केपीएससी भर्ती घोटाला: ईडी जांच में खुलासा — रिजॉर्ट-विला में लीक पेपर, ₹50 लाख तक रिश्वत, 4 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के कथित भर्ती घोटाले की जांच में चौंकाने वाले ब्यौरे सार्वजनिक किए, जिनके अनुसार बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में स्थित रिजॉर्ट और एयरबीएनबी विला में कथित तौर पर रिश्वत देने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा से एक रात पहले बुलाकर 80 प्रश्नों के सही उत्तर याद कराए गए। 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़े इस कथित 'कैश-फॉर-सेलेक्शन' रैकेट में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
रिजॉर्ट में 'प्रशिक्षण' का पूरा तंत्र
ईडी के अनुसार, परीक्षा से एक दिन पहले कथित तौर पर 10 सफल उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिजॉर्ट या एयरबीएनबी विला में ले जाया गया। वहाँ उन्हें 80 प्रश्नों के सही विकल्प सहित लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और उत्तरों का अभ्यास कर उन्हें कंठस्थ करने को कहा गया।
एजेंसी के दावे के अनुसार, यह लीक सामग्री तत्कालीन केपीएससी परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने अपने कथित करीबी सहयोगी भाजपा नेता बसवराज कन्नाले के माध्यम से लीक की थी। इसी सामग्री को 10 उम्मीदवारों तक पहुँचाया गया।
1:3 मेरिट सूची का कथित दुरुपयोग
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है — केपीएससी के कुछ सदस्यों और अधिकारियों ने कथित तौर पर 1:3 मेरिट सूची से जुड़ी गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग किया। गौरतलब है कि केपीएससी सामान्यतः इस सूची में व्यक्तिगत उम्मीदवारों के अंक सार्वजनिक नहीं करता।
ईडी के अनुसार, कुछ सदस्यों और अधिकारियों ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से उम्मीदवारों की गोपनीय मेरिट स्थिति हासिल कर उनके अंतिम चयन की संभावनाओं का विश्लेषण किया। इसके बाद उन उम्मीदवारों से संपर्क कर अवैध रकम के बदले चयन का कथित आश्वासन दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पद की प्रकृति और स्तर के आधार पर ₹10 लाख से ₹50 लाख तक की रिश्वत माँगी जाती थी।
गिरफ्तारियाँ और अदालती कार्रवाई
ईडी ने बताया कि ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 18 सितंबर और बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। विशेष अदालत ने दोनों को 14 दिन की ईडी हिरासत में भेजा था; इसके बाद गंगवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसके अलावा, निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार और केपीएससी सदस्य बी.वी. गीता को भी गिरफ्तार किया गया है। 7 अक्टूबर को दोनों को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत (सीसीएच-4) में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें आगे की जांच के लिए 14 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। यह कार्रवाई विधान सौधा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई।
जांच के दौरान एक सफल उम्मीदवार के पास से ₹80 लाख के ब्लैंक हस्ताक्षरित चेक और हस्ताक्षरित खाली प्रोमिसरी नोट भी बरामद किए गए। कन्नाले ने कथित तौर पर प्रत्येक उम्मीदवार से ₹40 लाख से ₹50 लाख तक की रिश्वत ली।
आम उम्मीदवारों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है और लाखों युवा वर्षों की तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में बैठते हैं। अगर ईडी के दावे सही साबित होते हैं, तो इस घोटाले ने न सिर्फ योग्य उम्मीदवारों का हक मारा, बल्कि एक संवैधानिक संस्था की साख को भी गहरी चोट पहुँचाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1:3 मेरिट सूची की गोपनीय जानकारी का कथित दुरुपयोग इस घोटाले को और अधिक सुनियोजित और खतरनाक बनाता है, क्योंकि इससे 'लक्षित शिकार' की पहचान पहले से संभव हो गई।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि भर्ती में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, रिश्वतखोरी और अपराध से अर्जित धन से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है। पूछताछ के दौरान गंगवार ने केपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में कथित अनियमितताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने का दावा किया है, जिसके आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।