पूनम ढिल्लों ने लता मंगेशकर को किया श्रद्धांजलि: 'उनके बिना हिंदी फिल्मों का संगीत अधूरा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई के टैगोर थिएटर में आयोजित संगीत संध्या 'सुरीला सफर-30: एन इवनिंग ऑफ बॉलीवुड मेलोडीज' में भाग लेते हुए महान गायिका लता मंगेशकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि लता जी की आवाज के बिना हिंदी फिल्मों का संगीत अधूरा है और ऐसे कार्यक्रमों के ज़रिए उनकी विरासत को जीवित रखना अत्यंत ज़रूरी है।
मुंबई के टैगोर थिएटर में यादगार संध्या
टैगोर थिएटर में आयोजित इस विशेष संगीत कार्यक्रम में बॉलीवुड की सदाबहार धुनों के साथ लता मंगेशकर की संगीत यात्रा को नमन किया गया। पूनम ढिल्लों ने बताया कि इस थिएटर से उनका रिश्ता बचपन से है और वे यहाँ आयोजित संगीत कार्यक्रमों में नियमित रूप से आती रही हैं।
उन्होंने कहा, 'टैगोर थिएटर से मेरा रिश्ता काफी पुराना है। मैं बचपन से यहाँ आयोजित कॉन्सर्ट में आती रही हूँ। इसलिए इसी जगह पर लता मंगेशकर को याद करने वाले कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरे लिए खास है।'
पूनम ढिल्लों की लता जी के साथ यादें
पूनम ढिल्लों ने बताया कि उनके लंबे फ़िल्मी करियर में लता मंगेशकर की आवाज़ का विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि अपने करियर में जितनी फ़िल्मों में उन्होंने काम किया, उनमें से केवल एक-दो को छोड़कर शेष सभी में लता जी की ही आवाज़ थी।
उन्होंने कहा, 'लता जी के साथ काम करना हमेशा यादगार रहेगा। उनके गाए सभी गाने बेहद खूबसूरत थे।' पूनम ने यह भी जोड़ा कि लता मंगेशकर की आवाज़ आज भी विभिन्न पीढ़ियों के श्रोताओं के दिलों में बसी है।
लता मंगेशकर की संगीत विरासत
'सुरीला सफर-30' एक ऐसा मंच है जो बॉलीवुड की उन कालजयी धुनों को जीवित रखता है, जो दशकों बाद भी श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। लता मंगेशकर की आवाज़ में रिकॉर्ड किए गए गाने आज भी हिंदी फ़िल्म संगीत की पहचान माने जाते हैं।
गौरतलब है कि लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिसके चलते उनका निधन हुआ।
क्यों मायने रखती है यह श्रद्धांजलि
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब फ़िल्म उद्योग और संगीत प्रेमी लगातार लता मंगेशकर की कमी महसूस करते हैं। उनके निधन के बाद से हिंदी फ़िल्म संगीत में उस विशिष्ट 'स्वर' की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
पूनम ढिल्लों जैसी अभिनेत्रियों का इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि लता मंगेशकर की विरासत केवल संगीत तक सीमित नहीं थी — वह पूरी एक पीढ़ी के सिनेमाई अनुभव की आत्मा थीं। इस श्रद्धांजलि संध्या ने उस विरासत को एक बार फिर जीवंत किया।