1 अक्टूबर 2026
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केपीएससी पेपर लीक: संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- 'आयोग कांग्रेस का एटीएम बन गया'

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केपीएससी पेपर लीक: संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- 'आयोग कांग्रेस का एटीएम बन गया'

सारांश

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती पेपर लीक मामले में कांग्रेस पर सीधा हमला बोला — ₹80 लाख में पेपर बिकने और IAS अधिकारी की कथित संलिप्तता का दावा करते हुए कहा कि आयोग कांग्रेस का 'एटीएम' बन गया है। सर्वोच्च न्यायालय में SIT आदेश को चुनौती पर भी सवाल उठाया।

मुख्य बातें

संबित पात्रा ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में KPSC पेपर लीक मामले पर कांग्रेस को घेरा।
KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा 8-9 जनवरी 2026 को होनी थी, लेकिन 7 जनवरी को पेपर कथित तौर पर लीक हुआ।
परीक्षा में 1,400 अभ्यर्थी शामिल थे; ₹80 लाख में पेपर बेचने का आरोप; बसवराज कनाले का नाम सामने आया।
KPSC परीक्षा नियंत्रक व IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की कथित भूमिका जाँच में सामने आई।
उच्च न्यायालय के SIT गठन के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने पर पात्रा ने सवाल उठाए।
पात्रा ने KPSC को कांग्रेस का 'एटीएम' करार दिया और राहुल गांधी से जवाब माँगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले पर कांग्रेस और राहुल गांधी को सीधे घेरा। पात्रा ने आरोप लगाया कि KPSC अब 'कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन' नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए 'पैसा वसूलने वाला कमीशन' और 'एटीएम' बनकर रह गया है।

पेपर लीक का घटनाक्रम

पात्रा के अनुसार, KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा 8-9 जनवरी 2026 को आयोजित होनी थी, परंतु परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, 7 जनवरी 2026 को, पेपर कथित तौर पर लीक हो गया। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में करीब 1,400 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 400 उम्मीदवारों का चयन होना था।

भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, परीक्षा में शामिल एक अभ्यर्थी एस. मंजूनाथ को बाद में कथित तौर पर पता चला कि ऐसे कुछ उम्मीदवार भी चयनित हुए हैं जिनका पहले का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था। एक स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए कथित रूप से पैसे के लेन-देन की जानकारी सामने आने के बाद मंजूनाथ ने यह मामला उजागर किया।

जाँच में क्या सामने आया

पात्रा ने दावा किया कि मामले की जाँच राज्य की सीआईडी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने की। जाँच के दौरान KPSC के परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की कथित भूमिका सामने आई। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, 7 जनवरी को परीक्षा के सवाल और उत्तर एक पेन ड्राइव में डालकर बसवराज कनाले नामक व्यक्ति को कथित तौर पर सौंपे गए।

पात्रा ने आगे आरोप लगाया कि बसवराज कनाले ने कई अभ्यर्थियों से संपर्क कर कथित तौर पर ₹80 लाख के बदले पेपर उपलब्ध कराने की पेशकश की। जाँच में शीर्ष 14 रैंक प्राप्त अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में उल्लेखनीय समानता भी कथित तौर पर पाई गई।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा मामला

पात्रा ने बताया कि यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुँचा, जहाँ कथित तौर पर विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि उच्च न्यायालय के SIT गठन के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में क्यों चुनौती दी गई — और इस कदम के पीछे किसका हाथ है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों को लेकर पहले से ही दबाव में है।

कांग्रेस पर सीधा हमला

पात्रा ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस-शासित राज्यों और भाजपा-शासित राज्यों के मामलों में पार्टी का रवैया बिल्कुल अलग-अलग होता है। उन्होंने राहुल गांधी से माँग की कि वे कर्नाटक में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जवाब दें और बताएँ कि राज्य सरकार एवं प्रशासन की इसमें क्या भूमिका रही।

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि परीक्षा के सवाल और उत्तर पहले ही अभ्यर्थियों तक पहुँच गए थे, तो स्थानीय खुफिया तंत्र और प्रशासन क्या कर रहा था, और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण था।

आगे क्या होगा

फिलहाल SIT जाँच और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के बीच यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है। कर्नाटक सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो प्रेस कॉन्फ्रेंस का वक्त और स्वर न्याय की माँग है या राजनीतिक बढ़त की कोशिश। आलोचक यह भी पूछेंगे कि भाजपा-शासित राज्यों में हुए पेपर लीक मामलों पर पार्टी ने कितनी तत्परता दिखाई। KPSC घोटाले की जड़ें प्रशासनिक निगरानी की विफलता में हैं — राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे, असली जवाबदेही SIT की रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद ही तय होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी पेपर लीक मामला क्या है?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा 8-9 जनवरी 2026 को होनी थी, लेकिन कथित तौर पर 7 जनवरी को ही पेपर लीक हो गया। जाँच में IAS अधिकारी और एक बिचौलिए की कथित संलिप्तता सामने आई है।
संबित पात्रा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
BJP प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि KPSC कांग्रेस के लिए 'एटीएम' बन गया है और पार्टी अपने-शासित राज्यों में भ्रष्टाचार पर चुप रहती है। उन्होंने राहुल गांधी से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जवाब माँगा।
KPSC पेपर लीक में किस-किस की भूमिका बताई गई है?
BJP के दावों के अनुसार, KPSC के परीक्षा नियंत्रक व IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की कथित भूमिका जाँच में सामने आई। बसवराज कनाले नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर ₹80 लाख में पेपर उपलब्ध कराने की पेशकश की।
इस मामले में SIT की भूमिका क्या है?
उच्च न्यायालय ने कथित तौर पर SIT गठित करने का आदेश दिया है। हालाँकि पात्रा ने सवाल उठाया कि इस SIT आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती क्यों दी गई, जिससे जाँच की स्वतंत्रता पर संदेह पैदा होता है।
इस मामले से कितने उम्मीदवार प्रभावित हुए?
परीक्षा में करीब 1,400 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 400 उम्मीदवारों का चयन होना था। जाँच में शीर्ष 14 रैंक प्राप्त अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर उल्लेखनीय समानता पाई गई।
राष्ट्र प्रेस
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