केपीएससी पेपर लीक घोटाला: ₹1.5 करोड़ के लेन-देन का खुलासा, IAS अधिकारी समेत 29 उम्मीदवार आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया है कि इस घोटाले में बैंक ट्रांसफर के ज़रिए करीब ₹92 लाख और उम्मीदवारों से नकद ₹60 लाख — कुल मिलाकर लगभग ₹1.5 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। 8 जनवरी 2026 को हुई इस परीक्षा की चयन सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया था, जो अब एक बड़े भ्रष्टाचार कांड में तब्दील हो चुका है।
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम
केपीएससी ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए 8 जनवरी 2026 को परीक्षा आयोजित की थी। जब 17 जुलाई 2026 को अंतिम चयन सूची जारी हुई, तो आरोप उठे कि बिचौलियों के ज़रिए ₹80 लाख से ₹1 करोड़ में सीटें बेची जा रही थीं। इसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर उठी, जिसके चलते केपीएससी को चयन सूची रोकनी पड़ी। कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, जिसने कई एफआईआर दर्ज कर कुछ बिचौलियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारियाँ और आरोप
जांचकर्ताओं ने 29 अगस्त 2026 को पूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया। इसके दो दिन बाद 31 अगस्त को बिचौलिये बसवराज कन्नाले को भी हिरासत में लिया गया। अब तक पूछताछ किए गए 40 उम्मीदवारों में से 29 को आरोपी बनाया जा चुका है।
पुलिस का आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रत्येक पेपर के लिए 60 से 80 सवाल पहले से उपलब्ध कराए गए और देवनहल्ली के पास तीन विला में उन्हें विशेष कोचिंग दी गई।
धन का प्रवाह और जब्ती
जांचकर्ताओं के अनुसार, अधिकांश लेन-देन ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक, तिलकवाड़ी और कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते के ज़रिए हुआ। इस राशि में से कथित तौर पर ₹22 लाख से गंगवार के एक मित्र के लिए हीरे का हार खरीदा गया। संबंधित खाते में मौजूद करीब ₹1.40 करोड़ फ्रीज कर दिए गए हैं और ₹5.76 लाख नकद जब्त किए गए हैं।
लुकआउट नोटिस और जमानत याचिकाएँ
केपीएससी के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और संबंधित बैंक पदाधिकारियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं। साहूकार, कन्नाले और संदिग्ध उम्मीदवारों की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं। गिरफ्तार IAS अधिकारी गंगवार की जमानत याचिका पर 22 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।
आगे की राह
यह घोटाला कर्नाटक में सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस चल रही है। अदालती कार्यवाही और जांच की दिशा आने वाले हफ्तों में इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट करेगी।