29 सितंबर 2026
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केपीएससी घोटाला: मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिन की ईडी कस्टडी, ₹12 करोड़ से अधिक की वसूली का आरोप

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केपीएससी घोटाला: मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिन की ईडी कस्टडी, ₹12 करोड़ से अधिक की वसूली का आरोप

सारांश

केपीएससी भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा गया। ₹12 करोड़ से अधिक की कथित वसूली, बेनामी खाते और पेपर लीक के आरोपों के साथ यह मामला कर्नाटक की तीन जाँच एजेंसियों की जद में है — और सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक बारूद बन चुका है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु की चौथी सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को बसवराज कन्नाले को 14 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा।
निलंबित आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार पर परीक्षा से एक दिन पहले वेटनरी ऑफिसर का पेपर लीक करने का आरोप; वे भी ईडी कस्टडी में।
कन्नाले पर उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹12 करोड़ से अधिक वसूली का आरोप; प्रत्येक पोस्ट के लिए ₹70–90 लाख ।
बेनामी बैंक खाते में ₹1.86 करोड़ , ₹23 लाख का डायमंड नेकलेस और 65 फ्लाइट टिकट भी जाँच के दायरे में।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को डीजीपी आलोक कुमार की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय एसआईटी गठित की; रिपोर्ट के लिए 100 दिन की समय सीमा।
सीएम डीके शिवकुमार ने केपीएससी बंद करने के विकल्प पर कानूनी सलाह लेने की बात कही; साथ ही एसआईटी आदेश के विरुद्ध अपील का भी संकेत।

बेंगलुरु की चौथी सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (केपीएससी) के कथित भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कस्टडी में भेज दिया। यह मामला वेटनरी अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर पेपर लीक और बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी अधिकारियों ने कन्नाले को कोर्ट में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए कस्टडी की माँग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसी मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी और केपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार — जिन्हें सीआईडी ने पहले गिरफ्तार किया था — भी अभी ईडी की कस्टडी में हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, गंगवार ने स्वीकार किया है कि उन्होंने परीक्षा से एक दिन पहले वेटनरी ऑफिसर का प्रश्नपत्र कन्नाले को लीक किया था।

वित्तीय अनियमितताएँ

जाँच में सामने आए दस्तावेज़ों के अनुसार, कन्नाले ने उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹12 करोड़ से अधिक की रकम वसूली, जिसमें प्रत्येक पोस्ट के लिए ₹70 लाख से ₹90 लाख लिए गए। गंगवार को सीधे ₹1.3 करोड़ नकद दिए गए बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा, ₹23 लाख का हीरे का हार सहित महँगे आभूषण और अधिकारी व उनके एक परिचित के लिए 65 फ्लाइट टिकट का खर्च भी उठाया गया था। जाँच में एक बेनामी बैंक खाते का भी पता चला है, जिसमें ₹1.86 करोड़ जमा थे।

न्यायिक और जाँच एजेंसियों की भूमिका

21 सितंबर 2026 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केपीएससी भर्तियों में हेरफेर को 'संविधान के साथ धोखाधड़ी' करार दिया और नए सिरे से जाँच का आदेश दिया। अदालत ने डीजीपी आलोक कुमार की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिसे 100 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।

यह घोटाला अब एक साथ तीन एजेंसियों — एसआईटी, सीआईडी और ईडी — की जाँच के दायरे में है, जो इसकी गंभीरता और जटिलता को दर्शाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अवैध भर्तियों को लेकर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने दावा किया है कि इस घोटाले में कई मंत्रियों को जेल हो सकती है।

विपक्षी दलों ने केपीएससी को व्यंग्य में 'कर्नाटक प्राइवेट कमीशन' का नाम दे दिया है और जवाबदेही की माँग की है।

सरकार का रुख और आगे की राह

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार केपीएससी को बंद करने के विकल्प पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। उन्होंने कहा कि 'वहाँ चोर बैठे हैं' और अवैध गतिविधियों ने कमीशन की साख को गहरा नुकसान पहुँचाया है।

हालाँकि, उल्लेखनीय है कि शिवकुमार ने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार एसआईटी गठन के उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील करेगी, क्योंकि वे इसे न्यायिक दखलंदाजी मानते हैं — यह एक विरोधाभासी रुख है जो विपक्ष को और मुद्दा देता है। आने वाले हफ्तों में तीनों जाँच एजेंसियों के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही सरकार का रुख विरोधाभासी होता जा रहा है — एक तरफ मुख्यमंत्री शिवकुमार कमीशन बंद करने की बात करते हैं, दूसरी तरफ उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी के आदेश को चुनौती देने की तैयारी है। यह विरोधाभास पूछता है: क्या सरकार जवाबदेही चाहती है या सिर्फ कथा पर नियंत्रण? ₹12 करोड़ से अधिक की वसूली और बेनामी संपत्तियाँ बताती हैं कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था की विफलता है — और तीन एजेंसियों की एक साथ जाँच यही संकेत देती है कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया में भरोसे की बुनियादी दीवार दरक चुकी है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी घोटाला क्या है और इसमें बसवराज कन्नाले की क्या भूमिका है?
केपीएससी घोटाला कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन में वेटनरी अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी का मामला है। बसवराज कन्नाले पर आरोप है कि उन्होंने उम्मीदवारों से ₹12 करोड़ से अधिक वसूले और लीक हुए प्रश्नपत्र प्राप्त किए।
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार पर क्या आरोप हैं?
निलंबित आईएएस अधिकारी और केपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से एक दिन पहले वेटनरी ऑफिसर का प्रश्नपत्र कन्नाले को लीक किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें सीधे ₹1.3 करोड़ नकद, महँगे आभूषण और 65 फ्लाइट टिकट दिए गए।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कदम उठाया?
21 सितंबर 2026 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केपीएससी भर्तियों में हेरफेर को 'संविधान के साथ धोखाधड़ी' करार दिया। अदालत ने डीजीपी आलोक कुमार की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय एसआईटी गठित की और 100 दिन में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
इस मामले में कौन-सी जाँच एजेंसियाँ काम कर रही हैं?
इस घोटाले की जाँच एक साथ तीन एजेंसियाँ कर रही हैं — उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी, सीआईडी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)। तीनों एजेंसियों की एक साथ सक्रियता मामले की गंभीरता और व्यापक आर्थिक अनियमितताओं को दर्शाती है।
केपीएससी घोटाले का राजनीतिक असर क्या है?
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधा है, जबकि BJP नेताओं ने कई मंत्रियों की गिरफ्तारी का दावा किया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केपीएससी बंद करने की बात कही, लेकिन एसआईटी आदेश के खिलाफ अपील का संकेत देकर विरोधाभासी रुख भी अपनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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