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केपीएससी भर्ती घोटाला: सीआईडी ने सौंपी रिपोर्ट, ₹1.5 करोड़ कैश ट्रेल और ओएमआर हेरफेर उजागर

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केपीएससी भर्ती घोटाला: सीआईडी ने सौंपी रिपोर्ट, ₹1.5 करोड़ कैश ट्रेल और ओएमआर हेरफेर उजागर

सारांश

कर्नाटक के केपीएससी भर्ती घोटाले में सीआईडी की रिपोर्ट ने ₹1.5 करोड़ का कैश ट्रेल, ओएमआर शीट में हेरफेर और BJP नेता बसवराज कनाले समेत पाँच बिचौलियों की भूमिका उजागर की है। अब कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी को 100 दिनों में जांच पूरी करनी है।

मुख्य बातें

सीआईडी ने केपीएससी भर्ती घोटाले की प्रगति रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंपी।
जांच में ₹1.5 करोड़ से अधिक की राशि ट्रेस या जब्त की गई; करीब ₹22 लाख के सोने-हीरे के गहने भी बरामद।
गिरफ्तार BJP नेता बसवराज कनाले पर तीन उम्मीदवारों से ₹60 लाख नकद वसूलने का आरोप।
जेल में बंद आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार पर ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर में सहयोग का आरोप।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच एसआईटी (वरिष्ठ आईपीएस आलोक कुमार के नेतृत्व में) को सौंपी गई; 100 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी।
यह भर्ती 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों के लिए थी।

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती घोटाले में सीआईडी ने अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंप दी है। अधिकारियों ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी। रिपोर्ट में ₹1.5 करोड़ से अधिक की नकद राशि का पता लगाया गया है, साथ ही ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर और बिचौलियों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का पूरा ब्यौरा सामने आया है।

घोटाले की पूरी पृष्ठभूमि

यह मामला 400 पशु चिकित्सा अधिकारी (वेटरनरी ऑफिसर) पदों की भर्ती से जुड़ा है, जो केपीएससी के माध्यम से आयोजित की गई थी। परीक्षा परिणाम आने के बाद प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर और उम्मीदवारों से बड़ी रकम वसूली के आरोप सामने आए। इसके बाद सीआईडी ने जांच की शुरुआत की थी।

गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक में सार्वजनिक भर्ती प्रणाली में भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के बीच सामने आया है। बेंगलुरु स्थित इस आयोग पर अब न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जवाबदेही का दबाव है।

कैश ट्रेल और जब्त संपत्ति

सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बसवराज कनाले की इस घोटाले में केंद्रीय भूमिका रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार, कनाले ने उम्मीदवारों को वेटरनरी ऑफिसर पद दिलाने का वादा करके उनसे नकद राशि वसूली।

कम से कम तीन उम्मीदवारों ने बसवराज कनाले को ₹60 लाख नकद दिए — किरण गौड़ा ने ₹10 लाख, मोहम्मद सोहेल ने ₹20 लाख और सलीम ओंती ने ₹30 लाख दिए। एजेंसी ने कनाले के पास से ₹5.60 लाख नकद भी जब्त किए हैं।

बैंक खातों की जांच में ओम लक्ष्मी सौहार्द को-ऑपरेटिव बैंक के एक खाते में ₹64 लाख, कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में ₹5.2 लाख और कनाले की पत्नी के खाते में करीब ₹71 लाख मिले। अलग-अलग खातों में ट्रेस या फ्रीज की गई कुल राशि लगभग ₹1.5 करोड़ आंकी गई है। इसके अतिरिक्त, करीब ₹22 लाख मूल्य के सोने और हीरे के गहने भी बरामद किए गए हैं।

आईएएस अधिकारी की भूमिका

सीआईडी रिपोर्ट में जेल में बंद आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की भूमिका का भी उल्लेख है, जो केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्य कर चुके हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, उन पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर करने में सहायता की।

जांच में यह भी सामने आया है कि ज्ञानेंद्र कुमार ने अपनी एक महिला मित्र को करीब ₹20 लाख के गहने दिए थे। यह लेन-देन भी जांचकर्ताओं द्वारा तैयार किए जा रहे वित्तीय ट्रेल का हिस्सा माना जा रहा है।

बिचौलियों का नेटवर्क

सीआईडी ने बसवराज कनाले समेत पाँच बिचौलियों की पहचान की है, जिन पर भर्ती घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। जांचकर्ता यह पड़ताल कर रहे हैं कि किस प्रकार इन बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया, उनसे रकम वसूली और परीक्षा से संबंधित सामग्री तक पहुँच बनाई।

एसआईटी को सौंपी गई जांच, हाईकोर्ट का निर्देश

कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद इस जांच को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया गया है। उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार के नेतृत्व वाली एसआईटी को 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। सीआईडी को मामले के सभी रिकॉर्ड एसआईटी को हस्तांतरित करने के लिए कहा गया है।

यह मामला यहीं नहीं रुकता — एसआईटी की रिपोर्ट और अदालती कार्यवाही आने वाले महीनों में कर्नाटक की सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर बड़े सवाल खड़े करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक वरिष्ठ नौकरशाह और संगठित बिचौलियों के बीच सांठगांठ को संभव बनाती हैं। आईएएस स्तर के अधिकारी का ओएमआर हेरफेर में संलिप्त होना दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें महज 'दलाल' स्तर तक सीमित नहीं हैं। असली परीक्षा अब एसआईटी की है — क्या 100-दिन की समयसीमा में वह उन उम्मीदवारों को न्याय दे पाएगी जिन्होंने योग्यता के बजाय पैसे से पद खरीदे जाते देखा? पारदर्शी परिणाम के बिना यह जांच भी पिछले कई 'स्कैम इन्वेस्टिगेशन' की तरह अदालती फाइलों में दफन होने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी भर्ती घोटाला क्या है?
यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा आयोजित 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों की भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर और उम्मीदवारों से नकद वसूली से जुड़ा है। परिणाम आने के बाद आरोप सामने आने पर सीआईडी ने जांच शुरू की थी।
सीआईडी ने केपीएससी मामले में कितनी राशि ट्रेस की है?
सीआईडी ने अब तक ₹1.5 करोड़ से अधिक की राशि विभिन्न बैंक खातों में ट्रेस या फ्रीज की है। इसके अलावा करीब ₹22 लाख मूल्य के सोने और हीरे के गहने भी बरामद किए गए हैं।
बसवराज कनाले की इस मामले में क्या भूमिका है?
जांचकर्ताओं के अनुसार गिरफ्तार BJP नेता बसवराज कनाले ने उम्मीदवारों को वेटरनरी ऑफिसर पद दिलाने का वादा करके उनसे कुल ₹60 लाख नकद वसूले। कनाले की पत्नी के बैंक खाते सहित उनसे जुड़े कई खातों में बड़ी राशि मिली है।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार पर क्या आरोप हैं?
केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक रह चुके आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार पर ओएमआर आंसर शीट में हेरफेर में सहयोग करने का आरोप है। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया है कि उन्होंने अपनी एक महिला मित्र को करीब ₹20 लाख के गहने दिए, जो वित्तीय ट्रेल का हिस्सा माने जा रहे हैं।
अब केपीएससी घोटाले की जांच कौन करेगा और कब तक?
कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच सीआईडी से लेकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार के नेतृत्व वाली विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई है। एसआईटी को 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करके समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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