।
रायपुर स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने छाबड़ा की 5 दिन की ईडी कस्टडी रिमांड मंजूर की।
वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच डीएमएफटी के तहत आवंटित लगभग ₹9,188.20 करोड़ में से एक हिस्से का कथित दुरुपयोग हुआ।
बिचौलियों ने परचेज ऑर्डर की आधार कीमत का 25% से 50% तक कमीशन लिया।
छाबड़ा पर कथित तौर पर लगभग ₹31 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप है, जो उनके और परिवार के खातों में मिली।
ईडी ने 3-4 सितंबर 2025 को तलाशी के दौरान आपराधिक दस्तावेज जब्त किए थे; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, छाबड़ा को कथित तौर पर लगभग ₹31 करोड़ का अवैध कमीशन प्राप्त हुआ, जो अपराध से अर्जित आय मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को गिरफ्तारी के बाद ईडी ने छाबड़ा को रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया, जहाँ अदालत ने 5 दिन की ईडी कस्टडी रिमांड मंजूर की। ईडी ने बुधवार, 2 सितंबर को इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी साझा की।

इससे पहले, ईडी ने 3 सितंबर 2025 से 4 सितंबर 2025 के बीच पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई आपराधिक दस्तावेज जब्त किए गए थे।

डीएमएफ घोटाले की पृष्ठभूमि

यह जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की गई थी। डीएमएफ ट्रस्ट की स्थापना प्रत्येक राजस्व जिले में खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के कल्याण के लिए की गई थी।

जांच से पता चला कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान डीएमएफटी के तहत विभिन्न जिलों को आवंटित लगभग ₹9,188.20 करोड़ में से एक बड़े हिस्से को उसके मूल उद्देश्य से भटकाया गया। इन फंड को सप्लाई-आधारित कार्यों में लगाया गया, जहाँ अधिक कीमत दर्शाने और कमीशन बनाने की गुंजाइश अधिक थी।

सिंडिकेट का संगठित तंत्र

ईडी के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और वेंडरों के एक संगठित सिंडिकेट ने इन फंड का दुरुपयोग किया। फंड का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से भेजा गया।

एजेंटों और बिचौलियों ने 'रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर' कंपनियों को जारी किए गए परचेज ऑर्डर की आधार कीमत का 25% से 50% तक कमीशन लिया। इस कमीशन का एक बड़ा हिस्सा कार्य आदेश जारी कराने और भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों को दिया गया।

छाबड़ा की कथित भूमिका

ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा इस सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक थे। उन्होंने कथित तौर पर उन डीएमएफटी कार्यों की पहचान की जिनमें अधिकतम कमीशन की संभावना थी और उन्हें चुनिंदा वेंडरों के बीच प्रतिशत के आधार पर वितरित किया।

बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से ईडी को पता चला कि अवैध कमीशन की यह राशि छाबड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, एचयूएफ और उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के बैंक खातों में जमा हुई।

आगे की कार्रवाई

ईडी के अनुसार, इस मामले में जांच और प्रवर्तन कार्रवाई अभी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की नज़र बनी हुई है। गौरतलब है कि डीएमएफ घोटाले में यह अब तक की एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी मानी जा रही है और आगे और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

188 करोड़ के आवंटन में से कमीशन की यह संगठित लूट बताती है कि समस्या किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की है — जिसमें सरकारी कर्मचारी, बिचौलिए और वेंडर सभी शामिल बताए जा रहे हैं। एक गिरफ्तारी से सिंडिकेट का पर्दाफाश शुरू हो सकता है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब उन सरकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने कार्य आदेश जारी करने और भुगतान के बदले कमीशन लिया। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि डीएमएफ ट्रस्ट की निगरानी संरचना में कहाँ चूक हुई — और क्या यह प्रणालीगत खामी अन्य राज्यों में भी मौजूद है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ डीएमएफ घोटाला क्या है?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) ट्रस्ट की स्थापना खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के कल्याण के लिए की गई थी। जांच के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच आवंटित लगभग ₹9,188.20 करोड़ में से एक हिस्से को सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और वेंडरों के सिंडिकेट ने कथित तौर पर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया।
सतपाल सिंह छाबड़ा को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा डीएमएफ घोटाले के सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक थे। उन पर कथित तौर पर ₹31 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप है, जो उनके, उनके परिवार और उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में पाई गई। उन्हें पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।
रायपुर कोर्ट ने कितने दिन की रिमांड दी?
रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने सतपाल सिंह छाबड़ा की 5 दिन की ईडी कस्टडी रिमांड मंजूर की है। ईडी ने उन्हें गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को अदालत में पेश किया था।
डीएमएफ फंड में कमीशन का तंत्र कैसे काम करता था?
जांच के अनुसार, फंड का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से भेजा गया। बिचौलियों ने 'रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर' कंपनियों को जारी परचेज ऑर्डर की आधार कीमत का 25% से 50% तक कमीशन लिया और इसका एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को दिया गया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी के अनुसार, इस मामले में जांच और प्रवर्तन कार्रवाई अभी जारी है। 5 दिन की रिमांड अवधि में आगे की पूछताछ होगी और अन्य आरोपियों तथा संपत्तियों की पहचान की जा सकती है। मामले में और गिरफ्तारियों और संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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