केपीएससी भर्ती घोटाला: सीआईडी ने सौंपी रिपोर्ट, ₹1.5 करोड़ कैश ट्रेल और ओएमआर हेरफेर उजागर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती घोटाले में सीआईडी ने अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंप दी है। अधिकारियों ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी। रिपोर्ट में ₹1.5 करोड़ से अधिक की नकद राशि का पता लगाया गया है, साथ ही ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर और बिचौलियों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का पूरा ब्यौरा सामने आया है।
घोटाले की पूरी पृष्ठभूमि
यह मामला 400 पशु चिकित्सा अधिकारी (वेटरनरी ऑफिसर) पदों की भर्ती से जुड़ा है, जो केपीएससी के माध्यम से आयोजित की गई थी। परीक्षा परिणाम आने के बाद प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर और उम्मीदवारों से बड़ी रकम वसूली के आरोप सामने आए। इसके बाद सीआईडी ने जांच की शुरुआत की थी।
गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक में सार्वजनिक भर्ती प्रणाली में भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के बीच सामने आया है। बेंगलुरु स्थित इस आयोग पर अब न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जवाबदेही का दबाव है।
कैश ट्रेल और जब्त संपत्ति
सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बसवराज कनाले की इस घोटाले में केंद्रीय भूमिका रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार, कनाले ने उम्मीदवारों को वेटरनरी ऑफिसर पद दिलाने का वादा करके उनसे नकद राशि वसूली।
कम से कम तीन उम्मीदवारों ने बसवराज कनाले को ₹60 लाख नकद दिए — किरण गौड़ा ने ₹10 लाख, मोहम्मद सोहेल ने ₹20 लाख और सलीम ओंती ने ₹30 लाख दिए। एजेंसी ने कनाले के पास से ₹5.60 लाख नकद भी जब्त किए हैं।
बैंक खातों की जांच में ओम लक्ष्मी सौहार्द को-ऑपरेटिव बैंक के एक खाते में ₹64 लाख, कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में ₹5.2 लाख और कनाले की पत्नी के खाते में करीब ₹71 लाख मिले। अलग-अलग खातों में ट्रेस या फ्रीज की गई कुल राशि लगभग ₹1.5 करोड़ आंकी गई है। इसके अतिरिक्त, करीब ₹22 लाख मूल्य के सोने और हीरे के गहने भी बरामद किए गए हैं।
आईएएस अधिकारी की भूमिका
सीआईडी रिपोर्ट में जेल में बंद आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की भूमिका का भी उल्लेख है, जो केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्य कर चुके हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, उन पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर करने में सहायता की।
जांच में यह भी सामने आया है कि ज्ञानेंद्र कुमार ने अपनी एक महिला मित्र को करीब ₹20 लाख के गहने दिए थे। यह लेन-देन भी जांचकर्ताओं द्वारा तैयार किए जा रहे वित्तीय ट्रेल का हिस्सा माना जा रहा है।
बिचौलियों का नेटवर्क
सीआईडी ने बसवराज कनाले समेत पाँच बिचौलियों की पहचान की है, जिन पर भर्ती घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। जांचकर्ता यह पड़ताल कर रहे हैं कि किस प्रकार इन बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया, उनसे रकम वसूली और परीक्षा से संबंधित सामग्री तक पहुँच बनाई।
एसआईटी को सौंपी गई जांच, हाईकोर्ट का निर्देश
कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद इस जांच को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया गया है। उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार के नेतृत्व वाली एसआईटी को 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। सीआईडी को मामले के सभी रिकॉर्ड एसआईटी को हस्तांतरित करने के लिए कहा गया है।
यह मामला यहीं नहीं रुकता — एसआईटी की रिपोर्ट और अदालती कार्यवाही आने वाले महीनों में कर्नाटक की सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर बड़े सवाल खड़े करेगी।