क्या ओडिशा की कैनोइंग खिलाड़ी रश्मिता साहू का 'मन की बात' में उल्लेख गर्व का क्षण है?

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क्या ओडिशा की कैनोइंग खिलाड़ी रश्मिता साहू का 'मन की बात' में उल्लेख गर्व का क्षण है?

सारांश

ओडिशा की कैनोइंग खिलाड़ी रश्मिता साहू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' में उल्लेखित किया गया। रश्मिता ने एशियाई खेलों में पदक जीतने का संकल्प लिया है। जानिए उनके सफर और संघर्षों के बारे में।

Key Takeaways

  • रश्मिता साहू का सफर प्रेरणादायक है।
  • उन्होंने 41 पदक जीते हैं।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी उपलब्धियों को सराहा।
  • खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
  • परिवार का समर्थन सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

भुवनेश्वर, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा की कैनोइंग खिलाड़ी रश्मिता साहू का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में उल्लेख किया गया, जिससे उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि वह आगामी एशियाई खेलों में भारत के लिए पदक जीतने के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं।

वर्तमान में, रश्मिता ओडिशा पुलिस में कांस्टेबल हैं और ओडिशा स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के जगतपुर संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने हाल ही में खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में पदक जीता और अब प्रधानमंत्री द्वारा उनके नाम का उल्लेख होने के बाद पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है।

जम्मू-कश्मीर में आयोजित खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने रश्मिता की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और बताया कि उन्होंने इस आयोजन में दो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए उनसे अपने खेल के सफर को साझा करने का आग्रह किया। रश्मिता ने बताया कि उन्होंने 2017 में कैनोइंग में करियर की शुरुआत की और तब से कई राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में भाग लिया है, जिसमें 13 स्वर्ण, 14 रजत और 14 कांस्य सहित 41 पदकों का शानदार संग्रह किया है। कटक के चौद्वार के एक छोटे से गांव से कैनोइंग में एक प्रसिद्ध नाम बनने तक, रश्मिता का सफर दृढ़ संकल्प और चुनौतियों से भरा रहा है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए, उन्होंने कहा, "मन की बात में मेरा उल्लेख पाकर मुझे बहुत अच्छा लगा। यह मेरे लिए, मेरे खेल केंद्र और ओडिशा के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, और मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह हो गया। मैं उस बातचीत को कभी नहीं भूल सकती, क्योंकि यह बहुत प्रेरणादायक थी और मुझे प्रेरित करती रहेगी।"

उन्होंने आगे कहा कि यहां मौजूद सभी लोग, मेरा परिवार और केंद्र के मेरे साथी एथलीट, आज बहुत खुश और गौरवान्वित हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली रश्मिता ने कहा कि उनके परिवार का पारंपरिक व्यवसाय नौकायन ने उन्हें कैनोइंग में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया।

उन्‍होंने कहा कि मेरी मां का निधन जल्दी हो गया। आर्थिक तंगी थी, लेकिन मेरे चाचा और मेरे कोच ने मुझे इससे निपटने में मदद की। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और इस खेल ने मुझे एक पहचान दी है। उन्होंने युवाओं से उन खेलों को अपनाने का आग्रह किया, जिनके प्रति वे जुनूनी हैं।

उनके कोच एल. जॉनसन सिंह ने भी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए गर्व व्यक्त किया। उन्‍होंने कहा कि मुझे आज बहुत खुशी और गर्व है कि प्रधानमंत्री ने मन की बात के दौरान रश्मिता की कहानी साझा की। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री हमारी रश्मिता साहू से बात करेंगे। हम बहुत खुश हुए और सभी ने उन्हें बधाई दी।

उन्‍होंने आगे कहा कि एक कोच के रूप में मैं उनसे ज्‍यादा खुश हूं। वह बहुत प्रतिभाशाली हैं और महान ऊंचाइयों तक पहुंचने की हकदार हैं। हम इस अवसर और समर्थन के लिए ओडिशा सरकार सहित सभी का धन्यवाद करते हैं। हमें विश्वास है कि वह हमें गौरवान्वित करती रहेंगी।

Point of View

यह कहानी केवल रश्मिता साहू की नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत के खेल क्षेत्र की है। रश्मिता का संघर्ष और उनकी सफलता हमें प्रेरित करती है। यह देश में खेलों को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
NationPress
31/08/2025

Frequently Asked Questions

रश्मिता साहू ने कब कैनोइंग में करियर शुरू किया?
रश्मिता साहू ने 2017 में कैनोइंग में करियर की शुरुआत की।
रश्मिता साहू ने कितने पदक जीते हैं?
उन्होंने अब तक 41 पदक जीते हैं, जिसमें 13 स्वर्ण और 14 रजत पदक शामिल हैं।
रश्मिता साहू के कोच का नाम क्या है?
उनके कोच का नाम एल. जॉनसन सिंह है।
रश्मिता साहू किस खेल में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं?
वह कैनोइंग खेल में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
रश्मिता साहू का परिवार किस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है?
उनका परिवार पारंपरिक रूप से नौकायन के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।