मन की बात में PM मोदी ने राजिंदर सिंह सीनियर को सराहा, 1980 ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट हॉकी कोच की अनोखी कहानी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम की 138वीं कड़ी में पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी और कोच राजिंदर सिंह सीनियर की विशेष रूप से सराहना की। मोदी ने उन्हें उन समर्पित लोगों की श्रेणी में रखा जो गाँवों और कस्बों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और तराशने में जुटे हैं।
मन की बात में क्या बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने इस बार लाल किले से स्पोर्ट्स टैलेंट हंट अभियान का ऐलान किया है। भारत खेलों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करता रहे, इसके लिए गाँवों और कस्बों तक पहुँचकर खेल प्रतिभाओं को ढूँढना ज़रूरी है।' उन्होंने कहा कि 'हमारे पंजाब में यही काम राजिंदर सिंह सीनियर कर रहे हैं।' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 'उनके समर्पण की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।'
राजिंदर सिंह सीनियर कौन हैं
राजिंदर सिंह सीनियर का जन्म 7 जनवरी 1958 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। बतौर डिफेंडर और पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ उन्होंने भारतीय हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाई। वे 1980 के मॉस्को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के अभिन्न सदस्य थे।
1981-82 हॉकी विश्व कप में उन्होंने 12 गोल किए और अपनी आक्रामक खेल शैली से प्रतिस्पर्धियों को चुनौती दी। गौरतलब है कि खिलाड़ी के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उतनी ही सफलता हासिल की।
कोच के रूप में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि 2001 में जब भारत ने पहली बार पुरुष जूनियर हॉकी विश्व कप का खिताब जीता, तब राजिंदर सिंह कोच की भूमिका में थे। इसके दो वर्ष बाद, 2003 में भारत ने सीनियर एशिया कप खिताब जीता — और उस मौके पर भी वे टीम के कोच थे। यह ऐसे समय में आया है जब देश में खेल कोचिंग की संरचना को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है।
राउंडग्लास हॉकी अकादमी और ज़मीनी काम
सक्रिय हॉकी से संन्यास लेने के बाद राजिंदर सिंह ने राउंडग्लास हॉकी अकादमी के माध्यम से अपने जुनून को नई दिशा दी है। उनके प्रयासों से पंजाब के गाँवों में नई हॉकी एस्ट्रो टर्फ बिछाई जा रही है। उनका मुख्य लक्ष्य उन इलाकों में प्रतिभाओं की पहचान करना है जहाँ पेशेवर कोचिंग की सुविधा दुर्लभ है।
रिपोर्टों के अनुसार, उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी जूनियर और सीनियर स्तर की राष्ट्रीय टीमों में जगह बनाने में सफल रहे हैं। यह पहल उस खाई को पाटने की कोशिश है जो शहरी और ग्रामीण खेल अवसरों के बीच दशकों से बनी हुई है।
आगे की राह
PM मोदी के 'मन की बात' में उल्लेख के बाद राजिंदर सिंह सीनियर की अकादमी और उनके ज़मीनी प्रयासों पर राष्ट्रीय ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। स्पोर्ट्स टैलेंट हंट अभियान के साथ यदि उनके मॉडल को व्यापक समर्थन मिला, तो यह ग्रामीण भारत में हॉकी पुनरुत्थान की एक नई इबारत लिख सकता है।