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जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से मंगलवार को शुरू की पूछताछ

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जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से मंगलवार को शुरू की पूछताछ

सारांश

जेपीएससी भर्ती घोटाले में सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से पूछताछ शुरू की है। जांच का केंद्र ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा संचालन सौंपे जाने की परिस्थितियां हैं। अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और ख्यांगते पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 28 जुलाई को जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल.
ख्यांगते से औपचारिक पूछताछ शुरू की।
जांच का मुख्य फोकस ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा संचालन सौंपे जाने की परिस्थितियों पर है।
सीआईडी अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक भी शामिल हैं।
14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच जारी है।
ख्यांगते ने मार्च 2025 में पदभार संभाला था और सीआईडी छापेमारी के बाद इस्तीफा दे दिया; फिलहाल उन्हें आरोपी घोषित नहीं किया गया है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने 28 जुलाई को आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से औपचारिक पूछताछ शुरू की। सीआईडी के समन पर ख्यांगते निर्धारित समय पर जांच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में सामने आई व्यापक अनियमितताओं से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल किए जा रहे हैं।

पूछताछ का केंद्र-बिंदु

सूत्रों के अनुसार, सीआईडी की जांच का मुख्य फोकस परीक्षा संचालन से जुड़े निर्णयों और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के चयन की प्रक्रिया पर है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि पहले से ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल को किन परिस्थितियों में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई — फाइल किस स्तर पर आगे बढ़ी, अंतिम स्वीकृति किस आधार पर दी गई और तत्कालीन अध्यक्ष की इसमें क्या भूमिका रही।

सीआईडी यह भी जानना चाहती है कि क्या आयोग को टीडीपीएल के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों अथवा उसके ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी थी। यदि जानकारी थी, तो उसे जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई; और यदि नहीं थी, तो एजेंसी का सत्यापन किस प्रकार किया गया — ये दोनों पहलू जांचकर्ताओं के लिए अहम हैं।

परीक्षा प्रक्रिया की पड़ताल

पूछताछ के दौरान ओएमआर शीट की छपाई, सुरक्षित रखरखाव, परिवहन, मूल्यांकन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, अभ्यर्थियों के डेटा की सुरक्षा और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल किए जा रहे हैं। जांच अधिकारी यह भी जानना चाहते हैं कि इन प्रक्रियाओं की निगरानी आयोग के स्तर पर किस तरह होती थी और शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई की गई।

साक्ष्यों से मिलान की कवायद

सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बयान, जब्त दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों तथा आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों का मिलान ख्यांगते के जवाबों से करेगी। गौरतलब है कि सीआईडी अब तक टीडीपीएल से जुड़े कई लोगों और आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान आयोग और टीडीपीएल के कार्यालयों से भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज, ओएमआर शीट और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए थे।

ख्यांगते की पृष्ठभूमि और इस्तीफा

एल. ख्यांगते ने मार्च 2025 में जेपीएससी अध्यक्ष का पदभार संभाला था। हाल में सीआईडी की छापेमारी के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया और यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल सीआईडी ने उन्हें आरोपी घोषित नहीं किया है और उनसे पूछताछ जांच प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

आगे क्या होगा

जांच एजेंसी के अनुसार, आगे की कार्रवाई पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब देशभर में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यही जांच की असली कसौटी है। गौरतलब है कि देशभर में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, और हर बार जांच एजेंसियां गिरफ्तारियों तक तो पहुंचती हैं, लेकिन निर्णायक जवाबदेही तय करने में पिछड़ जाती हैं। ख्यांगते का स्वेच्छा से पद छोड़ना और पूछताछ में सहयोग का संकेत देना सकारात्मक है, पर असली परीक्षा यह होगी कि सीआईडी जब्त डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय-श्रृंखला को कहां तक उजागर कर पाती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी परीक्षा घोटाला क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं — विशेषकर 14वीं सिविल सेवा परीक्षा — में व्यापक अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा संचालन सौंपना, ओएमआर शीट की सुरक्षा में चूक और डेटा से जुड़ी गड़बड़ियां शामिल हैं। सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है और अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एल. ख्यांगते से पूछताछ क्यों हो रही है?
एल. ख्यांगते मार्च 2025 से जेपीएससी के अध्यक्ष थे और उनके कार्यकाल में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। सीआईडी उनसे इस निर्णय की प्रक्रिया, फाइल की मंजूरी और आयोग की प्रशासनिक भूमिका के बारे में सवाल कर रही है। फिलहाल उन्हें आरोपी घोषित नहीं किया गया है।
टीडीपीएल को ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद परीक्षा संचालन क्यों सौंपा गया?
यही सवाल सीआईडी की जांच के केंद्र में है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आयोग को टीडीपीएल के ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी थी और यदि थी तो जिम्मेदारी क्यों दी गई। एजेंसी के सत्यापन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
सीआईडी अब तक टीडीपीएल से जुड़े कई लोगों और आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान आयोग और टीडीपीएल के कार्यालयों से दस्तावेज, ओएमआर शीट और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
आगे की जांच में क्या होगा?
जांच एजेंसी के अनुसार, आगे की कार्रवाई ख्यांगते की पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। सीआईडी पहले गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों से ख्यांगते के जवाबों का मिलान करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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