जेपीएससी परीक्षा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, ₹2 करोड़ रिश्वत और 20% कमीशन के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और मेधा घोटाले की जाँच कर रही सीआईडी ने 10 अगस्त 2026 को सोमवार दोपहर निर्णायक कार्रवाई करते हुए आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को रांची से गिरफ्तार किया। जाँच एजेंसी के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने में नियमों की अनदेखी और कथित रिश्वतखोरी में खियांग्ते की सीधी भूमिका सामने आई है।
रिश्वत और कमीशन के आरोप
सीआईडी के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार हुए टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने पूछताछ में बताया कि खियांग्ते ने एजेंसी को ठेका दिलाने के एवज में कथित तौर पर करीब ₹2 करोड़ की रिश्वत ली और कुल सौदे का 20 प्रतिशत कमीशन वसूला। यह बयान जाँच का अहम आधार बना है।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को नामांकन से ठेका
जाँच में यह भी उजागर हुआ कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने टीडीपीएल को 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को खुली निविदा प्रक्रिया को दरकिनार कर नामांकन के आधार पर परीक्षा का काम सौंपा गया। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने इस नियुक्ति के विरुद्ध लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी और आयोग के शीर्ष अधिकारियों को एजेंसी के रिकॉर्ड की जानकारी भी दी थी, फिर भी निर्णय नहीं बदला गया।
खियांग्ते का पक्ष और सीआईडी की जाँच
पूछताछ के दौरान खियांग्ते ने अपने बचाव में कहा था कि ठेका चयन के समय एजेंसी के ब्लैकलिस्ट होने की आधिकारिक जानकारी आयोग को उपलब्ध नहीं थी और इसे उन्होंने प्रशासनिक चूक बताया। हालाँकि, सीआईडी ने उनके इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और गिरफ्तारी से पहले चार अलग-अलग दौर में 30 घंटे से अधिक की पूछताछ की। इससे पहले सीआईडी ने खियांग्ते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और कार्रवाई
सीआईडी इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य शामिल हैं। जाँच एजेंसी ने टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को भी सील कर दिया है।
आगे की जाँच
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और कथित समानांतर सिंडिकेट से कौन-कौन से अन्य अधिकारी और व्यक्ति जुड़े थे। यह मामला झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।