केपीएससी नौकरी घोटाला: ईडी ने कर्नाटक-अहमदाबाद में 21 और कोझिकोड में 8 जगहों पर मारे छापे
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के तहत कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसी दिन एक अलग मामले में केरल के कोझिकोड में 8 स्थानों पर भी छापेमारी की गई।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत यह तलाशी और जब्ती कार्रवाई की। छापेमारी की गई जगहों में केपीएससी कार्यालय, निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर, कथित बिचौलिए, परीक्षा पेपरों के डिजिटल मूल्यांकन की जिम्मेदार कंपनी मेसर्स एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का दफ्तर और पशु चिकित्सा अधिकारी (वेटनरी ऑफिसर) पद के लिए चयनित उम्मीदवारों के परिसर शामिल हैं।
ये 21 ठिकाने बेंगलुरु, हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी, बेलगावी और अहमदाबाद में फैले हुए हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के अंतिम चयन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। जाँच एजेंसी के अनुसार, कथित बिचौलियों ने शिकायतकर्ता समेत कई उम्मीदवारों से संपर्क कर प्रति उम्मीदवार ₹70 लाख से ₹80 लाख तक की रिश्वत माँगी।
शिकायतकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में इन बिचौलियों की ऑडियो रिकॉर्डिंग स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण (एलईए) को सौंपी हैं। एलईए के समक्ष दर्ज शिकायतों में पेपर लीक, ओएमआर आंसर शीट से छेड़छाड़ और केपीएससी अधिकारियों के रिश्तेदारों को अनुचित तरीके से अंतिम चयन सूची में शामिल करने के आरोप भी हैं।
कोझिकोड में समानांतर छापेमारी
उसी दिन केरल के कोझिकोड में 8 ठिकानों पर की गई तलाशी सीएमआरएल ग्रुप के खिलाफ 27 मई 2026 को की गई पूर्व छापेमारी का अगला चरण है। मई की कार्रवाई के दौरान एक पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी वीणा से जुड़े मनी ट्रेल के नए साक्ष्य मिले थे। अधिकारियों के अनुसार, इस मनी ट्रेल से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भी जाँच जारी है।
आम जनता और उम्मीदवारों पर असर
यह घोटाला उन हजारों उम्मीदवारों को प्रभावित करता है जिन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारी और अन्य सरकारी पदों के लिए वर्षों तैयारी की। आलोचकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में इस स्तर की गड़बड़ी सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि केपीएससी पहले भी विवादों में रह चुका है, और यह जाँच उस लंबी श्रृंखला की एक और कड़ी है।
क्या होगा आगे
ईडी की तलाशी में मिले दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच जारी है। निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोझिकोड में सीएमआरएल मामले में भी आगे की कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है।