सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त: कांग्रेस का तंज — 'छात्रों की मांगें अब भी अनसुनी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने 24 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्त होने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को कभी 'चीन का एजेंट' कहा गया, उसी का अनशन तुड़वाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को आगे आना पड़ा — यह सरकार की बेचैनी को उजागर करता है। साथ ही राठौर ने स्पष्ट किया कि नीट पेपर लीक मामले में आंदोलनरत छात्रों की मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राठौर ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को वांगचुक का अनशन समाप्त कराने के लिए स्वयं आगे आना पड़ा। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार मौजूदा जन-आंदोलन से उपजे दबाव को महसूस कर रही है और स्थिति पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।
छात्रों की मांग अब भी बरकरार
नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में आंदोलन कर रहे छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। कांग्रेस ने इस मांग को अपना समर्थन दिया है। राठौर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का प्रयोग किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
संसद में चर्चा की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश का हवाला देते हुए राठौर ने कहा कि यदि सरकार नए कानून का मसौदा तैयार कर चुकी है, तो उसे इस पर विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री सोशल मीडिया के बजाय संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराएं, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके और कारगर समाधान निकल सके।
मध्य प्रदेश कांग्रेस का हमला
मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने भी पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। ओझा ने कहा कि देशभर के छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय हो रहा है और परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा कमज़ोर हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धरना-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था के नाम पर छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद संसद के मानसून सत्र में भी गूंज रहा है और विपक्ष सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाए हुए है। गौरतलब है कि छात्रों का आंदोलन अभी थमा नहीं है — शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती।