लता मंगेशकर जयंती: अनिल कपूर, कुमार सानू समेत कलाकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
लता मंगेशकर की जयंती पर 28 सितंबर 2026 को फिल्म और संगीत जगत के कलाकारों ने उन्हें भावुक होकर याद किया। अभिनेता अनिल कपूर से लेकर गायक कुमार सानू और रूप कुमार राठौड़ तक, तमाम हस्तियों ने सोशल मीडिया पर स्वर-साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि अर्पित की। 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में दिवंगत हुईं इस महान गायिका की आवाज़ आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा है।
अनिल कपूर का भावुक संदेश
अभिनेता अनिल कपूर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लता मंगेशकर की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि लता जी की आवाज़ कई पीढ़ियों के साथ रही है और वे खुद को खुशनसीब मानते हैं कि यह उनके सफर का भी हिस्सा बनी। उन्होंने जयंती पर उनके संगीत और उन सभी खूबसूरत यादों को याद किया।
कुमार सानू और रूप कुमार राठौड़ की श्रद्धांजलि
गायक कुमार सानू ने अपने हैंडल पर लिखा, 'लता दीदी आपकी आवाज़ ने हर दिल को छुआ और उन भावनाओं को अर्थ दिया जिन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि मैं आपको सुनकर और आपसे सीखकर बड़ा हुआ और मुझे आपके साथ गाने का सम्मान मिला। एक ही म्यूजिकल दौर का हिस्सा होना और आपके साथ गानों में अपनी आवाज़ देना एक ऐसी याद है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।'
गायक रूप कुमार राठौड़ ने भारत रत्न लता मंगेशकर को याद करते हुए कहा कि उनकी आवाज़ संगीत से कहीं ज़्यादा थी — यह एक ऐसी भावना थी जिसने पीढ़ियों को छुआ और जो लाखों दिलों में आज भी ज़िंदा है। उन्होंने कहा कि लता जी एक ऐसी महान हस्ती थीं जिनकी धुनें हमेशा भारत की आत्मा का हिस्सा रहेंगी।
नितिन मुकेश की भावपूर्ण विदाई
गायक नितिन मुकेश ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि हर पल वे लता जी को साक्षात सुनने के लिए तरसते हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, 'जब तक हम फिर से नहीं मिलते, तब तक भगवान आपके संगीत का आनंद लें।' यह संदेश उस गहरी व्यक्तिगत क्षति को दर्शाता है जो संगीत जगत ने लता जी के जाने से महसूस की है।
लता मंगेशकर की अमर विरासत
गौरतलब है कि लता मंगेशकर ने सात दशकों से अधिक के अपने करियर में हज़ारों गीत गाए और हिंदी सिनेमा की पहचान बनीं। 'आएगा आनेवाला', 'लग जा गले', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'अजीब दास्तां है ये', 'तेरे बिना ज़िंदगी से', 'तुझे देखा तो', 'हमको हमीसे चुरा लो', 'जिया जले' और 'लुका छुपी' जैसे कालजयी गीतों ने उन्हें भारतीय संगीत का पर्याय बना दिया। यह ऐसे समय में आया है जब उनकी पुण्यतिथि के बाद भी उनके गीत स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर करोड़ों बार सुने जाते हैं, जो उनकी अमर विरासत का प्रमाण है। आने वाली पीढ़ियाँ भी उनकी आवाज़ के जादू से अछूती नहीं रहेंगी।