जेपीएससी विवाद: सीआईडी ने 8 को हिरासत में लिया, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा सौंपने पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी ने 22 जुलाई को अपनी कार्रवाई और तेज कर दी। रांची स्थित जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा संचालक एजेंसी टीडीपीएल के दफ्तर समेत आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद आठ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है।
किन्हें लिया गया हिरासत में
हिरासत में लिए गए लोगों में जेपीएससी की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह, दूसरे निदेशक रामबीर सिंह और कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी शामिल हैं। इनके अलावा आयोग की गोपनीय शाखा और कंप्यूटर प्रकोष्ठ से जुड़े तीन कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है।
सीआईडी इन सभी से परीक्षा संचालन, डेटा प्रोसेसिंग और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही है।
जब्त किए गए साक्ष्य और डिजिटल जांच
छापेमारी के दौरान दोनों कार्यालयों से बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इनमें कंप्यूटर, सीपीयू, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सर्वर डेटा, ओएमआर स्कैनिंग रिकॉर्ड, मेरिट सूची से जुड़े अभिलेख, गोपनीय फाइलें, डायरियाँ और मोबाइल फोन शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी सर्वर की लॉग फाइल, डिजिटल एक्सेस हिस्ट्री और डेटा ट्रांजैक्शन का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी प्रकार की डिजिटल टैंपरिंग या ओएमआर डेटा में हेरफेर तो नहीं की गई। जब्त उपकरणों को साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेजा जा रहा है, जहाँ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जाएगा।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा सौंपने पर सवाल
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि परीक्षा संचालन का जिम्मा टीडीपीएल को क्यों और किन परिस्थितियों में दिया गया। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने मई 2025 में ही इस एजेंसी को कथित अनियमितताओं, गोपनीयता संबंधी चूक और असंतोषजनक जवाबों के आधार पर ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा का संचालन इसी एजेंसी को सौंपा गया — यह तथ्य जांचकर्ताओं की नज़र में है।
सीआईडी अब यह भी पड़ताल कर रही है कि इस चयन-प्रक्रिया में किस स्तर पर और किसने निर्णय लिया।
अभ्यर्थियों के आरोप और आंदोलन की पृष्ठभूमि
परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई गंभीर आरोप लगाए — बिना कट-ऑफ अंक जारी किए परिणाम प्रकाशित करना, मेरिट सूची पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर का अभाव, ओएमआर शीट उपलब्ध न कराना और पारदर्शिता की कमी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
इन शिकायतों के बाद छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने आंदोलन शुरू किया, जिसके दबाव में राज्य सरकार ने सीआईडी जांच का आदेश दिया।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और पूछताछ के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल सीआईडी ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। गौरतलब है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।