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केपीएससी पेपर लीक घोटाला: ₹1.5 करोड़ के लेन-देन का खुलासा, IAS अधिकारी समेत 29 उम्मीदवार आरोपी

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केपीएससी पेपर लीक घोटाला: ₹1.5 करोड़ के लेन-देन का खुलासा, IAS अधिकारी समेत 29 उम्मीदवार आरोपी

सारांश

केपीएससी पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा घोटाले में ₹1.5 करोड़ के लेन-देन का खुलासा हुआ है। एक IAS अधिकारी समेत 29 उम्मीदवार आरोपी बनाए गए हैं, ₹1.40 करोड़ फ्रीज किए गए हैं और हीरे के हार की खरीद का आरोप घोटाले को नया मोड़ दे रहा है।

मुख्य बातें

केपीएससी पेपर लीक मामले में ₹92 लाख बैंक ट्रांसफर और ₹60 लाख नकद — कुल ₹1.5 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता चला।
पूर्व परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 29 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ किए गए 40 में से 29 उम्मीदवारों को आरोपी बनाया गया; देवनहल्ली के पास तीन विला में कोचिंग का आरोप।
खाते में मौजूद ₹1.40 करोड़ फ्रीज ; ₹5.76 लाख नकद जब्त; ₹22 लाख से कथित तौर पर हीरे का हार खरीदा गया।
पूर्व केपीएससी प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार और पूर्व सदस्य शांता होसामनी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी।
गंगवार की जमानत याचिका पर 22 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित।

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया है कि इस घोटाले में बैंक ट्रांसफर के ज़रिए करीब ₹92 लाख और उम्मीदवारों से नकद ₹60 लाख — कुल मिलाकर लगभग ₹1.5 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। 8 जनवरी 2026 को हुई इस परीक्षा की चयन सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया था, जो अब एक बड़े भ्रष्टाचार कांड में तब्दील हो चुका है।

घोटाले का मुख्य घटनाक्रम

केपीएससी ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए 8 जनवरी 2026 को परीक्षा आयोजित की थी। जब 17 जुलाई 2026 को अंतिम चयन सूची जारी हुई, तो आरोप उठे कि बिचौलियों के ज़रिए ₹80 लाख से ₹1 करोड़ में सीटें बेची जा रही थीं। इसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर उठी, जिसके चलते केपीएससी को चयन सूची रोकनी पड़ी। कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, जिसने कई एफआईआर दर्ज कर कुछ बिचौलियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारियाँ और आरोप

जांचकर्ताओं ने 29 अगस्त 2026 को पूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया। इसके दो दिन बाद 31 अगस्त को बिचौलिये बसवराज कन्नाले को भी हिरासत में लिया गया। अब तक पूछताछ किए गए 40 उम्मीदवारों में से 29 को आरोपी बनाया जा चुका है।

पुलिस का आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रत्येक पेपर के लिए 60 से 80 सवाल पहले से उपलब्ध कराए गए और देवनहल्ली के पास तीन विला में उन्हें विशेष कोचिंग दी गई।

धन का प्रवाह और जब्ती

जांचकर्ताओं के अनुसार, अधिकांश लेन-देन ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक, तिलकवाड़ी और कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते के ज़रिए हुआ। इस राशि में से कथित तौर पर ₹22 लाख से गंगवार के एक मित्र के लिए हीरे का हार खरीदा गया। संबंधित खाते में मौजूद करीब ₹1.40 करोड़ फ्रीज कर दिए गए हैं और ₹5.76 लाख नकद जब्त किए गए हैं।

लुकआउट नोटिस और जमानत याचिकाएँ

केपीएससी के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और संबंधित बैंक पदाधिकारियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं। साहूकार, कन्नाले और संदिग्ध उम्मीदवारों की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं। गिरफ्तार IAS अधिकारी गंगवार की जमानत याचिका पर 22 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।

आगे की राह

यह घोटाला कर्नाटक में सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस चल रही है। अदालती कार्यवाही और जांच की दिशा आने वाले हफ्तों में इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक बैंक और बिचौलियों का नेटवर्क मिलकर सार्वजनिक सेवा भर्ती को बाज़ार में तब्दील कर देता है। हीरे के हार की खरीद और कोचिंग विला का विवरण बताता है कि यह सुनियोजित और दीर्घकालिक व्यवस्था थी, न कि कोई तात्कालिक चूक। असली सवाल यह है कि केपीएससी की निगरानी संरचना में वे कौन-से छिद्र थे जिनसे यह संभव हो सका — और क्या राज्य सरकार केवल गिरफ्तारियों से संतुष्ट होगी, या संस्थागत सुधार की दिशा में ठोस कदम भी उठाएगी।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी पेपर लीक घोटाला क्या है?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग द्वारा 8 जनवरी 2026 को आयोजित 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा का पेपर कथित तौर पर लीक किया गया और उम्मीदवारों को ₹80 लाख से ₹1 करोड़ में सीटें बेची गईं। 17 जुलाई को चयन सूची जारी होने के बाद विवाद सार्वजनिक हुआ और राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
इस घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
IAS अधिकारी और पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 29 अगस्त 2026 को और बिचौलिये बसवराज कन्नाले को 31 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा पूछताछ किए गए 40 उम्मीदवारों में से 29 को आरोपी बनाया गया है।
₹1.5 करोड़ का पैसा कैसे ट्रांसफर किया गया?
जांचकर्ताओं के अनुसार अधिकांश लेन-देन ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक, तिलकवाड़ी और कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते के ज़रिए हुआ। ₹92 लाख बैंक ट्रांसफर से और ₹60 लाख नकद के रूप में मिले; इसमें से ₹22 लाख से कथित तौर पर हीरे का हार खरीदा गया।
केपीएससी के पूर्व प्रमुख के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
केपीएससी के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और संबंधित बैंक पदाधिकारियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं। साहूकार और कन्नाले की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
गिरफ्तार IAS अधिकारी गंगवार की जमानत याचिका पर 22 सितंबर 2026 को अदालत में सुनवाई होनी है। सीआईडी की जांच जारी है और ₹1.40 करोड़ फ्रीज किए गए खाते व जब्त संपत्तियों के आधार पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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