परीक्षा पेपर लीक: कर्नाटक कांग्रेस का BJP पर आरोप, सुप्रीम कोर्ट जज से जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 19 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देशव्यापी परीक्षा पेपर लीक नेटवर्क को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र राष्ट्रीय जाँच कराई जाए, ताकि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का जवाबदेह निर्धारण हो सके।
मुख्य आरोप और दावे
हरिप्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाल ही में राजस्थान के कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 से 2026 के बीच पूरे भारत में 152 परीक्षा परिणाम लीक हुए हैं। उनके अनुसार इनमें से अधिकांश घटनाएँ BJP-शासित राज्यों में हुई हैं। हालाँकि, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में पुलिस ने BJP नेताओं के परिवारों से जुड़े व्यक्तियों के पास से लीक हुए प्रश्न पत्र बरामद किए हैं। यह दावा भी उन्होंने बिना विशिष्ट दस्तावेज़ी प्रमाण के किया।
छात्रों पर असर और शिक्षा की विश्वसनीयता
हरिप्रसाद ने कहा कि प्रश्न पत्र लीक होना केवल परीक्षाओं का मसला नहीं, बल्कि यह भारत की पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। उनके शब्दों में, 'छात्र और उनके परिवार वर्षों का परिश्रम, त्याग और वित्तीय संसाधन लगाते हैं — जब प्रश्न पत्र लीक होते हैं, तो उनकी आकांक्षाएँ चकनाचूर हो जाती हैं।' उन्होंने IIT, IIM, IISc और AIIMS जैसे संस्थानों को भारत के शैक्षणिक निवेश का प्रतीक बताते हुए कहा कि इन संस्थाओं की साख बचाना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र संगठन सड़कों पर उतर चुके हैं और सर्वोच्च न्यायालय स्वयं इस मामले की सुनवाई कर रहा है।
कर्नाटक PSI घोटाले का संदर्भ
हरिप्रसाद ने कर्नाटक पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) भर्ती परीक्षा घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने उस समय की अनियमितताओं का विरोध किया था, तब उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने बताया कि अदालतों ने हाल ही में वे मामले रद्द कर दिए हैं, जिसे उन्होंने अपने रुख की न्यायिक स्वीकृति बताया।
जाँच की माँग और राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा पारदर्शिता को एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उठा रही है। हरिप्रसाद की माँग है कि जाँच का दायरा केवल एक परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि पिछले एक दशक में हुई सभी लीक घटनाओं की व्यापक समीक्षा हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है और बार-बार पेपर लीक होना इस अधिकार का उल्लंघन है।
BJP की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और विधानसभाओं में और तीखा रूप ले सकता है।