22 जुलाई 2026
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जेपीएससी विवाद: सीआईडी ने 8 को हिरासत में लिया, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा सौंपने पर उठे सवाल

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जेपीएससी विवाद: सीआईडी ने 8 को हिरासत में लिया, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा सौंपने पर उठे सवाल

सारांश

झारखंड की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। सीआईडी ने 8 ठिकानों पर छापे मारकर 8 लोगों को हिरासत में लिया — और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेएसएससी द्वारा ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को यह परीक्षा किसने और क्यों सौंपी।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 22 जुलाई को जेपीएससी मुख्यालय समेत 8 ठिकानों पर छापेमारी कर 8 लोगों को हिरासत में लिया।
हिरासत में जेपीएससी की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और टीडीपीएल के दोनों निदेशक सत्यपाल सिंह व रामबीर सिंह शामिल हैं।
परीक्षा संचालक एजेंसी टीडीपीएल को जेएसएससी ने मई 2025 में कथित अनियमितताओं के आधार पर ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
जांचकर्ता सर्वर लॉग, ओएमआर रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव की फॉरेंसिक जांच कर डिजिटल टैंपरिंग की संभावना तलाश रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ अंक न जारी करने, मेरिट सूची पर हस्ताक्षर न होने और ओएमआर शीट न देने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी ने 22 जुलाई को अपनी कार्रवाई और तेज कर दी। रांची स्थित जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा संचालक एजेंसी टीडीपीएल के दफ्तर समेत आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद आठ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है।

किन्हें लिया गया हिरासत में

हिरासत में लिए गए लोगों में जेपीएससी की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह, दूसरे निदेशक रामबीर सिंह और कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी शामिल हैं। इनके अलावा आयोग की गोपनीय शाखा और कंप्यूटर प्रकोष्ठ से जुड़े तीन कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है।

सीआईडी इन सभी से परीक्षा संचालन, डेटा प्रोसेसिंग और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही है।

जब्त किए गए साक्ष्य और डिजिटल जांच

छापेमारी के दौरान दोनों कार्यालयों से बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इनमें कंप्यूटर, सीपीयू, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सर्वर डेटा, ओएमआर स्कैनिंग रिकॉर्ड, मेरिट सूची से जुड़े अभिलेख, गोपनीय फाइलें, डायरियाँ और मोबाइल फोन शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी सर्वर की लॉग फाइल, डिजिटल एक्सेस हिस्ट्री और डेटा ट्रांजैक्शन का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी प्रकार की डिजिटल टैंपरिंग या ओएमआर डेटा में हेरफेर तो नहीं की गई। जब्त उपकरणों को साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेजा जा रहा है, जहाँ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जाएगा।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा सौंपने पर सवाल

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि परीक्षा संचालन का जिम्मा टीडीपीएल को क्यों और किन परिस्थितियों में दिया गया। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने मई 2025 में ही इस एजेंसी को कथित अनियमितताओं, गोपनीयता संबंधी चूक और असंतोषजनक जवाबों के आधार पर ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा का संचालन इसी एजेंसी को सौंपा गया — यह तथ्य जांचकर्ताओं की नज़र में है।

सीआईडी अब यह भी पड़ताल कर रही है कि इस चयन-प्रक्रिया में किस स्तर पर और किसने निर्णय लिया।

अभ्यर्थियों के आरोप और आंदोलन की पृष्ठभूमि

परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई गंभीर आरोप लगाए — बिना कट-ऑफ अंक जारी किए परिणाम प्रकाशित करना, मेरिट सूची पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर का अभाव, ओएमआर शीट उपलब्ध न कराना और पारदर्शिता की कमी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।

इन शिकायतों के बाद छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने आंदोलन शुरू किया, जिसके दबाव में राज्य सरकार ने सीआईडी जांच का आदेश दिया।

आगे क्या होगा

सूत्रों के अनुसार जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और पूछताछ के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल सीआईडी ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। गौरतलब है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

सवाल यह है कि किसने, किस अधिकार से और किस दबाव में इस प्रतिबंध को नज़रअंदाज़ किया। डिजिटल फॉरेंसिक जांच यदि ओएमआर या सर्वर डेटा में हेरफेर की पुष्टि करती है, तो यह विवाद परीक्षा घोटाले से आगे बढ़कर संस्थागत विफलता का प्रमाण बन जाएगा। झारखंड के लाखों अभ्यर्थी जो वर्षों की तैयारी के बाद इस परीक्षा में बैठे, उनके भविष्य की कीमत पर यह खेल खेला गया — यही इस मामले की असली गंभीरता है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी 14वीं परीक्षा विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ अंक न जारी करने, मेरिट सूची पर अधिकृत हस्ताक्षर न होने और ओएमआर शीट न देने जैसी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। इन शिकायतों के बाद छात्र आंदोलन और राजनीतिक दबाव में राज्य सरकार ने सीआईडी जांच के आदेश दिए।
सीआईडी ने किन्हें हिरासत में लिया है?
सीआईडी ने 22 जुलाई को जेपीएससी की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह, दूसरे निदेशक रामबीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी और आयोग के गोपनीय शाखा व कंप्यूटर प्रकोष्ठ से जुड़े तीन कर्मचारियों समेत कुल आठ लोगों को हिरासत में लिया है।
टीडीपीएल को ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद परीक्षा क्यों सौंपी गई?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने मई 2025 में टीडीपीएल को कथित अनियमितताओं और गोपनीयता संबंधी चूक के कारण ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद इसी एजेंसी को जेपीएससी की प्रतिष्ठित परीक्षा सौंपी गई — किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर यह निर्णय हुआ, यही सीआईडी जांच का केंद्रीय प्रश्न है।
जांच में अब तक क्या साक्ष्य मिले हैं?
छापेमारी में कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सर्वर डेटा, ओएमआर स्कैनिंग रिकॉर्ड, मेरिट सूची के अभिलेख, गोपनीय फाइलें और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार इन्हें साइबर व फॉरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेजा जा रहा है ताकि डिलीट डेटा रिकवर किया जा सके और डिजिटल टैंपरिंग की जांच हो सके।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और पूछताछ के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। सीआईडी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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