'संसद चलो' पर कर्नाटक में सियासी संग्राम: BJP ने कहा 'साजिश', कांग्रेस बोली 'अमानवीय दमन'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 'संसद चलो' मार्च के दौरान जंतर-मंतर के निकट प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की खबरों ने कर्नाटक की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी है। 21 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए — BJP ने आंदोलन को 'पूर्व नियोजित साजिश' बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों पर 'अमानवीय हमला' करार दिया।
कांग्रेस का रुख: दमन और जवाबदेही की मांग
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने और छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि नीट परीक्षा के बार-बार पेपर लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही मांग रहे छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई की गई।
हरिप्रसाद ने कहा, 'छात्रों के हाथों में किताबें, पोस्टर और न्याय की मांग थी, जबकि सरकार ने उनके सामने लाठियां, बैरिकेड, पुलिस बल और गिरफ्तारियां खड़ी कर दीं। जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब नहीं दे सकती, वह उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।'
उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना संविधान-प्रदत्त अधिकार है और सवाल उठाया कि अपने भविष्य को लेकर चिंता जताने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार उचित नहीं है।
कांग्रेस की मांगें
हरिप्रसाद ने तीन प्रमुख मांगें रखीं: घायल छात्रों को तत्काल चिकित्सा सुविधा, हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई, और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नैतिक आधार पर इस्तीफा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसते हुए कहा कि 'परीक्षा पे चर्चा' करने वाले प्रधानमंत्री छात्रों के वास्तविक सवालों का सामना करने का साहस नहीं रखते।
BJP का पक्ष: साजिश और पेशेवर पुलिसिंग
कर्नाटक BJP अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि BJP शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन संसद की घेराबंदी, हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन के पीछे 'टूलकिट गैंग', विपक्षी दल और कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी तत्व सक्रिय हैं, जो राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों के आंदोलन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस ने अत्यंत पेशेवर तरीके से स्थिति संभाली और सुरक्षा बलों के कई जवानों के घायल होने के बावजूद न्यूनतम बल का प्रयोग किया।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद किया था और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार शाम प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आक्रोश व्याप्त है। गौरतलब है कि 'संसद चलो' मार्च का मुख्य उद्देश्य शिक्षा मंत्री से जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करना था। यह घटना उस व्यापक बहस को और तीखा करती है कि लोकतांत्रिक विरोध की सीमाएं कहाँ तय होती हैं और राज्य बल का उचित प्रयोग क्या है।
आगे की स्थिति
कर्नाटक में दोनों दलों के बीच यह बयानबाजी राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतिबिंब है। आलोचकों का कहना है कि छात्रों की मूल मांगें — नीट सुधार और पेपर लीक पर जवाबदेही — इस राजनीतिक शोर में दब सकती हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाती है या नहीं।