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क्या छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने अंतिम चार्जशीट दाखिल की है?

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क्या छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने अंतिम चार्जशीट दाखिल की है?

सारांश

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने 59 नए आरोपियों को चार्जशीट में शामिल किया। इससे कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई है। यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ और इसे लेकर जांच जारी है।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में 81 आरोपी हैं।
ईडी ने 59 नए आरोपियों को चार्ज किया।
अवैध शराब के धंधे में लगभग 3000 करोड़ रुपये की कमाई हुई।
यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ।
ईडी ने 382 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं।

रायपुर, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विशेष अदालत में अंतिम अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है, जिसमें 59 नए आरोपी शामिल किए गए हैं। इससे कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई है। जांच में यह पाया गया है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। ईडी का अनुमान है कि इस अवैध धंधे से लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की गैरकानूनी कमाई हुई, जिससे राज्य के खजाने को गंभीर नुकसान हुआ।

इस घोटाले की जांच में एक संगठित सिंडिकेट का पता चला, जिसमें नौकरशाह, राजनीतिक नेता और निजी कारोबारी शामिल थे। सिंडिकेट ने शराब नीति को कमजोर करके अवैध तरीके से धन अर्जित किया। उन्होंने चार मुख्य तरीकों का उपयोग किया। पहला, शराब सप्लायर्स से अवैध कमीशन वसूला गया। इसके लिए शराब की आधिकारिक कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया, जिससे राज्य का पैसा रिश्वत के रूप में उपयोग होता था। दूसरा, बिना हिसाब की शराब बेची जाती थी। नकली होलोग्राम वाली बोतलें नकद में खरीदकर सरकारी दुकानों से बेची जातीं, जिससे कोई टैक्स या उत्पाद शुल्क नहीं जाता था। तीसरा, डिस्टिलरी वाले बाजार में हिस्सा बनाए रखने और लाइसेंस के लिए सालाना रिश्वत देते थे। चौथा, विदेशी शराब के लिए नई लाइसेंस श्रेणी बनाई गई, जिसमें सिंडिकेट को बड़ा मुनाफा मिलता था।

ईडी की शिकायत में बताया गया है कि राज्य के उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गहरी साजिश रची गई थी। इस सिंडिकेट का नेतृत्व कारोबारी अनवर ढेबर और उनके साथी कर रहे थे। कई निजी डिस्टिलरी कंपनियां जैसे छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज और भाटिया वाइन मर्चेंट्स ने जानबूझकर अवैध शराब बनाने और कमीशन देने में हिस्सेदारी की। कुछ लोग नकदी इकट्ठा करने और नकली होलोग्राम सप्लाई करने में मदद करते थे।

आरोपियों में कई बड़े नाम शामिल हैं। नौकरशाहों में सेवानिवृत्त आईएएस अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अरुण पति त्रिपाठी जैसे अधिकारी शामिल हैं। इन पर नीति बदलने और सिंडिकेट को संरक्षण देने का आरोप है। कई फील्ड स्तर के आबकारी अधिकारी भी आरोपी बने, जिन्हें अवैध बिक्री की छूट देने के बदले कमीशन मिलता था। राजनीतिक पक्ष में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल के नाम हैं। कवासी लखमा को मुख्य लाभार्थी माना गया, जबकि चैतन्य बघेल पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये की अवैध कमाई संभालने का आरोप है। मुख्यमंत्री कार्यालय की तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया पर नकदी संभालने और अधिकारियों की नियुक्ति का काम सौंपा गया था।

ईडी ने अब तक नौ प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा, चैतन्य बघेल और सौम्या चौरसिया शामिल हैं। कुछ जमानत पर हैं, तो कुछ हिरासत में। ईडी ने लगभग 382 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी जब्त की हैं, जिनमें होटल, जमीन और अन्य एसेट्स शामिल हैं। ये संपत्तियां आरोपियों और उनके परिवारों से जुड़ी हैं। राज्य की आर्थिक अपराध शाखा भी अलग से इसकी जांच कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह निश्चित रूप से देश के नागरिकों के लिए चिंता का विषय है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि न्यायालयी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शराब घोटाले में ईडी ने कितने आरोपियों को चार्ज किया है?
ईडी ने 59 नए आरोपियों को चार्ज किया है, जिससे कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई है।
यह घोटाला कब हुआ था?
यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ था।
ईडी ने अब तक कितनी संपत्तियां जब्त की हैं?
ईडी ने लगभग 382 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं।
इस घोटाले में प्रमुख आरोपी कौन हैं?
प्रमुख आरोपियों में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, और कवासी लखमा शामिल हैं।
क्या इस मामले की जांच जारी है?
हाँ, राज्य की आर्थिक अपराध शाखा भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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