7 अगस्त 2026
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जेपीएससी गड़बड़ी: मुख्य आरोपी अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय हिरासत में, करोड़ों की संपत्तियों की जांच शुरू

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जेपीएससी गड़बड़ी: मुख्य आरोपी अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय हिरासत में, करोड़ों की संपत्तियों की जांच शुरू

सारांश

जेपीएससी परीक्षा धांधली में सीआईडी की जांच अब आरोपी के परिवार तक पहुंची — ससुर हिरासत में, दोनों साले फरार और संभवतः विदेश में। देवघर अस्पताल से लेकर रांची के फ्लैट तक, करोड़ों की संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल शुरू। ओएमआर हेरफेर सिंडिकेट की जड़ें सरकारी पदों तक फैली होने के संकेत।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 7 अगस्त को गिरिडीह के हथबोर गांव में छापेमारी कर मुख्य आरोपी अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय को हिरासत में लिया।
विकास पांडेय स्थानीय सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षक हैं; उनके दोनों पुत्र (अभय के साले) समन के बाद से फरार हैं।
जांच एजेंसियों को संदेह — दोनों फरार साले विदेश भाग चुके हैं ; यात्रा दस्तावेजों की पड़ताल जारी।
देवघर में निर्माणाधीन अस्पताल, रांची में जमीनें, तीन लग्जरी फ्लैट और अन्य संपत्तियों के वित्तीय स्रोतों की जांच।
अभय तिवारी दुमका में मार्केटिंग ऑफिसर था; उसकी पत्नी रांची में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर तैनात।
सीआईडी को जेपीएससी और जेपीएससी सीजीएल परीक्षाओं में ओएमआर शीट हेरफेर के बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने का संदेह।

14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सर्विस परीक्षा में धांधली और अभ्यर्थियों से अवैध वसूली के मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम ने 7 अगस्त को अपनी कार्रवाई और तेज कर दी। गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र स्थित हथबोर गांव में छापेमारी कर मामले के मुख्य आरोपी मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

हिरासत और पूछताछ का घटनाक्रम

सीआईडी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने हथबोर स्थित आवास पर विकास पांडेय से घंटों गहन पूछताछ की। विकास पांडेय स्थानीय सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। पूछताछ के बाद उन्हें आगे की जांच के लिए अपने साथ ले जाया गया।

फरार साले और यात्रा दस्तावेजों की पड़ताल

जांच एजेंसी मुख्य रूप से अभय तिवारी के दोनों साले — जो विकास पांडेय के पुत्र हैं — की भूमिका और उनके ठिकानों की पड़ताल कर रही है। सीआईडी ने दोनों को पूछताछ के लिए समन जारी किया था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद से वे फरार हैं। जांच अधिकारियों को संदेह है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए वे विदेश भाग चुके हैं, जिसकी पुष्टि के लिए उनके यात्रा दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

करोड़ों की संपत्तियों की वित्तीय जांच

सीआईडी के साथ-साथ वित्तीय खुफिया शाखा ने आरोपी परिवार की अचल संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की गहन जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, निम्नलिखित संपत्तियों के वित्तीय स्रोतों की पड़ताल हो रही है:

देवघर में निर्माणाधीन करोड़ों रुपये का अस्पताल, रांची में खरीदी गई जमीनें, तीन लग्जरी फ्लैट और गिरिडीह समेत अन्य जिलों में मौजूद संपत्तियां। जांच टीम यह पता लगा रही है कि इन संपत्तियों के निर्माण व खरीद में इस्तेमाल धन किस माध्यम से आया और क्या यह आय के वैध स्रोतों से मेल खाता है।

परिवार के सदस्यों के सरकारी पद

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी परिवार के कई सदस्यों के महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर तैनात होने की जानकारी सामने आई है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी दुमका के पोड़ैयाहाट में मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था और उसने 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा भी पास की है। उसकी पत्नी रांची में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर तैनात है। परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के भी विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होने की जानकारी मिली है, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

सिंडिकेट का खुलासा और आगे की कार्रवाई

सीआईडी का मानना है कि जेपीएससी और जेपीएससी सीजीएल जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर ओएमआर शीट में हेरफेर और 'सेटिंग' का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था। यदि वित्तीय जांच में आय से अधिक संपत्ति और अवैध लेनदेन के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई और प्रभावशाली लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह दर्शाता है कि यह महज एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पारिवारिक-प्रशासनिक नेटवर्क हो सकता है। परिवार के कई सदस्यों का एक साथ विभिन्न सरकारी पदों पर चयनित होना और करोड़ों की संपत्तियों का अर्जन — ये संयोग नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत विफलता के संकेत हैं। असली सवाल यह है कि जेपीएससी जैसी संस्था में ओएमआर हेरफेर का यह सिंडिकेट कितने वर्षों से सक्रिय था और इसकी जड़ें कहाँ तक फैली हैं — जांच की विश्वसनीयता इसी बात पर टिकी है कि क्या केवल निचले स्तर के आरोपियों तक सिमटती है या ऊपर तक पहुंचती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय को क्यों हिरासत में लिया गया?
सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले की जांच के तहत विकास पांडेय को गिरिडीह के हथबोर गांव से हिरासत में लिया। वे मुख्य आरोपी अभय तिवारी के ससुर हैं और उनके पुत्रों (अभय के साले) की संदिग्ध भूमिका की पड़ताल के सिलसिले में उनसे घंटों पूछताछ की गई।
14वीं जेपीएससी परीक्षा धांधली मामला क्या है?
14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सर्विस परीक्षा में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर ओएमआर शीट में हेरफेर और 'सेटिंग' करने का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था। सीआईडी इस मामले में मुख्य आरोपी अभय तिवारी और उससे जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है।
अभय तिवारी के साले फरार क्यों हैं और क्या वे विदेश भाग गए हैं?
सीआईडी ने अभय तिवारी के दोनों साले को पूछताछ के लिए समन जारी किया था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद से वे फरार हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए विदेश भाग गए हैं, जिसकी पुष्टि के लिए उनके यात्रा दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच में किन संपत्तियों की पड़ताल हो रही है?
सीआईडी और वित्तीय खुफिया शाखा देवघर में निर्माणाधीन करोड़ों रुपये के अस्पताल, रांची में खरीदी गई जमीनें, तीन लग्जरी फ्लैट और गिरिडीह समेत अन्य जिलों में मौजूद संपत्तियों के वित्तीय स्रोतों की जांच कर रही है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये संपत्तियां वैध आय से खरीदी गईं या नहीं।
अभय तिवारी और उसके परिवार के सदस्य किन सरकारी पदों पर थे?
अभय तिवारी दुमका के पोड़ैयाहाट में मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था और उसने 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा भी पास की है। उसकी पत्नी रांची में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर तैनात है। परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी पदों पर चयनित हुए बताए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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