जयशंकर का यूएनजीए में कूटनीतिक दौर: वेनेजुएला, मैक्सिको और बेलारूस से द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान वेनेजुएला, मैक्सिको और बेलारूस के अपने समकक्षों से अलग-अलग बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय सहयोग और मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठकें भारत की सक्रिय बहु-दिशात्मक कूटनीति का हिस्सा हैं, जो पारंपरिक पश्चिमी गठजोड़ से परे संबंध मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।
वेनेजुएला से ऊर्जा सहयोग पर जोर
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वेनेजुएला के विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया गोंजालेज से मुलाकात की। बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 'यूएनजीए81 के दौरान वेनेजुएला के विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया गोंजालेज के साथ अच्छी बैठक हुई। द्विपक्षीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों के अलावा, हमारे ऊर्जा संबंध भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। हमने मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध स्रोतों से सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
मैक्सिको और बेलारूस से भी द्विपक्षीय वार्ता
जयशंकर ने मैक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज और बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिजेंकोव से भी अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने इन दोनों मंत्रियों के साथ हुई मुलाकातों की तस्वीरें भी साझा कीं। गौरतलब है कि बेलारूस के साथ संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देश मिन्स्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए हुए हैं — यह भारत की 'सामरिक स्वायत्तता' की नीति का स्पष्ट संकेत है।
कनाडा के साथ संबंध 'उच्च स्तर' पर ले जाने की तैयारी
इससे पहले जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से भी भेंट की, जो हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे भारत-कनाडा संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्स पर तस्वीर और वीडियो क्लिप साझा करते हुए जयशंकर ने लिखा, 'यूएनजीए81 में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मिलकर हमेशा खुशी होती है। एक सार्थक चर्चा हुई क्योंकि हम संबंधों को ऊँचे स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।' यह बयान खालिस्तान विवाद के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी को पाटने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आतंकवाद पर कड़ा रुख: 'जीरो टॉलरेंस'
यूएनजीए की आम बहस में बोलते हुए जयशंकर ने आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख दोहराया। उन्होंने बिना नाम लिए कहा, 'कल, आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 'आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा।' जयशंकर ने सीमा पार से होने वाले सरकारी प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बताते हुए आतंकवाद की फंडिंग का पर्दाफाश करने और इसे रोकने का आह्वान किया।
वैश्विक व्यवस्था पर व्यापक चिंता
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि दुनिया में 'हर चीज का हथियार के तौर पर इस्तेमाल' हो रहा है — चाहे वह वित्तीय तंत्र हो, बाज़ार तक पहुँच हो, सप्लाई चेन हो या टेक्नोलॉजी। उन्होंने रेखांकित किया कि देश जोखिम कम करके और अपने संबंधों में विविधता लाकर इसका जवाब दे रहे हैं, लेकिन व्यापक वैश्विक माहौल में भरोसा और सद्भावना कम हो रही है। यूएनजीए81 में जयशंकर का यह कूटनीतिक दौर आने वाले हफ्तों में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।