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जेपीएससी घोटाला: ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल को काम दिलाने में करोड़ों की कटमनी डील, पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते 30 घंटे पूछताछ में

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जेपीएससी घोटाला: ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल को काम दिलाने में करोड़ों की कटमनी डील, पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते 30 घंटे पूछताछ में

सारांश

जेपीएससी घोटाले में मास्टरमाइंड का कबूलनामा — ब्लैकलिस्टेड और अन्य राज्यों में प्रतिबंधित एजेंसी को बिना निविदा के ठेका देने के लिए करोड़ों की कटमनी डील हुई। परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियाँ दरकिनार कर दी गईं। पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते 30 घंटे की पूछताछ में 'प्रशासनिक चूक' का दावा कर रहे हैं।

मुख्य बातें

मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल को ठेका दिलाने के लिए शीर्ष स्तर पर करोड़ों रुपये की 'कटमनी डील' हुई थी।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 20 मई 2025 को ही टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट किया था; उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी एजेंसी प्रतिबंधित थी।
तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियों को नजरअंदाज कर बिना खुली निविदा के नामांकन आधार पर एजेंसी को काम सौंपा गया।
पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते से 4 चरणों में 30 घंटे से अधिक पूछताछ हो चुकी है।
अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार; टीडीपीएल के रांची और लखनऊ कार्यालय सील।
सीआईडी अब आयोग के वर्तमान सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में धांधली मामले की सीआईडी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि ब्लैकलिस्टेड वेंडर एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को परीक्षा का ठेका दिलाने के लिए शीर्ष स्तर पर करोड़ों रुपये की 'कटमनी डील' की गई थी। इस खुलासे के बाद जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध मानी जा रही है।

मास्टरमाइंड का कबूलनामा

सीआईडी की हिरासत में अभय कुमार तिवारी ने बताया कि नियमों को दरकिनार कर टीडीपीएल का चयन करने के लिए उच्च स्तर पर वित्तीय सौदेबाजी हुई थी। तिवारी को इस पूरे रैकेट का सूत्रधार माना जा रहा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह डील इतनी प्रभावशाली थी कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को बिना निविदा के ठेका

तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने आयोग के शीर्ष नेतृत्व को टीडीपीएल के खराब रिकॉर्ड से आगाह किया था। उन्होंने अपनी लिखित आपत्ति में स्पष्ट किया था कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने अनुबंध शर्तों के उल्लंघन के कारण 20 मई 2025 को ही इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट और डि-लिस्ट कर दिया था। इसके अतिरिक्त, टीडीपीएल उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी धांधली के आरोपों में प्रतिबंधित थी। इन सब चेतावनियों के बावजूद, तत्कालीन चेयरमैन के स्तर से बिना किसी खुली निविदा प्रक्रिया के सीधे नामांकन (नॉमिनेशन) आधार पर टीडीपीएल को परीक्षा का संवेदनशील कार्य सौंप दिया गया।

पूर्व चेयरमैन की भूमिका और पूछताछ

सीआईडी की टीम पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से चार अलग-अलग चरणों में 30 घंटे से अधिक की गहन पूछताछ कर चुकी है। पूछताछ में खियांग्ते ने अपना बचाव करते हुए दावा किया कि एजेंसी के चयन के समय आयोग को उसके ब्लैकलिस्टेड होने की आधिकारिक जानकारी नहीं थी और उन्होंने पूरे मामले को एक 'प्रशासनिक चूक' बताया। हालांकि, जांचकर्ता इस दावे को परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियों के आलोक में संदिग्ध मान रहे हैं।

अब तक 19 गिरफ्तारियाँ, दफ्तर सील

सीआईडी ने टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को सील कर दिया है। इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मास्टरमाइंड अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं।

जांच का दायरा बढ़ा

सीआईडी अब आयोग के वर्तमान सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस समानांतर सिंडिकेट को संचालित करने में और कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे। जांच के दायरे का यह विस्तार संकेत देता है कि मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें संस्थागत मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लिखित आपत्तियों के बावजूद, बिना निविदा के संवेदनशील सरकारी काम पा जाती है। पूर्व मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी का 'प्रशासनिक चूक' का बचाव उस समय कमज़ोर पड़ जाता है जब रिकॉर्ड में लिखित चेतावनियाँ मौजूद हों। असली सवाल यह है कि कटमनी की यह कथित डील किस स्तर तक गई और क्या वर्तमान सदस्यों की संलिप्तता की जांच पूरी पारदर्शिता से होगी। झारखंड में सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता दांव पर है — और यह पहला मामला नहीं है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी भर्ती घोटाले में 'कटमनी डील' क्या है?
मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल को जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का ठेका दिलाने के लिए शीर्ष स्तर पर करोड़ों रुपये की वित्तीय सौदेबाजी हुई थी। इसी के तहत नियमों और लिखित आपत्तियों को दरकिनार कर बिना खुली निविदा के एजेंसी का चयन किया गया।
टीडीपीएल को ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद काम कैसे मिला?
जांच के अनुसार, तत्कालीन चेयरमैन के स्तर से बिना किसी खुली निविदा प्रक्रिया के सीधे नामांकन आधार पर टीडीपीएल को काम सौंपा गया। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की लिखित आपत्ति दी थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते का इस मामले में क्या कहना है?
एल खियांग्ते ने सीआईडी पूछताछ में दावा किया कि एजेंसी के चयन के समय आयोग को उसके ब्लैकलिस्टेड होने की आधिकारिक जानकारी नहीं थी और उन्होंने इसे 'प्रशासनिक चूक' बताया। हालांकि, परीक्षा नियंत्रक की लिखित आपत्तियाँ इस दावे को कमज़ोर करती हैं।
इस घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मास्टरमाइंड अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं। टीडीपीएल के रांची और लखनऊ कार्यालय सील कर दिए गए हैं।
सीआईडी जांच आगे किस दिशा में जा रही है?
सीआईडी अब जेपीएससी के वर्तमान सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे। जांच का यह विस्तार संकेत देता है कि एजेंसी संस्थागत मिलीभगत की संभावना को भी खंगाल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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