केपीएससी भर्ती घोटाला: ईडी ने बसवराज कन्नाले को 14 दिन की हिरासत में भेजा, आईएएस गंगवार भी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के 400 पदों के लिए आयोजित वेटेरिनरी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में हुई धाँधली के मामले में बसवराज कन्नाले को 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें आगे की जाँच के लिए 14 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। इस मामले में केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर
यह जाँच बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 318(3), 318(4), 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत दर्ज हैं। ईडी ने इन एफआईआर को आधार बनाकर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जाँच प्रारंभ की। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षाओं में व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की उस श्रृंखला का हिस्सा है जो देश के कई राज्यों में सामने आती रही है।
कैसे हुआ घोटाला — मुख्य घटनाक्रम
जाँच के दौरान ईडी को मिले साक्ष्यों के अनुसार, बसवराज कन्नाले ने अपने साथियों के साथ मिलकर उम्मीदवारों के अवैध चयन की साजिश रची। उन्होंने केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से अपनी करीबी जान-पहचान का फायदा उठाकर लीक हुए प्रश्न-पत्र तक पहुँच बनाई। गंगवार पर गोपनीय परीक्षा सामग्री की कस्टडी और निगरानी की जिम्मेदारी थी।
जाँच के अनुसार, चुने गए उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहाँ उन्हें सही उत्तरों सहित लीक हुआ प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराया गया। बसवराज कन्नाले और उनके साथियों की निगरानी में उम्मीदवारों को उत्तर याद कराए गए। परीक्षा के दिन उन्हें कन्नाले और उनके सहयोगियों द्वारा इंतजाम की गई गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया गया।
रिश्वत की रकम और धन शोधन का तरीका
जाँच में सामने आया कि शुरुआत में प्रत्येक उम्मीदवार से लगभग ₹80 लाख की माँग की गई थी। बातचीत के बाद यह रकम ₹30 लाख से ₹40 लाख प्रति उम्मीदवार तय की गई। तय राशि का एक हिस्सा नकद और बैंकिंग चैनलों के जरिए अग्रिम रूप से लिया गया, जबकि शेष राशि सुनिश्चित करने के लिए कुछ उम्मीदवारों से बिना रकम भरे हस्ताक्षरित चेक और प्रॉमिसरी नोट लिए गए।
जाँच के अनुसार, ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर के बैंक खाते का उपयोग इस अवैध रिश्वत से जुड़ी कुछ राशि प्राप्त करने के लिए किया गया। 18 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 के बीच की गई तलाशी और जब्ती कार्रवाई में बरामद सामग्री के विश्लेषण से पता चला कि अपराध से अर्जित धन को बैंक ट्रांसफर, सोने के गहनों की खरीद, हवाई यात्रा के लिए नकद भुगतान और नकद लेनदेन जैसे तरीकों से वैध दिखाने की कोशिश की गई।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई
बसवराज कन्नाले को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 17 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। उन पर आपराधिक गतिविधि से प्राप्त धन को अर्जित करने, एकत्र करने और संभालने का आरोप है। 29 सितंबर 2026 को पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत ने उनकी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंपी।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। उन पर अपने पद का दुरुपयोग कर परीक्षा से एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को सही उत्तरों सहित प्रश्न-पत्र लीक करने में मदद करने का आरोप है। प्रोडक्शन वारंट के आधार पर 21 सितंबर 2026 को उन्हें विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उनकी भी 14 दिन की हिरासत ईडी को सौंप दी।
आगे की जाँच
ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, धन शोधन की जड़ें और भी गहरी हो सकती हैं तथा अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला सरकारी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और आने वाले दिनों में नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।