27 सितंबर 2026
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पूनम ढिल्लों ने लता मंगेशकर को किया श्रद्धांजलि: 'उनके बिना हिंदी फिल्मों का संगीत अधूरा'

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पूनम ढिल्लों ने लता मंगेशकर को किया श्रद्धांजलि: 'उनके बिना हिंदी फिल्मों का संगीत अधूरा'

सारांश

मुंबई के टैगोर थिएटर में 'सुरीला सफर-30' कार्यक्रम में पूनम ढिल्लों ने लता मंगेशकर को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनके करियर की लगभग सभी फ़िल्मों में लता जी की आवाज़ थी और उनके बिना हिंदी फ़िल्म संगीत कभी पूरा नहीं हो सकता।

मुख्य बातें

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई के टैगोर थिएटर में 'सुरीला सफर-30' कार्यक्रम में भाग लिया।
पूनम ने कहा कि उनके करियर की लगभग सभी फ़िल्मों — केवल एक-दो को छोड़कर — में लता मंगेशकर की ही आवाज़ थी।
उन्होंने कहा, 'लता मंगेशकर के बिना हिंदी फ़िल्मों का संगीत अधूरा होता है।' लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था।
'सुरीला सफर-30' बॉलीवुड की कालजयी धुनों और लता मंगेशकर की संगीत यात्रा को समर्पित एक वार्षिक संगीत संध्या है।

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई के टैगोर थिएटर में आयोजित संगीत संध्या 'सुरीला सफर-30: एन इवनिंग ऑफ बॉलीवुड मेलोडीज' में भाग लेते हुए महान गायिका लता मंगेशकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि लता जी की आवाज के बिना हिंदी फिल्मों का संगीत अधूरा है और ऐसे कार्यक्रमों के ज़रिए उनकी विरासत को जीवित रखना अत्यंत ज़रूरी है।

मुंबई के टैगोर थिएटर में यादगार संध्या

टैगोर थिएटर में आयोजित इस विशेष संगीत कार्यक्रम में बॉलीवुड की सदाबहार धुनों के साथ लता मंगेशकर की संगीत यात्रा को नमन किया गया। पूनम ढिल्लों ने बताया कि इस थिएटर से उनका रिश्ता बचपन से है और वे यहाँ आयोजित संगीत कार्यक्रमों में नियमित रूप से आती रही हैं।

उन्होंने कहा, 'टैगोर थिएटर से मेरा रिश्ता काफी पुराना है। मैं बचपन से यहाँ आयोजित कॉन्सर्ट में आती रही हूँ। इसलिए इसी जगह पर लता मंगेशकर को याद करने वाले कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरे लिए खास है।'

पूनम ढिल्लों की लता जी के साथ यादें

पूनम ढिल्लों ने बताया कि उनके लंबे फ़िल्मी करियर में लता मंगेशकर की आवाज़ का विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि अपने करियर में जितनी फ़िल्मों में उन्होंने काम किया, उनमें से केवल एक-दो को छोड़कर शेष सभी में लता जी की ही आवाज़ थी।

उन्होंने कहा, 'लता जी के साथ काम करना हमेशा यादगार रहेगा। उनके गाए सभी गाने बेहद खूबसूरत थे।' पूनम ने यह भी जोड़ा कि लता मंगेशकर की आवाज़ आज भी विभिन्न पीढ़ियों के श्रोताओं के दिलों में बसी है।

लता मंगेशकर की संगीत विरासत

'सुरीला सफर-30' एक ऐसा मंच है जो बॉलीवुड की उन कालजयी धुनों को जीवित रखता है, जो दशकों बाद भी श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। लता मंगेशकर की आवाज़ में रिकॉर्ड किए गए गाने आज भी हिंदी फ़िल्म संगीत की पहचान माने जाते हैं।

गौरतलब है कि लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिसके चलते उनका निधन हुआ।

क्यों मायने रखती है यह श्रद्धांजलि

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब फ़िल्म उद्योग और संगीत प्रेमी लगातार लता मंगेशकर की कमी महसूस करते हैं। उनके निधन के बाद से हिंदी फ़िल्म संगीत में उस विशिष्ट 'स्वर' की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।

पूनम ढिल्लों जैसी अभिनेत्रियों का इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि लता मंगेशकर की विरासत केवल संगीत तक सीमित नहीं थी — वह पूरी एक पीढ़ी के सिनेमाई अनुभव की आत्मा थीं। इस श्रद्धांजलि संध्या ने उस विरासत को एक बार फिर जीवंत किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक पूरे युग की आवाज़ थीं। यह उल्लेखनीय है कि उनके निधन के चार साल बाद भी फ़िल्म उद्योग के कलाकार उन्हें इस गहराई से याद करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या वर्तमान हिंदी फ़िल्म संगीत उस विरासत को आगे ले जाने में सक्षम है, या वह 'स्वर्ण युग' केवल स्मृतियों और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों तक सिमटता जा रहा है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूनम ढिल्लों ने लता मंगेशकर को कहाँ और कब याद किया?
पूनम ढिल्लों ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई के टैगोर थिएटर में आयोजित 'सुरीला सफर-30: एन इवनिंग ऑफ बॉलीवुड मेलोडीज' कार्यक्रम में लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि दी। इस संगीत संध्या में बॉलीवुड की सदाबहार धुनों के ज़रिए लता जी की विरासत को याद किया गया।
पूनम ढिल्लों और लता मंगेशकर का क्या रिश्ता था?
पूनम ढिल्लों ने बताया कि उनके फ़िल्मी करियर में जितनी फ़िल्मों में उन्होंने काम किया, उनमें से केवल एक-दो को छोड़कर बाकी सभी में लता मंगेशकर की आवाज़ थी। उन्होंने लता जी के साथ काम को हमेशा यादगार बताया।
लता मंगेशकर का निधन कब हुआ था?
लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था। कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
'सुरीला सफर-30' कार्यक्रम क्या है?
'सुरीला सफर-30' एक संगीत संध्या है जो बॉलीवुड की कालजयी धुनों और लता मंगेशकर जैसी महान गायिकाओं की विरासत को जीवित रखने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है। यह कार्यक्रम मुंबई के टैगोर थिएटर में हुआ।
लता मंगेशकर की विरासत का हिंदी फ़िल्म संगीत पर क्या प्रभाव है?
लता मंगेशकर की आवाज़ में रिकॉर्ड किए गए गाने आज भी विभिन्न पीढ़ियों के बीच सुने जाते हैं और हिंदी फ़िल्म संगीत की पहचान से जुड़े हुए हैं। पूनम ढिल्लों सहित कई कलाकारों का मानना है कि उनके बिना हिंदी फ़िल्मों का संगीत अधूरा है।
राष्ट्र प्रेस
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