जेपीएससी गड़बड़ी: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से सीआईडी की लगातार तीसरे दिन पूछताछ, पासपोर्ट जब्त
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा सहित अनेक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के सामने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते शुक्रवार, 31 जुलाई को लगातार तीसरे दिन पूछताछ के लिए उपस्थित हुए। इससे पहले जाँच अधिकारियों ने उनसे दो दिनों तक घंटों गहन पूछताछ की थी।
जाँच का केंद्र बिंदु
सूत्रों के अनुसार, सीआईडी की जाँच मुख्यतः परीक्षा संचालन से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों, परीक्षा प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। जाँच अधिकारी यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि विवादों में रही इस ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को किस आधार पर परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई और इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
पूछताछ के मुख्य बिंदु
खियांग्ते से ओएमआर शीट की छपाई, सुरक्षित रखरखाव, मूल्यांकन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के डेटा की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और परीक्षा परिणाम तैयार करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, उप परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी उनसे जानकारी ली जा रही है।
गौरतलब है कि जाँच के दौरान सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। उनसे आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए की गई विदेश यात्राओं और उन पर हुए खर्च के बारे में भी जानकारी माँगी गई है।
साक्ष्यों का मिलान
हालाँकि सीआईडी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जाँच के दौरान पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों के बयान, जब्त दस्तावेजों, फाइल नोटिंग और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन तथ्यों के आधार पर मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और परीक्षाएँ स्थगित
जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक आयोग की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस विवाद के बीच जेपीएससी ने हाल ही में प्रस्तावित मुख्य परीक्षा समेत अपनी नौ परीक्षाएँ स्थगित कर दी हैं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। सीआईडी की जाँच की दिशा से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।