30 सितंबर 2026
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केपीएससी भर्ती घोटाला: ईडी ने बसवराज कन्नाले को 14 दिन की हिरासत में भेजा, आईएएस गंगवार भी गिरफ्तार

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केपीएससी भर्ती घोटाला: ईडी ने बसवराज कन्नाले को 14 दिन की हिरासत में भेजा, आईएएस गंगवार भी गिरफ्तार

सारांश

कर्नाटक की वेटेरिनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और रिश्वत के इस घोटाले में ईडी ने दो बड़े आरोपियों को दबोचा है — एक दलाल और एक आईएएस अधिकारी। प्रति उम्मीदवार ₹30-40 लाख की रिश्वत, रिसॉर्ट में उत्तर रटवाना और सहकारी बैंक खाते से धन शोधन — यह घोटाला भर्ती तंत्र की कमजोरियों को बेनकाब करता है।

मुख्य बातें

बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर 2026 को ईडी ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया; 29 सितंबर 2026 को विशेष अदालत ने 14 दिन की ईडी हिरासत मंजूर की।
केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया; 21 सितंबर 2026 को उनकी भी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंपी गई।
घोटाले में प्रति उम्मीदवार ₹30 लाख से ₹40 लाख रिश्वत ली गई; शुरुआती माँग ₹80 लाख प्रति उम्मीदवार थी।
उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके के एक रिसॉर्ट में ले जाकर लीक प्रश्न-पत्र के उत्तर रटवाए गए।
ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर के बैंक खाते का उपयोग रिश्वत की राशि प्राप्त करने के लिए किया गया।
18 अगस्त से 24 अगस्त 2026 के बीच तलाशी में बरामद साक्ष्यों से धन को सोने के गहने, हवाई टिकट और बैंक ट्रांसफर के जरिए वैध दिखाने की कोशिश सामने आई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के 400 पदों के लिए आयोजित वेटेरिनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में हुई धाँधली के मामले में बसवराज कन्नाले को 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें आगे की जाँच के लिए 14 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। इस मामले में केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर

यह जाँच बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 318(3), 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत दर्ज हैं। ईडी ने इन एफआईआर को आधार बनाकर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जाँच प्रारंभ की। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षाओं में व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की उस श्रृंखला का हिस्सा है जो देश के कई राज्यों में सामने आती रही है।

कैसे हुआ घोटाला — मुख्य घटनाक्रम

जाँच के दौरान ईडी को मिले साक्ष्यों के अनुसार, बसवराज कन्नाले ने अपने साथियों के साथ मिलकर उम्मीदवारों के अवैध चयन की साजिश रची। उन्होंने केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से अपनी करीबी जान-पहचान का फायदा उठाकर लीक हुए प्रश्न-पत्र तक पहुँच बनाई। गंगवार पर गोपनीय परीक्षा सामग्री की कस्टडी और निगरानी की जिम्मेदारी थी।

जाँच के अनुसार, चुने गए उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहाँ उन्हें सही उत्तरों सहित लीक हुआ प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया गया। बसवराज कन्नाले और उनके साथियों की निगरानी में उम्मीदवारों को उत्तर याद कराए गए। परीक्षा के दिन उन्हें कन्नाले और उनके सहयोगियों द्वारा इंतजाम की गई गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया गया।

रिश्वत की रकम और धन शोधन का तरीका

जाँच में सामने आया कि शुरुआत में प्रत्येक उम्मीदवार से लगभग ₹80 लाख की माँग की गई थी। बातचीत के बाद यह रकम ₹30 लाख से ₹40 लाख प्रति उम्मीदवार तय की गई। तय राशि का एक हिस्सा नकद और बैंकिंग चैनलों के जरिए अग्रिम रूप से लिया गया, जबकि शेष राशि सुनिश्चित करने के लिए कुछ उम्मीदवारों से बिना रकम भरे हस्ताक्षरित चेक और प्रॉमिसरी नोट लिए गए।

जाँच के अनुसार, ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर के बैंक खाते का उपयोग इस अवैध रिश्वत से जुड़ी कुछ राशि प्राप्त करने के लिए किया गया। 18 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 के बीच की गई तलाशी और जब्ती कार्रवाई में बरामद सामग्री के विश्लेषण से पता चला कि अपराध से अर्जित धन को बैंक ट्रांसफर, सोने के गहनों की खरीद, हवाई यात्रा के लिए नकद भुगतान और नकद लेनदेन जैसे तरीकों से वैध दिखाने की कोशिश की गई।

दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई

बसवराज कन्नाले को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 17 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। उन पर आपराधिक गतिविधि से प्राप्त धन को अर्जित करने, एकत्र करने और संभालने का आरोप है। 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत ने उनकी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंपी।

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर परीक्षा से एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को सही उत्तरों सहित प्रश्न-पत्र लीक करने में मदद करने का आरोप है। प्रोडक्शन वारंट के आधार पर 21 सितंबर 2026 को उन्हें विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उनकी भी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंप दी।

आगे की जाँच

ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, धन शोधन की जड़ें और भी गहरी हो सकती हैं तथा अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला सरकारी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले दिनों में नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस प्रणालीगत विफलता का संकेत है जहाँ जाँच और निगरानी के तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय रहे। ₹30-40 लाख प्रति उम्मीदवार की रिश्वत यह भी बताती है कि सरकारी नौकरी की 'कीमत' किस स्तर तक पहुँच चुकी है — जो योग्य लेकिन कम संसाधन वाले उम्मीदवारों के लिए व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर देती है। सहकारी बैंक खाते के जरिए धन शोधन यह भी दर्शाता है कि इस नेटवर्क की जड़ें वित्तीय संस्थाओं तक फैली हुई थीं, जिसकी गहरी जाँच अभी बाकी है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी वेटेरिनरी ऑफिसर भर्ती घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पदों के लिए आयोजित वेटेरिनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में हुई धाँधली का मामला है, जिसमें आरोपियों ने उम्मीदवारों को ₹30-40 लाख की रिश्वत लेकर लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया। ईडी इस मामले में पीएमएलए के तहत धन शोधन की जाँच कर रही है।
बसवराज कन्नाले को कब और क्यों गिरफ्तार किया गया?
बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत ईडी ने गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने साथियों के साथ मिलकर उम्मीदवारों को लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया और अपराध से अर्जित धन को छिपाया।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की इस घोटाले में क्या भूमिका थी?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक थे और गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी थी। जाँच के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर अवैध रिश्वत के बदले परीक्षा से एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को सही उत्तरों सहित प्रश्न-पत्र लीक किया। उन्हें 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
इस घोटाले में धन शोधन कैसे किया गया?
जाँच के अनुसार, रिश्वत की राशि को बैंक ट्रांसफर, सोने के गहनों की खरीद, हवाई यात्रा के लिए नकद भुगतान और नकद लेनदेन के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर के बैंक खाते का उपयोग भी इस प्रक्रिया में किया गया।
इस मामले में अब तक की कानूनी कार्रवाई क्या है?
बसवराज कन्नाले को 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए विशेष अदालत ने 14 दिन की ईडी हिरासत में भेजा। आईएएस गंगवार को 21 सितंबर 2026 को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया और उनकी भी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंपी गई। मामले में आगे की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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