10 अगस्त 2026
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जेपीएससी परीक्षा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, ₹2 करोड़ रिश्वत और 20% कमीशन के आरोप

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जेपीएससी परीक्षा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, ₹2 करोड़ रिश्वत और 20% कमीशन के आरोप

सारांश

जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा परीक्षा घोटाले की जाँच अब आयोग के सर्वोच्च पद तक पहुँच गई है। सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया — ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को नामांकन से ठेका और ₹2 करोड़ रिश्वत के आरोप के साथ। 19 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं, जाँच का दायरा और बढ़ेगा।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल.
खियांग्ते को रांची से गिरफ्तार किया।
आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को खुली निविदा की बजाय नामांकन के आधार पर परीक्षा ठेका दिया गया।
मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान के अनुसार, खियांग्ते ने कथित तौर पर ₹2 करोड़ रिश्वत और 20% कमीशन लिया।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने टीडीपीएल को 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट किया था; तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई थी।
सीआईडी अब तक इस मामले में 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है; टीडीपीएल के रांची और लखनऊ कार्यालय सील।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और मेधा घोटाले की जाँच कर रही सीआईडी ने 10 अगस्त 2026 को सोमवार दोपहर निर्णायक कार्रवाई करते हुए आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को रांची से गिरफ्तार किया। जाँच एजेंसी के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने में नियमों की अनदेखी और कथित रिश्वतखोरी में खियांग्ते की सीधी भूमिका सामने आई है।

रिश्वत और कमीशन के आरोप

सीआईडी के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार हुए टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने पूछताछ में बताया कि खियांग्ते ने एजेंसी को ठेका दिलाने के एवज में कथित तौर पर करीब ₹2 करोड़ की रिश्वत ली और कुल सौदे का 20 प्रतिशत कमीशन वसूला। यह बयान जाँच का अहम आधार बना है।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को नामांकन से ठेका

जाँच में यह भी उजागर हुआ कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने टीडीपीएल को 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को खुली निविदा प्रक्रिया को दरकिनार कर नामांकन के आधार पर परीक्षा का काम सौंपा गया। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने इस नियुक्ति के विरुद्ध लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी और आयोग के शीर्ष अधिकारियों को एजेंसी के रिकॉर्ड की जानकारी भी दी थी, फिर भी निर्णय नहीं बदला गया।

खियांग्ते का पक्ष और सीआईडी की जाँच

पूछताछ के दौरान खियांग्ते ने अपने बचाव में कहा था कि ठेका चयन के समय एजेंसी के ब्लैकलिस्ट होने की आधिकारिक जानकारी आयोग को उपलब्ध नहीं थी और इसे उन्होंने प्रशासनिक चूक बताया। हालाँकि, सीआईडी ने उनके इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और गिरफ्तारी से पहले चार अलग-अलग दौर में 30 घंटे से अधिक की पूछताछ की। इससे पहले सीआईडी ने खियांग्ते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।

अब तक की गिरफ्तारियाँ और कार्रवाई

सीआईडी इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य शामिल हैं। जाँच एजेंसी ने टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को भी सील कर दिया है।

आगे की जाँच

सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और कथित समानांतर सिंडिकेट से कौन-कौन से अन्य अधिकारी और व्यक्ति जुड़े थे। यह मामला झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के बारे में लिखित आपत्ति दर्ज होने के बावजूद ठेका कैसे आगे बढ़ा — और किसके दबाव में। यह मामला केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत भ्रष्टता का नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणालीगत विफलता का है जहाँ आंतरिक जाँच तंत्र को दरकिनार किया गया। झारखंड में यह पहली बार नहीं है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हों — सवाल यह है कि क्या इस बार जाँच सिंडिकेट की पूरी परतें उघाड़ पाएगी या महज कुछ मोहरों पर कार्रवाई होकर रह जाएगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी परीक्षा घोटाले में एल. खियांग्ते को क्यों गिरफ्तार किया गया?
सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को 10 अगस्त 2026 को इस आरोप में गिरफ्तार किया कि उन्होंने ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का ठेका दिलाने के एवज में कथित तौर पर ₹2 करोड़ रिश्वत और 20% कमीशन लिया। एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर के बयान ने जाँच में यह कड़ी जोड़ी।
टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद ठेका कैसे मिला?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने टीडीपीएल को 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट किया था। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने इस पर लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बावजूद एजेंसी को खुली निविदा की बजाय नामांकन के आधार पर परीक्षा का काम दे दिया गया।
जेपीएससी मेधा घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
सीआईडी अब तक इस मामले में 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं।
सीआईडी ने इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई की है?
सीआईडी ने खियांग्ते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। टीडीपीएल के रांची और लखनऊ कार्यालयों को सील किया गया है और गिरफ्तारी से पहले खियांग्ते से चार दौर में 30 घंटे से अधिक पूछताछ हुई।
इस घोटाले की जाँच आगे किस दिशा में जाएगी?
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा गड़बड़ी और कथित समानांतर सिंडिकेट से कौन-कौन से अन्य अधिकारी जुड़े थे। जाँच का दायरा बढ़ने और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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